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इयरेंडर 201
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सुपर इंट्रो
सत्ता बदली लेकिन जिले से वाराणसी और गोरखपुर सहित अन्य महानगरों को जाने के लिए यातायात व्यवस्था को सुगम नहीं किया जा सका। हालांकि राजधानी लखनऊ के लिए एक ट्रेन की सौगात रेल मंत्री ने दिया लेकिन ट्रेन के जिले से चलने और राजधानी तक पहुंचने का रुट और समय इतना दुर्गम है कि लोग कष्ट सहकर बस की यात्रा करना उचित समझते है। कमोवेश यही हाल वाराणसी मऊ और मऊ गोरखपुर रुट का है। मंडल मुख्यालय जाने के लिए भी लोगों को कम मशक्कत नहीं करनी पड़ती, क्योंकि फोरलेन का कार्य अभी भी अधर में है।
कवायद तो हुई लेकिन सुगम नहीं हुआ यातायात
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। वर्ष 2017 के समाप्त होने पर नए वर्ष 2018 के आने पर जिलेवासियों में सुगम यातायात की आस जगी थी, क्योंकि इस समय तक शासन बदल चुका था, ऐसे में लोगों में विकास की आस जगी। लेकिन वर्ष 2018 बीतने को है, न रोडवेज का निर्माण पूरा किया जा सका और नाही रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर शेड लगाया गया। इतना ही नहीं अमान परिवर्तन की आधारशिला तो विधान सभा चुनाव से पूर्व रखी गई, लेकिन आज तक उस पर काम भी नहीं शुरू हो सका। यही नहीं रूटों पर किसी प्रकार की कोई बस की सौगात अपेक्षा के अनुरुप नहीं मिली, इससे जिले के लोग कल की भांति आज भी दुर्गम यात्रा करने को विवश है।
बताते चले पूर्व की सपा सरकार ने मऊ से मंडल मुख्यालय की दूरी कम करने के लिए फोरलेन की सौगात जिले वासियों को दिया था। लेकिन सत्ता बदले जाने पर निर्माण कार्य को रोक दिया गया। इसका परिणाम है कि जांच के बाद अब जब निर्माण शुरू हुआ तो इस वर्ष की समाप्ति पर भी पूरा नहीं हो सका है। कमोवेश यही हाल मऊ से वाराणसी मार्ग की है, वाराणसी जाने के लिए कदाचित कोई व्यक्ति बस का सहारा लेता है, कारण जर्जर और गड्ढा युक्त सड़क। मऊ से वाराणसी की दूरी कुल 115 किमी है। यही हाल मऊ से गोरखपुर की 100 किमी की दूरी पर मौजूद गोरखपुर जिले की है। यह सड़क जमाने बाद भी नहीं सुधरी ऐसे में इन दोनों रुटों पर लोग ट्रेन की यात्रा कर सफर पुरा करने का प्रयास करते है, लोगों का मानना है कि ट्रेन से समय तो लगेगा, लेकिन शरीर में थकावट तो नहीं न होगी। रही बात सौगात की तो बताते चले 14 अगस्त को केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने मऊ-लखनऊ द्वीसाप्ताहिक रेल सेवा का सौगात दिया। लेकिन उसका रुट और मऊ से लखनऊ पहुंचने में लगने वाला समय दोनों जिलेवासियों के लिए अनुकुल नहीं है। रोडवेज बस स्टेशन की सौगात मिली तो वह आज तक बनकर तैयार ही नहीं हो सका। आज यात्रियों के पास रोडवेज में धूप और बरसात से बचाव का कोई इंतेजाम नहीं है।
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इनसेट
चालकों के अभाव में खड़ी रहती हैं बसें
मऊ। कहने के लिए मऊ जिले में दो बस स्टेशन है, दोनों स्टेशनों को मिलाकर कुल 107 बसें है। इसमें अकेले मऊ डिपो के पास 54 बसें है, लेकिन रोडवेज में चालकों और परिचालकों की कमी के कारण 15 बसें खड़ी रहती है। इससे जहां रोडवेज को राजस्व का घाटा हो रहा, वहीं यात्रियों को हर रुट पर यात्रा की सुविधा नहीं मिल पाती। दोहरीघाट से मधुबन के बीच कोई रोडवेज की सुविधा नहीं है। जबकि क्षेत्र के लोग इस रुट पर बस की मांग करते हुए अधिकारियों से लेकर निगम तक को ज्ञापन सौंप चुकें है।
इनसेट
छिन गई रेल बस की सुविधा भी
