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सात साल बाद भी नहीं बन सकी ओटी और गैस स्टोर
Updated Wed, 21 Feb 2018 10:36 PM IST
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मऊ। जिला अस्पताल में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्ष 2009-10 में चार करोड़ की लागत से प्रारंभ हुए मॉडलर ओटी, जनरल वार्ड, आईसीयू, आयुष ब्लाक, गैस स्टोर, गैरेज और अस्पताल का रेनोवेशन सात सालों में पूरे नहीं हुए। इन प्रोजेक्टों को पूरा करने का जिम्मा यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लिमिटेड को सौंपा गया था। प्रोजेक्ट को वर्ष 2012 में पूरा होना था। लेकिन सात वर्ष बाद भी इनमें से चार अधूरे हैं।
जिला अस्पताल परिसर में वर्ष 2010 से 2017 की अवधि में कार्यदायी संस्था की ओर से 50.43 लाख की लागत से आईसीयू वार्ड, 6.63 लाख से बने आयुष ब्लाक और 96.43 लाख की राशि से उच्चीकृत जनरल वार्ड का निर्माण पूरा किया जा सका है। इन्हें अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर किया गया है। जब कि 84 लाख की लागत से होने वाला रेनोवेशन (नवीनीकरण कार्य) और 8.25 लाख की लागत से मेडिकल गैस स्टोर समेत अन्य कार्य अधूरे हैैं। आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि कार्यदायी संस्था की तरफ से कागज में सभी प्रोजेक्ट के तहत होने वाले सभी कार्यों को हैंड ओवर दिखा दिया है।
कागज में प्रोजेक्ट को हैंड ओवर कराए जाने पर स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक की तरफ से कार्यदायी संस्था के कार्यप्रणाली पर खेद प्रकट किया है। इसको लेकर सीएमएस डॉ. वृजकुमार द्वारा कई बार कार्यदायी संस्था को अधूरे कार्य पूरे करने के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन इस संबंध में संबंधित संस्था की ओर से न तो अधूरे कार्य पूरे कराए जा रहे हैं न ही विभाग की ओर से लिखे गए पत्रों का कोई जवाब दे रहे हैं। संस्था के मनमाने रवैया पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्ववारा 25 सितंबर 2017 को राष्ट्रीय कार्यक्रम अनुश्रवण एवं मूल्याकंन परिवार कल्याण महानिदेशालय को इस बारे में पत्र लिखकर अवगत कराया गया। महानिदेशालय की ओर से भी इस पर नाराजगी जताई गई है।
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जिला अस्पताल परिसर में वर्ष 2010 से 2017 की अवधि में कार्यदायी संस्था की ओर से 50.43 लाख की लागत से आईसीयू वार्ड, 6.63 लाख से बने आयुष ब्लाक और 96.43 लाख की राशि से उच्चीकृत जनरल वार्ड का निर्माण पूरा किया जा सका है। इन्हें अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर किया गया है। जब कि 84 लाख की लागत से होने वाला रेनोवेशन (नवीनीकरण कार्य) और 8.25 लाख की लागत से मेडिकल गैस स्टोर समेत अन्य कार्य अधूरे हैैं। आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि कार्यदायी संस्था की तरफ से कागज में सभी प्रोजेक्ट के तहत होने वाले सभी कार्यों को हैंड ओवर दिखा दिया है।
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कागज में प्रोजेक्ट को हैंड ओवर कराए जाने पर स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक की तरफ से कार्यदायी संस्था के कार्यप्रणाली पर खेद प्रकट किया है। इसको लेकर सीएमएस डॉ. वृजकुमार द्वारा कई बार कार्यदायी संस्था को अधूरे कार्य पूरे करने के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन इस संबंध में संबंधित संस्था की ओर से न तो अधूरे कार्य पूरे कराए जा रहे हैं न ही विभाग की ओर से लिखे गए पत्रों का कोई जवाब दे रहे हैं। संस्था के मनमाने रवैया पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्ववारा 25 सितंबर 2017 को राष्ट्रीय कार्यक्रम अनुश्रवण एवं मूल्याकंन परिवार कल्याण महानिदेशालय को इस बारे में पत्र लिखकर अवगत कराया गया। महानिदेशालय की ओर से भी इस पर नाराजगी जताई गई है।
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