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दशकों पुरानी समस्या को दूर करने को मांगा 25 दिन का समय

Fri, 02 Oct 2020 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 11:39 PM IST
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25 days sought to solve decades old problem
मऊ/कोपागंज। दशकों से प्रशासन लापरवाही का दंश झेल रहे कोपागंज ब्लाक के कई गांव गांधी जयंती के एतिहासिक दिन पर लैैरोदोनवार गांव में लोग आत्मदाह करने की तैयारियों में जुटे थे। लेकिन आत्मदाह के निर्धारित समय से 30 मिनट पूर्व ही सदर एसडीएम निरंकार सिंह गांव पहुंचे। किसानों को दशकों पुरानी समस्या के निस्तारण को 25 दिन में समाप्त कराने का आश्वासन देकर उन्हें मनाया। किसानों ने एसडीएम से अगले 25 दिन में समस्या का निदान न होने पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।
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कोपागंज ब्लाक के भेलाबांध, कनियारीपुर, हसनपुर, लैरोदोनवार, लैरोबेरूआर, इंदारा, महुवार आदि गांवों के किसान बेचन राय के नेतृत्व में शुक्रवार की सुबह दस बजे लैरोदोनवार गांव में एकत्र हुए। जहां 1976 से शारदा सहायक खंड 32 नहर के चौडीकरण के दौरान उनकी अधिगृहित जमीनों का मुआवजा 30 सालों में न मिलने पर प्रशासनिक लापरवाही की निंदा की। साथ ही पूर्वनियोजित आत्मदाह की तैयारी में जुट गए। लेकिन आत्मदाह के 30 मिनट पहले सदर एसडीएम सुबह 10.30 बजे लैरोदोनवार गांव पहुंचे। यहां आत्मदाह को एकत्रित हुए किसान बेचन मौर्य, रामनवल राही, लालचंद्र राम, जगनाथ, वीर बहादूर, किसुन, राजू, अवधेश सिंह, भुल्लन, रमेश, अनिल आदि से वार्ता करते हुए उनकी समस्या सुनी।
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किसानों की समस्या को सुनने के बाद एसडीएम ने 25 दिन में इस समस्या का निस्तारण का आश्वासन देते हुए किसानों से क्षेत्रीय लेखपाल से 41, 45 की नकल निकाल क्षेत्रीय लेखपाल से संपर्क कर उन्हें अवगत कराने का बात कही। एसडीएम के आश्वासन के बाद किसानों ने आत्मदाह करने का कार्यक्रम टालते हुए चेताया कि 25 दिनों में समस्या का निदान न होने पर वह दुबारा सामुहिक आत्मदाह कर प्रशासन की नकामी को सार्वजनिक करेंगे।
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कोपागंज। किसान बेचन मौर्य ने बताया कि किसानों की जमीन शारदा सहायक खंड 32 नहर के चौड़ीकरण के तहत 1976 में अधिग्रहित किया गया था। इसका मुआवजा तीन दशक बीतने के बाद 2005-2006 में किसानों को कड़ी के हिसाब से हुआ था। लेकिन सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के आला अधिकारियों की मिलीभगत तथा धोखाधडी करके एयर में खारिज कर दिया गया। जिससे किसानों के अधिग्रहण किए गए जमीन की कीमत कम देकर अधिक जमीन की कीमत कम देकर अधिक जमीन खारिज दाखिल करके हड़प लिया गया है।
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