मऊ। बदहाल सड़कों और मंहगी यात्रा से बचने के लिए जिले के एक छोर दोहरीघाट से मऊ मुख्यालय आने के लिए रेल बस का सहारा लेते थे। इस रेल बस से लोग सस्ते में मऊ मुख्यालय पहुंच जाते थे। लेकिन वर्ष 2016 में इंदारा जंक्शन पर रेल मंत्री मनोज सिंहा के द्वारा अमान परिवर्तन की रखी गई आधार शिला के एवज में काम शुरू करने के नाम पर रेल बस को इस वर्ष बंद कर दिया गया। रेल बस बंद होने से लोगों को जर्जर मार्ग के सहारे मऊ आना होता है। जबकि अमान परिवर्तन का काम भी नहीं शुरू किया जा सका। इससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
इनसेट
कवायद तो हुई नहीं मिली कामयाबी
मऊ। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने वर्ष 2015 में स्वचालित सीढी की सौगात दी। इसके लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया। सीढी बनकर तैयार भी हो गई, लेकिन आज तक यात्रियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल सका। यह सीढी तब चलती है जब कोई रेलवे का अधिकारी या फिर मंत्री आता है। रेलवे के पास इसके शुरु न किए जाने के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं है। इसीक्रम में फुट ओवर ब्रिज निर्माण कराने के लिए प्लेटफार्म नंबर तीन पर गड्ढा खोद कर छोडा गया है। जमाने से खोदे गए इस गड्ढे में कम फुट ओवर ब्रिज की आधार शिला रखी जाएगी। इसके बारे में कोई बताने वाला नहीं है।
इनसेट
स्टेशन पर है सुरक्षा का अभाव
मऊ। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा का अभाव है, यहां पर आरपीएफ के पास बीते छह माह से कंट्रेलरुम बनाया जा रहा है, इसके लिए आरपीएफ के पुराने पोस्ट तक को तोड़ दिया गया। लेकिन छह माह से अधिक का समय बीतने के बाद भी यह निर्माण पूरा नहीं हो सका। वाशिंग पिट और अन्य निर्माण भी स्टेशन पर अधर में है।
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सुपर इंट्रो
सत्ता बदली लेकिन जिले से वाराणसी और गोरखपुर सहित अन्य महानगरों को जाने के लिए यातायात व्यवस्था को सुगम नहीं किया जा सका। हालांकि राजधानी लखनऊ के लिए एक ट्रेन की सौगात रेल मंत्री ने दिया लेकिन ट्रेन के जिले से चलने और राजधानी तक पहुंचने का रुट और समय इतना दुर्गम है कि लोग कष्ट सहकर बस की यात्रा करना उचित समझते है। कमोवेश यही हाल वाराणसी मऊ और मऊ गोरखपुर रुट का है। मंडल मुख्यालय जाने के लिए भी लोगों को कम मशक्कत नहीं करनी पड़ती, क्योंकि फोरलेन का कार्य अभी भी अधर में है।
कवायद तो हुई लेकिन सुगम नहीं हुआ यातायात
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। वर्ष 2017 के समाप्त होने पर नए वर्ष 2018 के आने पर जिलेवासियों में सुगम यातायात की आस जगी थी, क्योंकि इस समय तक शासन बदल चुका था, ऐसे में लोगों में विकास की आस जगी। लेकिन वर्ष 2018 बीतने को है, न रोडवेज का निर्माण पूरा किया जा सका और नाही रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर शेड लगाया गया। इतना ही नहीं अमान परिवर्तन की आधारशिला तो विधान सभा चुनाव से पूर्व रखी गई, लेकिन आज तक उस पर काम भी नहीं शुरू हो सका। यही नहीं रूटों पर किसी प्रकार की कोई बस की सौगात अपेक्षा के अनुरुप नहीं मिली, इससे जिले के लोग कल की भांति आज भी दुर्गम यात्रा करने को विवश है।
