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Mau News: 30 दिन के अभियान के 17 दिन बीते, 2163 टीमें पर कागजों पर सफाई

Sun, 19 Apr 2026 01:45 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2026 01:45 AM IST
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17 days of 30 day campaign passed, 2163 teams but papers cleared
मऊ नगर पालिका के ब्रह्मस्थान स्थित पोखरी में सफाई के अभाव में जमी काई और गंदगी। संवाद - फोटो : सीएसजेएमयू
जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान कागजों तक सीमित रह गया है। गांवों में चलने वाले 30 दिनी अभियान के 17 दिन बीतने के बाद भी यह धरातल से कोसों दूर है। अभियान की सफलता के लिए 1628 सफाईकर्मियों और अन्य कर्मचारियों को मिलाकर 2163 टीमें गठित की गई हैं, लेकिन ये टीमें केवल कागजों पर ही सक्रिय दिखाई दे रही हैं।
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ग्रामीण अंचलों में फैली गंदगी और जलजमाव बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। गर्मी का असर बढ़ने के साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। इन दिनों प्रतिदिन 40 से 50 लोगों की मलेरिया जांच की जा रही है, जबकि संदिग्ध करीब 200 मरीजों की भी जांच हो रही है।
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हर साल संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए 30 दिनी अभियान चलाया जाता है। इस बार भी इसके लिए 2163 टीमें गठित की गई हैं, लेकिन धरातल पर इनकी सक्रियता नजर नहीं आ रही है। न तो एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है और न ही कोई जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में लगी आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर से ही ड्यूटी कर रही हैं।
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जिले के गांवों में करीब 18 लाख की आबादी निवास करती है। इसके बावजूद गांवों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। मऊ नगर के सबसे भीड़भाड़ वाले स्थान निजी बस स्टैंड ब्रह्मस्थान के पास बना पोखरा गंदगी से पटा पड़ा है। इसी तरह निजामुद्दीनपुरा मुहल्ला और मुंशीपुरा में भी गंदगी फैली हुई है, जहां से रोजाना सैकड़ों राहगीर गुजरते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सड़क किनारे जमा कचरा हटवाने के लिए ब्लॉक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
इनसेट:---
फॉगिंग के लिए बजट नहीं, एंटी लार्वा का होता है छिड़काव
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि संचारी रोग अभियान के लिए अलग से कोई बजट जारी नहीं होता और न ही फॉगिंग के लिए विभाग को विशेष बजट मिलता है। गांवों में एंटी लार्वा दवा का छिड़काव किया जाता है, जो सीधे शासन से प्राप्त होता है। इससे मच्छरों को मौके पर ही नष्ट किया जा सकता है। विभाग के अनुसार, फॉगिंग केवल उन्हीं क्षेत्रों में कराई जाती है, जहां डेंगू या मलेरिया के मरीज मिलते हैं। मरीज के घर के आसपास करीब 50 घरों के दायरे में फॉगिंग कराई जाती है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, एक घंटे फॉगिंग कराने में लगभग 1500 रुपये खर्च होते हैं।
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