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अधूरा टर्मिनल कार्य हुआ शुरू, जल्द पूरा होने की उम्मीद जगी
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मऊ। आदर्श रेलवे स्टेशनों में मऊ स्टेशन भी शुमार है, लेकिन हैरत की बात यह है कि यहां पर चल रहे विकास कार्यों को लेकर रेलवे अधिकारियों की ओर से लापरवाही का परिचय दिया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण टर्मिनल निर्माण है। 2016 से बन रहा टर्मिनल को ऐसे तो 18 माह में पूरा होना था, लेकिन बजट का अभाव, कभी वाशिंग पिट में तकनीकी निर्माण समस्या के चलते यह तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा है। उधर गोरखपुर महाप्रबंधक के प्रस्तावित निरीक्षण को देखते हुए इसका निर्माण कार्य पुन: शुरू कराया गया है। अधूरे वाशिंग पिट और टर्मिनल का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
रेलवे सूत्रों की मानें तो टर्मिनल का कार्य आगामी तीन-चार माह में पूरा हो सकता है। वाशिंग पिट में पटरी बिछाने के साथ अधूरे पड़े बांउड्रीवॉल, 700 मीटर लंबे ड्रेन का निर्माण, पटरी को बिछाने के लिए होल करने का कार्य किया जा रहा है। सूत्र बताते है कि जीएम राजीव अग्रवाल के इसी माह में प्रस्तावित दौरे को लेकर भी कार्य को 80 प्रतिशत से ज्यादा पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। खैर जो भी हो 2019 में जिलेवासियों को टर्मिनल की सौगात मिलने की प्रबल संभावना है।
बताते चले कि यूपीए सरकार में तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में घोषणा होने के बाद लंबित जिले का टर्मिनल का कार्य 16 करोड़ की राशि से 2016 में एनडीए सरकार में शुरू हुआ लेकिन तकनीकी खामियों के चलते 16 करोड़ का बजट इसके लिए कम पड़ गया। इसके चलते एक साल तक काम रुका रहा, इसके चलते जो कार्य 18 माह में पूरा होना था वो तीन साल बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। जून 2018 में गोरखपुर के नवागत जीएम के आने के बाद रेलवे ने पुन: टेंडर प्रक्रिया अपनाकर पांच करोड़ की अतिरिक्त राशि अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए जारी की लेकिन 6 माह बाद भी कार्य पूरा नहीं हो सका। पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि अधूरे टर्मिनल का कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जिससे जिले के लोगों को लाभ मिल सके।
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तो ये मिलेगी सुविधा
मऊ। जिले में टर्मिनल बनाने की स्वीकृति 2012-13 रेलवे बजट में मिली थी। वर्ष 2014 में रेलराज्यमंत्री द्वारा 18 माह में फुल लेंथ 686 मीटर की स्टेबलिंग, 250 मीटर स्पेयर लाइन के निर्माण के साथ दो लाइन वाली सिक लाइन, सवारी डिब्बा टर्मिनल, 35 मीटर कवर्डशेड के साथ 150 मीटर लंबी रेल लाइन बांउड्रीवॉल तथा 900 मीटर ड्रेन निर्माण होना है। साथ ही वाटरिंग, गाड़ियों के लिए डेडिकेट वाटर टैंक, खुरहट की ओर 600 मीटर शंटिंग नेक, डबल स्टोरी और मालगाड़ी डिब्बे का डिपो कार्यालय और संपर्क मार्ग बनाया जाएगा।
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रेलवे सूत्रों की मानें तो टर्मिनल का कार्य आगामी तीन-चार माह में पूरा हो सकता है। वाशिंग पिट में पटरी बिछाने के साथ अधूरे पड़े बांउड्रीवॉल, 700 मीटर लंबे ड्रेन का निर्माण, पटरी को बिछाने के लिए होल करने का कार्य किया जा रहा है। सूत्र बताते है कि जीएम राजीव अग्रवाल के इसी माह में प्रस्तावित दौरे को लेकर भी कार्य को 80 प्रतिशत से ज्यादा पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। खैर जो भी हो 2019 में जिलेवासियों को टर्मिनल की सौगात मिलने की प्रबल संभावना है।
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बताते चले कि यूपीए सरकार में तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में घोषणा होने के बाद लंबित जिले का टर्मिनल का कार्य 16 करोड़ की राशि से 2016 में एनडीए सरकार में शुरू हुआ लेकिन तकनीकी खामियों के चलते 16 करोड़ का बजट इसके लिए कम पड़ गया। इसके चलते एक साल तक काम रुका रहा, इसके चलते जो कार्य 18 माह में पूरा होना था वो तीन साल बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। जून 2018 में गोरखपुर के नवागत जीएम के आने के बाद रेलवे ने पुन: टेंडर प्रक्रिया अपनाकर पांच करोड़ की अतिरिक्त राशि अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए जारी की लेकिन 6 माह बाद भी कार्य पूरा नहीं हो सका। पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि अधूरे टर्मिनल का कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जिससे जिले के लोगों को लाभ मिल सके।
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मऊ। जिले में टर्मिनल बनाने की स्वीकृति 2012-13 रेलवे बजट में मिली थी। वर्ष 2014 में रेलराज्यमंत्री द्वारा 18 माह में फुल लेंथ 686 मीटर की स्टेबलिंग, 250 मीटर स्पेयर लाइन के निर्माण के साथ दो लाइन वाली सिक लाइन, सवारी डिब्बा टर्मिनल, 35 मीटर कवर्डशेड के साथ 150 मीटर लंबी रेल लाइन बांउड्रीवॉल तथा 900 मीटर ड्रेन निर्माण होना है। साथ ही वाटरिंग, गाड़ियों के लिए डेडिकेट वाटर टैंक, खुरहट की ओर 600 मीटर शंटिंग नेक, डबल स्टोरी और मालगाड़ी डिब्बे का डिपो कार्यालय और संपर्क मार्ग बनाया जाएगा।