{"_id":"5a26e07d4f1c1baf678bfeaa","slug":"61512497277-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसाना पाठशालाओं का आयोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसाना पाठशालाओं का आयोजन
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृषि विभाग की ओर जनपद की सभी न्याय पंचायतों के दो-दो ग्राम पंचायतों में पांच दिवसीय किसान पाठशाला का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। जनपद में कुल 92 ग्राम पंचायतों के 184 गांवों में एक साथ किसान पाठशालाएं लगाकर किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। उप कृषि निदेशक, एसपी श्रीवास्तव ने विकास खंड घोसी के ग्राम पंचायत बेला सुल्तानपुर में किसान मेला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपकृषि निदेशक ने कहा कि शासन की मंशा है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी कर दी जाय। इसी के तहत किसानों को तकनीकी रूप से कृषि कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से इन पाठशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले दिन के कार्यक्रम के अनुसार कृषकों को फसल चक्र, रबी की प्रमुख फसलें एवं उनकी मुख्य प्रजातियों, बीजों पर अनुदान, मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं फसलों के घोषित समर्थन मूल्य के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि फसल चक्र अपनाने से भूमि की उर्वरता बनी रहती है एवं खरपतवारों, कीटों तथा बीमारियों का प्रकोप भी कम हो जाता है। किसानों को सलाह दी गई कि वे दलहनी फसलों के बाद धान, गेहूं, मक्का, बाजरा की फसलें उगायें। अधिक पानी चाहने वाली फसलों के बाद कम पानी चाहने वाली फसल उगायें। इसके अतिरिक्त सह फसली खेती, अन्त: फसली खेती एवं मल्टीलेयर खेती अधिक लाभकारी सिद्ध होगी। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग किया जाए। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बारेे में जानकारी दी गई।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पहले दिन के कार्यक्रम के अनुसार कृषकों को फसल चक्र, रबी की प्रमुख फसलें एवं उनकी मुख्य प्रजातियों, बीजों पर अनुदान, मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं फसलों के घोषित समर्थन मूल्य के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि फसल चक्र अपनाने से भूमि की उर्वरता बनी रहती है एवं खरपतवारों, कीटों तथा बीमारियों का प्रकोप भी कम हो जाता है। किसानों को सलाह दी गई कि वे दलहनी फसलों के बाद धान, गेहूं, मक्का, बाजरा की फसलें उगायें। अधिक पानी चाहने वाली फसलों के बाद कम पानी चाहने वाली फसल उगायें। इसके अतिरिक्त सह फसली खेती, अन्त: फसली खेती एवं मल्टीलेयर खेती अधिक लाभकारी सिद्ध होगी। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग किया जाए। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बारेे में जानकारी दी गई।
विज्ञापन