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बताते चले पूर्व की सपा सरकार ने मऊ से मंडल मुख्यालय की दूरी कम करने के लिए फोरलेन की सौगात जिले वासियों को दिया था। लेकिन सत्ता बदले जाने पर निर्माण कार्य को रोक दिया गया। इसका परिणाम है कि जांच के बाद अब जब निर्माण शुरू हुआ तो इस वर्ष की समाप्ति पर भी पूरा नहीं हो सका है। कमोवेश यही हाल मऊ से वाराणसी मार्ग की है, वाराणसी जाने के लिए कदाचित कोई व्यक्ति बस का सहारा लेता है, कारण जर्जर और गड्ढा युक्त सड़क। मऊ से वाराणसी की दूरी कुल 115 किमी है। यही हाल मऊ से गोरखपुर की 100 किमी की दूरी पर मौजूद गोरखपुर जिले की है। यह सड़क जमाने बाद भी नहीं सुधरी ऐसे में इन दोनों रुटों पर लोग ट्रेन की यात्रा कर सफर पुरा करने का प्रयास करते है, लोगों का मानना है कि ट्रेन से समय तो लगेगा, लेकिन शरीर में थकावट तो नहीं न होगी। रही बात सौगात की तो बताते चले 14 अगस्त को केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने मऊ-लखनऊ द्वीसाप्ताहिक रेल सेवा का सौगात दिया। लेकिन उसका रुट और मऊ से लखनऊ पहुंचने में लगने वाला समय दोनों जिलेवासियों के लिए अनुकुल नहीं है। रोडवेज बस स्टेशन की सौगात मिली तो वह आज तक बनकर तैयार ही नहीं हो सका। आज यात्रियों के पास रोडवेज में धूप और बरसात से बचाव का कोई इंतेजाम नहीं है।
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चालकों के अभाव में खड़ी रहती हैं बसें
मऊ। कहने के लिए मऊ जिले में दो बस स्टेशन है, दोनों स्टेशनों को मिलाकर कुल 107 बसें है। इसमें अकेले मऊ डिपो के पास 54 बसें है, लेकिन रोडवेज में चालकों और परिचालकों की कमी के कारण 15 बसें खड़ी रहती है। इससे जहां रोडवेज को राजस्व का घाटा हो रहा, वहीं यात्रियों को हर रुट पर यात्रा की सुविधा नहीं मिल पाती। दोहरीघाट से मधुबन के बीच कोई रोडवेज की सुविधा नहीं है। जबकि क्षेत्र के लोग इस रुट पर बस की मांग करते हुए अधिकारियों से लेकर निगम तक को ज्ञापन सौंप चुकें है।
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छिन गई रेल बस की सुविधा भी
मऊ। बदहाल सड़कों और मंहगी यात्रा से बचने के लिए जिले के एक छोर दोहरीघाट से मऊ मुख्यालय आने के लिए रेल बस का सहारा लेते थे। इस रेल बस से लोग सस्ते में मऊ मुख्यालय पहुंच जाते थे। लेकिन वर्ष 2016 में इंदारा जंक्शन पर रेल मंत्री मनोज सिंहा के द्वारा अमान परिवर्तन की रखी गई आधार शिला के एवज में काम शुरू करने के नाम पर रेल बस को इस वर्ष बंद कर दिया गया। रेल बस बंद होने से लोगों को जर्जर मार्ग के सहारे मऊ आना होता है। जबकि अमान परिवर्तन का काम भी नहीं शुरू किया जा सका। इससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
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कवायद तो हुई नहीं मिली कामयाबी
मऊ। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने वर्ष 2015 में स्वचालित सीढी की सौगात दी। इसके लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया। सीढी बनकर तैयार भी हो गई, लेकिन आज तक यात्रियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल सका। यह सीढी तब चलती है जब कोई रेलवे का अधिकारी या फिर मंत्री आता है। रेलवे के पास इसके शुरु न किए जाने के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं है। इसीक्रम में फुट ओवर ब्रिज निर्माण कराने के लिए प्लेटफार्म नंबर तीन पर गड्ढा खोद कर छोडा गया है। जमाने से खोदे गए इस गड्ढे में कम फुट ओवर ब्रिज की आधार शिला रखी जाएगी। इसके बारे में कोई बताने वाला नहीं है।
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स्टेशन पर है सुरक्षा का अभाव
मऊ। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा का अभाव है, यहां पर आरपीएफ के पास बीते छह माह से कंट्रेलरुम बनाया जा रहा है, इसके लिए आरपीएफ के पुराने पोस्ट तक को तोड़ दिया गया। लेकिन छह माह से अधिक का समय बीतने के बाद भी यह निर्माण पूरा नहीं हो सका। वाशिंग पिट और अन्य निर्माण भी स्टेशन पर अधर में है।