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45 प्रतिशत किसान गेहूं बेंचने से रह जाएंगे वंचित
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मऊ में आज के बाद से गेहूं की खरीद बंद हो जाएगी। अब तक केवल 55 प्रतिशत किसान ही अपना गेहूं खरीद केंद्रों पर बेच पाए हैं। जिले के 45 प्रतिशत किसान अभी तक अपना गेहूं सरकारी खरीद केंद्रों पर बेंच पाने से वंचित रह गए हैं। खरीद केंद्रों पर किसानों की गेहूं से लदी ट्रालियां खड़ी हैं। किसान नेताओं ने गेहूं खरीद की अवधि 30 जून तक बढ़ाने की आवाज उठाई है।
शासन की ओर से गेहूं की खरीद का समय 15 जून 2021 निर्धारित है लेकिन जनपद में अब तक लगभग 45 प्रतिशत किसान अपने गेंहू की फसल नहीं बेच पाए है। इसके चलते गेहूं खरीद करने के लिए जिले में 30 जून 2021 तक समय सीमा बढ़ाने की मांग किसान नेताओं ने किया है।
सरकारी क्रय केंद्र पर न्यूनतम न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपए प्रति कुंतल की दर से किसानों का भुगतान होता है, यदि जिले में खरीद बंद हो जाएगी तो किसान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सेठ साहूकारों को 1400 रुपए कुंतल से लेकर के 1500 रुपए कुंतल गेहूं मजबूरी में बेचने को विवश हो जाएंगे। जिले में शासन द्वारा 49 क्रय केंद्र बनाए गए हैं लेकिन आज तक मात्र कुछ केंद्रों पर ही कुछ दिन ही खरीद हो पाई है जिले में बहुत से किसान ई पास मशीन ऑनलाइन टोकन 15 जून 2021 तक का लिया है। किसान प्रतिदिन अप्रैल माह से क्रय केंद्रों पर गेहूं बेंचने के लिए चक्कर काट कर निराश होकर घर लौट आता है।
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किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि जिले में खरीद की हालत यह है कि किसान अपना ट्रैक्टर ट्राली पर लदा गेहूं लेकर के 12 दिनों से क्रय केंद्र पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
क्रय केंद्रों पर प्रभारियों द्वारा बताया जाता है कि बोरा नहीं है,जगह नहीं है, पैसा नहीं है,इस तरह से जिले में किसानों का भारी शोषण मानसिक रूप से कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। किसान नेता राकेश सिंह कहते हैं कि जिले के कुछ केंद्रों के प्रभारी अलग से सुविधा शुल्क लेकर किसानों का शोषण भी कर रहे हैं। अगर कोई किसान शिकायत दर्ज कराता है तो कोई कार्यवाही दोष गुण के आधार पर नहीं होती है। किसान नेताओं का तर्क है कि विभागीय अधिकारी आंकड़े बाजी करके लक्ष्यपूर्ति के दावे करते हैं। जिले में गेहूं की खरीद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और कोविड-19 की महामारी से प्रभावित हुई है। इसलिए किसान हित में जनपद में गेहूं की खरीद 30 जून 2021 तक बढ़ाई जानी चाहिए।
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शासन की ओर से गेहूं की खरीद का समय 15 जून 2021 निर्धारित है लेकिन जनपद में अब तक लगभग 45 प्रतिशत किसान अपने गेंहू की फसल नहीं बेच पाए है। इसके चलते गेहूं खरीद करने के लिए जिले में 30 जून 2021 तक समय सीमा बढ़ाने की मांग किसान नेताओं ने किया है।
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सरकारी क्रय केंद्र पर न्यूनतम न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपए प्रति कुंतल की दर से किसानों का भुगतान होता है, यदि जिले में खरीद बंद हो जाएगी तो किसान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सेठ साहूकारों को 1400 रुपए कुंतल से लेकर के 1500 रुपए कुंतल गेहूं मजबूरी में बेचने को विवश हो जाएंगे। जिले में शासन द्वारा 49 क्रय केंद्र बनाए गए हैं लेकिन आज तक मात्र कुछ केंद्रों पर ही कुछ दिन ही खरीद हो पाई है जिले में बहुत से किसान ई पास मशीन ऑनलाइन टोकन 15 जून 2021 तक का लिया है। किसान प्रतिदिन अप्रैल माह से क्रय केंद्रों पर गेहूं बेंचने के लिए चक्कर काट कर निराश होकर घर लौट आता है।
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किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि जिले में खरीद की हालत यह है कि किसान अपना ट्रैक्टर ट्राली पर लदा गेहूं लेकर के 12 दिनों से क्रय केंद्र पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
क्रय केंद्रों पर प्रभारियों द्वारा बताया जाता है कि बोरा नहीं है,जगह नहीं है, पैसा नहीं है,इस तरह से जिले में किसानों का भारी शोषण मानसिक रूप से कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। किसान नेता राकेश सिंह कहते हैं कि जिले के कुछ केंद्रों के प्रभारी अलग से सुविधा शुल्क लेकर किसानों का शोषण भी कर रहे हैं। अगर कोई किसान शिकायत दर्ज कराता है तो कोई कार्यवाही दोष गुण के आधार पर नहीं होती है। किसान नेताओं का तर्क है कि विभागीय अधिकारी आंकड़े बाजी करके लक्ष्यपूर्ति के दावे करते हैं। जिले में गेहूं की खरीद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और कोविड-19 की महामारी से प्रभावित हुई है। इसलिए किसान हित में जनपद में गेहूं की खरीद 30 जून 2021 तक बढ़ाई जानी चाहिए।