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एसओ सरायलखंसी के विरुद्व प्रकीर्ण वाद दर्ज
Updated Tue, 30 Oct 2018 10:41 PM IST
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मऊ। न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने न्यायालय के आदेश का अनुपालन न करने को गंभीरता से लेते इसे कोर्ट की अवमानना मानते हुए थानाध्यक्ष सरायलखंसी के विरुद्व प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही उन्हें नोटिस जारी करते हुए प्रकीर्ण वाद में अपना स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। जेएम ने आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक को इस निर्देश के साथ भेजने का आदेश दिया कि पुलिस अधीक्षक थानाध्यक्ष के विरुद्ध दस दिन के अंदर विभागीय कार्यवाही करते हुए न्यायालय को अवगत कराएं। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के मलिक ताहिरपुरा मुहल्ला निवासी मुहम्मद शानिद पुत्र शकील अहमद ने पशु क्रुरता के तहत बंद अपने वाहन को रिलीज कराने के लिए कोर्ट में अर्जी दिया। कोर्ट से 26 जुलाई 2018 को वाहन को रिलीज करने का आदेश हुआ। पीड़ित का कथन है कि थानाध्यक्ष ने वाहन को रिलीज न कर 70 हजार रुपये की मांग की। साथ ही पीडित का आरोप है कि वाहन से कई सामान गायब कर दिया गया है। पीड़ित ने कोर्ट में शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर जेएम ने थाने से आख्या मांगी गई। आदेश के बावजूद थानाध्यक्ष ने न तो आख्या भेजा न ही कोई स्पष्टीकरण ही भेजा गया। इसे गंभीरता से लेते हुए जेएम ने पाया कि थानाध्यक्ष द्वारा जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवज्ञा की जा रहीं है, जो अवमानना की श्रेणी में आता है। आदेश में लिखा कि वाहन के रिलीज करने के आदेश के बावजूद वाहन अवमुक्त न किया जाना अत्यंत आपत्ति जनक एवं विधि विरुद्व है। जो न्यायालय के कार्य में बाधा पहुंचाने के समान है। जेएम ने थानाध्यक्ष सरायलखंसी के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही प्रकीर्ण वाद में उनसे अपना स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। जेएम ने आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक को इस निर्देश के साथ भेजे जाने का आदेश दिया कि वह थानाध्यक्ष के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही करते हुए दस दिन के अंदर न्यायालय को अवगत कराएं। मामले की सुनवाई के लिए तीन नंवबर की तिथि नियत की गई है।
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मामले के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के मलिक ताहिरपुरा मुहल्ला निवासी मुहम्मद शानिद पुत्र शकील अहमद ने पशु क्रुरता के तहत बंद अपने वाहन को रिलीज कराने के लिए कोर्ट में अर्जी दिया। कोर्ट से 26 जुलाई 2018 को वाहन को रिलीज करने का आदेश हुआ। पीड़ित का कथन है कि थानाध्यक्ष ने वाहन को रिलीज न कर 70 हजार रुपये की मांग की। साथ ही पीडित का आरोप है कि वाहन से कई सामान गायब कर दिया गया है। पीड़ित ने कोर्ट में शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर जेएम ने थाने से आख्या मांगी गई। आदेश के बावजूद थानाध्यक्ष ने न तो आख्या भेजा न ही कोई स्पष्टीकरण ही भेजा गया। इसे गंभीरता से लेते हुए जेएम ने पाया कि थानाध्यक्ष द्वारा जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवज्ञा की जा रहीं है, जो अवमानना की श्रेणी में आता है। आदेश में लिखा कि वाहन के रिलीज करने के आदेश के बावजूद वाहन अवमुक्त न किया जाना अत्यंत आपत्ति जनक एवं विधि विरुद्व है। जो न्यायालय के कार्य में बाधा पहुंचाने के समान है। जेएम ने थानाध्यक्ष सरायलखंसी के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही प्रकीर्ण वाद में उनसे अपना स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। जेएम ने आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक को इस निर्देश के साथ भेजे जाने का आदेश दिया कि वह थानाध्यक्ष के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही करते हुए दस दिन के अंदर न्यायालय को अवगत कराएं। मामले की सुनवाई के लिए तीन नंवबर की तिथि नियत की गई है।
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