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नौ शेरा के ‘शेर’ का गांव बीबीपुर बदहाल
Mau
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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घोसी। ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा’ के विपरीत घोसी ब्लाक के बीबीपुर गांव में स्थित प्रथम भारतीय मुस्लिम ब्रिगेडियर उस्मान की हवेली जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच गई है। यही नहीं महावीर चक्र विजेता के गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ब्रिगेडियर के शहादत के दशकों बाद भी शासन प्रशासन की ओर से उनकी यादोें को संजोए जाने का प्रयास तक नहीं किया जा सका है।
पाकिस्तान प्रायोजित कबायली आक्रमण के समय 1948 को कश्मीर के नौ शेरा बार्डर पर दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए उन्हें खदेड़ने में ब्रिगेडियर उस्मान सफल रहे। उसी दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। बुजुर्गों के अनुसार ब्रिगेडियर उस्मान का बचपन बीबीपुर गांव स्थित हवेली में गुजरा था। जिस हवेली में क्षेत्र के बहुत से लोग अपनी समस्या बताकर सहायता प्राप्त करते थे। आज हालत यह है कि जीर्ण शीर्ण अवस्था में हो गई है। उचित देखरेख के अभाव में अधिकांश वस्तुएं नष्ट हो गई हैं या गायब हो गई हैं। ब्रिगेडियर उस्मान के रिश्तेदारों में कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष रहे मोहम्मद मुख्तार अंसारी वर्तमान उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी तथा बाहुबलि विधायक मुख्तार अंसारी नाम शामिल है। बावजूद उनके नाम पर प्रतिमा स्थापित होना तो दूर शिलापट्ट तक नहीं लगाया जा सका है और न ही उनके सपने को साकार करने की दिशा में कोई पहल तक नहीं की जा सकी है। बीबीपुर गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। गांव में न अस्पताल है न अच्छी सड़कें। गांव जाने के लिए घोसी-मधुबन मार्ग से तीन किमी पैदल चलना पड़ता है। ब्रिगेडियर के गांव में उनके नाम पर कुछ भी नहीं है। उनके नाम पर एक प्राइवेट जूनियर हाईस्कूल है परंतु वह भी दुर्दशा का शिकार है। एक प्रवेश द्वार तो बना है वह भी अधूरा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में ब्रिगेडियर उस्मान की सभी यादें मिट जाएंगी।
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पाकिस्तान प्रायोजित कबायली आक्रमण के समय 1948 को कश्मीर के नौ शेरा बार्डर पर दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए उन्हें खदेड़ने में ब्रिगेडियर उस्मान सफल रहे। उसी दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। बुजुर्गों के अनुसार ब्रिगेडियर उस्मान का बचपन बीबीपुर गांव स्थित हवेली में गुजरा था। जिस हवेली में क्षेत्र के बहुत से लोग अपनी समस्या बताकर सहायता प्राप्त करते थे। आज हालत यह है कि जीर्ण शीर्ण अवस्था में हो गई है। उचित देखरेख के अभाव में अधिकांश वस्तुएं नष्ट हो गई हैं या गायब हो गई हैं। ब्रिगेडियर उस्मान के रिश्तेदारों में कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष रहे मोहम्मद मुख्तार अंसारी वर्तमान उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी तथा बाहुबलि विधायक मुख्तार अंसारी नाम शामिल है। बावजूद उनके नाम पर प्रतिमा स्थापित होना तो दूर शिलापट्ट तक नहीं लगाया जा सका है और न ही उनके सपने को साकार करने की दिशा में कोई पहल तक नहीं की जा सकी है। बीबीपुर गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। गांव में न अस्पताल है न अच्छी सड़कें। गांव जाने के लिए घोसी-मधुबन मार्ग से तीन किमी पैदल चलना पड़ता है। ब्रिगेडियर के गांव में उनके नाम पर कुछ भी नहीं है। उनके नाम पर एक प्राइवेट जूनियर हाईस्कूल है परंतु वह भी दुर्दशा का शिकार है। एक प्रवेश द्वार तो बना है वह भी अधूरा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में ब्रिगेडियर उस्मान की सभी यादें मिट जाएंगी।
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