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घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी, तटवर्ती इलाकों में हाहाकार

Tue, 04 Sep 2018 10:56 PM IST
Updated Tue, 04 Sep 2018 10:56 PM IST
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घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी, तटवर्ती इलाकों में हाहाकार
घाघरा के जलस्तर मेें वृद्धि का क्रम जारी
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तटवर्ती इलाकों में हाहाकार
अमर उजाला ब्यूरो
दोहरीघाट। घाघरा के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों में हाहाकार मच गया है। नदी की लहरें भारत माता मंदिर, शवदाह घाट, सरस्वती मंदिर, डोमराज का मकान, खाकी बाबा की कुटी, जानकी घाट की दीवारों पर टकरा रही है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी के रौद्र रूप धारण करने से कस्बा सहित ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
नदी के जलस्तर में जैसे-जैसे वृद्धि हो रही है। तटवर्ती इलाके के लोगों में बेचैनी बढ़ती ही जा रही है। नदी की लहरें मुक्तिधाम, जानकी घाट, खाकी बाबा की कुटी, देव बाबा का मंदिर की दीवारों पर टकरा रही है। नदी के जलस्तर बढ़ने से लोगों को अनिष्ट की चिंता खाए जा रही है। नदी के रौद्र रूप धारण करने से ऐतिहासिक धरोहरों सहित घाघरा के तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बीबीपुर, कोरौली, ठाकुरगाव, बहादुरपुर, बेलौली, रसुलपुर, सूरजपुर, ठिकरहिया सहित विभिन्न गांवों की हजारों एकड़ फसल अभी भी पानी मे डूबी हुई हैं। पानी में डूबे रहने से फसलों के बर्बाद होने से किसान चिंतित हैं। गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर मंगलवार को 70.40 मीटर रहा। जबकि सोमवार को जलस्तर 70.35 मीटर था। इस तरह 24 घंटे में घाघरा का जलस्तर पांच सेमी बढ़ा। अब नदी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से सेमी ऊपर बह रही है।
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बाढ़ से घिरकर चक्की मुसाडोही गांव बना द्वीप
मऊ। घाघरा के उफान के कारण चक्की मुसाडोही गांव द्वीप का रूप ले चुका है। बढ़ते जलस्तर के चलते 500 लोगों को राहत शिविर में भेज दिया गया है। मंगलवार को तहसील मुख्यालय से उपजिलाधिकारी की देखरेख में ट्रैक्टर ट्राली पर लाद कर राहत सामग्री भेजी गई। उफनाई घाघरा के चलते एक दर्जन पुरवे पानी से घिरे हुए हैं। यहां निवास करने वाले लोगों को दैनिक कार्यों को करने में दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। घाघरा रिहायशी झोपड़ियों को अपने आगोश में ले चुकी है। इस कारण इसमें रखे सामान नष्ट हो रहे हैं। पशुओं के लिए चारे का संकट मंडराने लगा है। पानी के बीच से जान जोखिम में डालकर पशुपालक चारे की व्यवस्था करने में जुटे हैं। प्रशासन चक्की मुसाडोही में 11 नावें लगा है लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा हैं। इससे बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश व्याप्त है।
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बरसात के पानी से घिरा कैथवली का सरकारी स्कूल
घोसी। शिक्षा क्षेत्र घोसी के प्राथमिक विद्यालय कैथवली के प्रांगण में जलनिकासी की व्यवस्था न होने से 20 दिनों से बरसात का पानी लगा हुआ है। पानी के बीच छोटे छोटे बच्चे हैंडपंप से पानी तथा भोजनालय से भोजन लेने को बाध्य हो रहे हैं।शिक्षकों ने आशंका जताया है कि यही हाल रहा तो बच्चे संक्रामक बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं। उपेक्षा के चलते इसकी चहारदीवारी भी नही बन सकी है। निकासी न होने से पानी सड़कर बदबू करने लगता है। पढ़ने वाले बच्चे गंदे पानी के बीच से कक्षों के साथ मध्याह्न भोजन के लिए भोजनालय में जाने की बाध्य हो रहे हैं। बच्चों के गंदे पानी के बीच आने जाने को लेकर अभिभावक विद्यालय भेजने से कतरा रहे हैं। 102 से अधिक नामांकित विद्यार्थियों में से मात्र 30-40 बच्चे ही आ रहे हैं। प्रधानाध्यापक वसीर अहमद और शिक्षक राजन बरनवाल ने बताया कि जलजमाव की समस्या को लेकर विभाग के अधिकारियों के साथ तहसील के अधिकारियों, प्रधान को कई बार अवगत कराया जा चुका है। कोई सुधार नहीं हुआ। गंदे पानी के चलते रोग फैलने की आशंका बनी रहती है। बाउंड्री नहीं होने से कुत्तों के साथ पशुओं का अड्डा बन गया है। इनकी गंदगी को हम सब को साफ करना पड़ता है। सफाईकर्मी नहीं आते।
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