फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   एसपी के हस्तक्षेप के बाद गैंगरेप का मुकदमा

एसपी के हस्तक्षेप के बाद गैंगरेप का मुकदमा

Wed, 18 Apr 2018 12:04 AM IST
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:04 AM IST
विज्ञापन
एसपी के हस्तक्षेप के बाद गैंगरेप का मुकदमा
मऊ। शहर कोतवाली क्षेत्र के एक मुहल्ले की रहने वाली एक महिला के साथ चार लोगों ने एक कमरे में सामूहिक दुष्कर्म किया। दो मार्च 2018 को हुई इस घटना का मुकदमा एसपी के हस्तक्षेप पर पुलिस ने 43 दिन बाद 14 अप्रैल को रिपोर्ट तो दर्ज किया। लेकिन डाक्टरी परीक्षण कराने के बाद पुलिस अब पीड़िता का बयान दर्ज कराने के लिए तीन दिनों से बुला रही है, लेकिन उसे अदालत तक नहीं ले जा रही। महिला का आरोप है कि एक दरोगा उस पर बयान में आरोपियों के नाम न लेने का दबाव बना रहा है। दर्ज मुकदमे के अनुसार 10 वर्ष पूर्व जब वह नाबालिग थी तो रघुनाथपुरा मुहल्ला निवासी कासिम उसे शादी का झांसा देकर भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इससे वह तीन बार गर्भवती हुई। तीनों बार उसने जबरन गर्भपात करा दिया। युवती का आरोप है कि कासिम उससे शहर के साड़ी कारोबारियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाता रहा। जिसका वह विरोध करती रही। दो मार्च को वह उसे घुमाने के बहाने मखनवा गांव निवासी अपने दोस्त राजू कराटे के घर लेकर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद मलिक ताहिरपुरा मुहल्ला निवासी शाहिद जमाल, मुंशीपुरा मुहल्ला वकील के साथ एक अज्ञात युवकों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक रुप से दुष्कर्म किया। इससे युवती की हालत बिगड़ गई। 23 मार्च को उसे नगर के ही एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिन बाद उसे डिस्चार्ज किया गया। युवती ने इस बाबत पुलिस को तहरीर दी लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। कई दिनों तक दौड़ लगाने के बाद अंतत: 13 अप्रैल को महिला ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर गुहार लगाई। एसपी के आदेश पर पुलिस ने चारों आरोपियों पर 14 अप्रैल को मुकदमा दर्ज कर लिया। महिला का मेडिकल कराया गया लेकिन बयान दर्ज कराने के लिए उसे अदालत ले जाने के लिए पुलिस ने बुलाया, लेकिन अदालत नहीं ले गई। यह क्रम तीन दिनों से चल रहा है। महिला का आरोप है कि पुलिस उस पर बयान दर्ज न कराने का दबाव बना रही है। इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक शिवाजी शुक्ला ने बताया कि इस बात की जानकारी नहीं है, लेकिन कोई पुलिस वाला सुप्रीम कोर्ट केे आदेश का अनदेखी नहीं करेगा। क्योंकि कोर्ट की गाइड लाइन है कि मेडिकल कराने के बाद पुलिस पीड़िता को तुरंत कोर्ट में पेश करेगी। लेकिन पता लगाया जाएगा, सच्चाई क्या है। एएसपी ने बताया कि महिला गलत आरोप लगा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed