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पारिवारिक लाभ योजना का लाभ पाने के इंतजार में 234 परिवार
Updated Tue, 23 Jan 2018 12:00 AM IST
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मऊ। प्रदेश सरकार ने कई जनकाल्याणकारी योजनाओं का संचालन ऑनलाइन कर दिया है। इसका उद्देश्य है कि योजना के संचालन में पारदर्शिता बनी रहे और लाथार्थियों को योजना का लाभ त्वरित रूप से मिल सके। लेकिन इनमें छोटी-छोटी त्रुटियां लाभार्थियों को भारी पड रही हैं। ऐसा ही जिले में पारिवारिक लाभ योजना के लाभार्थियों के साथ हो रहा है। जिले में ऐसे 234 लाभार्थियों को सिस्टम की गड़बड़ियों के चलते लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।
सरकार की इस योजना के तहत किसी दुर्घटना में घर के मुखिया अथवा कमाऊ सदस्य की असामयिक मौत पर सरकार मृतकों के परिजन को 30 हजार रुपये की मदद देती है। नई व्यवस्था के तहत मृतक के वारिस की तरफ से इस आशय का ऑनलाइन आवेदन देना होता है। संबंधित क्षेत्र के सेक्रेटरी और लेखपाल के सत्यापन के बाद उसे उपजिलाधिकारी की ओर से अपनी संस्तुति के साथ समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है। इसके बाद पीड़ित परिवार के सदस्य के बैंक खाते में 30 हजार रुपये भेज दिए जाते हैं। जिले में इस वित्तीय वर्ष में कुल 684 व्यक्तियों की असामयिक मौतें हुईं। इनके आवेदन किए गए। विभागीय जांच पड़ताल के बाद ये पात्र पाए गए और उपजिलाधिकारियों की संस्तुति के बाद सारी प्रकिया पूर्ण कर ली गई। इस योजना के तहत 450 पीडित परिवारों को तो योजना का लाभ मिल गया। लेकिन 234 ऐसे परिवार हैं जिन्हें इस योजना का लाभ पाने का इंतजार है। इनके मामलों में प्रदेश मुख्यालय से केवल इतना ही संदेश आता है कि धन का अंतरण फेल हो गया। किन कारणों से ऐसा हुआ , यह नहीं पता चल पाता है। लाभार्थी समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय का चक्कर लगाते हैं लेकिन इस विभाग को भी कुछ पता नहीं चल पाता है।
इस बाबत जिला समाज कल्याण अधिकारी मुक्तेश्वर चौबे का कहना है कि कंप्यूटर से ऑनलाइन आवेदन करते समय आई माइनर त्रुटियों जैसे कि बैंक एकाउंट या आधार नंबर,वृद्धावस्था में अंगूठों के निशन मैच न होने आदि में मामूूली त्रुटियों के चलते प्रदेश मुख्यालय से धनराशि का अंतरण नहीं हो पाता है। सारा सिस्टम ऑनलाइन होने के चलते हम अपनी तरफ से उसमें कोई संशोधन नहीं कर सकते अथवा न ही हम उसके कारणों को ही जान सकते। यह प्रकिया पूरी तरह ऑनलाइन है और सभी अफसरों के आईडीमेल और कोड हैं जिन्हें उन स्तरों पर बताया जा सकता है। हम अपनी तरफ से अलग से एक सामूहिक मेल करके इस समस्या से अवगत करा सकते हैं और हमारी ओर से ऐसा किया गया है लेकिन अभी तक 234 लाभार्थयों के बैंक खातों में योजना की राशि भेजी नहीं जा सकी है।
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केस 1
हलधरपुर थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव निवासी विनोद गुप्ता की मौत सड़क हादसे में हो गाई। पति के सभी संस्कारों को संपन्न कराने के बाद मृतक की पत्नी विमला ने पारिवारिक लाभ योजना का लाभ पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद समाज कल्याण अधिकारी की ओर से इसके बैंक खाते में योजना की रकम अंतरित करने की संस्तुति प्रदेश मुख्यालय भेजा। लेकिन वहां से उसका अंतरण फेल आ गया।
केेस 2
रतनपुरा ब्लाक के नसीराबाद कला गांव के मुकेश की मौत भी एक हादसे में हो गई। गांव के प्रधान और सेक्रेटरी की सलाह पर मुकेश की विधवा माया ने पारिवारिक लाभ योजना के तहत आनलाइन आवेदन किया। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी उसके बैंक खाते में योजना के रुपये नहीं आए। जब उसने जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में संपर्क किया तो उसे बताया गया कि यहां से सारी प्रकिय्रा पूरी करके भ्ेेजी जा चुकी है लेकिन उसके खाते में रुपये नहीं आए।
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सरकार की इस योजना के तहत किसी दुर्घटना में घर के मुखिया अथवा कमाऊ सदस्य की असामयिक मौत पर सरकार मृतकों के परिजन को 30 हजार रुपये की मदद देती है। नई व्यवस्था के तहत मृतक के वारिस की तरफ से इस आशय का ऑनलाइन आवेदन देना होता है। संबंधित क्षेत्र के सेक्रेटरी और लेखपाल के सत्यापन के बाद उसे उपजिलाधिकारी की ओर से अपनी संस्तुति के साथ समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है। इसके बाद पीड़ित परिवार के सदस्य के बैंक खाते में 30 हजार रुपये भेज दिए जाते हैं। जिले में इस वित्तीय वर्ष में कुल 684 व्यक्तियों की असामयिक मौतें हुईं। इनके आवेदन किए गए। विभागीय जांच पड़ताल के बाद ये पात्र पाए गए और उपजिलाधिकारियों की संस्तुति के बाद सारी प्रकिया पूर्ण कर ली गई। इस योजना के तहत 450 पीडित परिवारों को तो योजना का लाभ मिल गया। लेकिन 234 ऐसे परिवार हैं जिन्हें इस योजना का लाभ पाने का इंतजार है। इनके मामलों में प्रदेश मुख्यालय से केवल इतना ही संदेश आता है कि धन का अंतरण फेल हो गया। किन कारणों से ऐसा हुआ , यह नहीं पता चल पाता है। लाभार्थी समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय का चक्कर लगाते हैं लेकिन इस विभाग को भी कुछ पता नहीं चल पाता है।
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इस बाबत जिला समाज कल्याण अधिकारी मुक्तेश्वर चौबे का कहना है कि कंप्यूटर से ऑनलाइन आवेदन करते समय आई माइनर त्रुटियों जैसे कि बैंक एकाउंट या आधार नंबर,वृद्धावस्था में अंगूठों के निशन मैच न होने आदि में मामूूली त्रुटियों के चलते प्रदेश मुख्यालय से धनराशि का अंतरण नहीं हो पाता है। सारा सिस्टम ऑनलाइन होने के चलते हम अपनी तरफ से उसमें कोई संशोधन नहीं कर सकते अथवा न ही हम उसके कारणों को ही जान सकते। यह प्रकिया पूरी तरह ऑनलाइन है और सभी अफसरों के आईडीमेल और कोड हैं जिन्हें उन स्तरों पर बताया जा सकता है। हम अपनी तरफ से अलग से एक सामूहिक मेल करके इस समस्या से अवगत करा सकते हैं और हमारी ओर से ऐसा किया गया है लेकिन अभी तक 234 लाभार्थयों के बैंक खातों में योजना की राशि भेजी नहीं जा सकी है।
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केस 1
हलधरपुर थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव निवासी विनोद गुप्ता की मौत सड़क हादसे में हो गाई। पति के सभी संस्कारों को संपन्न कराने के बाद मृतक की पत्नी विमला ने पारिवारिक लाभ योजना का लाभ पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद समाज कल्याण अधिकारी की ओर से इसके बैंक खाते में योजना की रकम अंतरित करने की संस्तुति प्रदेश मुख्यालय भेजा। लेकिन वहां से उसका अंतरण फेल आ गया।
केेस 2
रतनपुरा ब्लाक के नसीराबाद कला गांव के मुकेश की मौत भी एक हादसे में हो गई। गांव के प्रधान और सेक्रेटरी की सलाह पर मुकेश की विधवा माया ने पारिवारिक लाभ योजना के तहत आनलाइन आवेदन किया। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी उसके बैंक खाते में योजना के रुपये नहीं आए। जब उसने जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में संपर्क किया तो उसे बताया गया कि यहां से सारी प्रकिय्रा पूरी करके भ्ेेजी जा चुकी है लेकिन उसके खाते में रुपये नहीं आए।