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ललचाकर चले जा रहे बादल
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:03 PM IST
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मधुबन। आगे की खेती आगे आगे, पीछे की खेती भागे जोगे घाघ की ये कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। नहरों में पानी नहीं और बादल है कि बरसते नहीं। कुछ बादल आते भी हैं तो किसानों को ललचा कर चले जा रहे हैं। जिससे किसानों के माथे पर खुशनुमा मौसम में भी पसीना आ रहा है। बारिश नही होने और नहरों के सूखे रहने से धान की खेती पिछड़ती नजर आ रही है। बड़े किसान तो किसी तरह पंपसेट से पानी चलाकर खेतों में धान की रोपाई शुरू कर दिए हैं लेकिन छोटे व मझोले किसानों को अभी भी बारिश और नहरों में पानी आने का इंतजार है। किसानों की माने तो अब धान की अगेती फसल पिछड़ने लगी है। जिसका असर पैदावार पर पड़ना लाजिमी है।
धान की फसल के लिये असली बारिश का आषाढ़ माह बीत चुका है। किसानों के धान रोपाई का वास्तविक समय निकलने को है, लेकिन बादल है कि बरसने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बादल आकर किसानों को ललचा कर चले जा रहे हैं। उधर नहरों में पानी नहीं है। नहरों और बादल की आंख मिचौली में किसान परेशान हैं। प्रत्येक वर्ष नहरों की सफाई और खुदाई में करोड़ों रुपये कागज में खर्च किया जाते हैं लेकिन पिछले एक दशक से नहरों में पानी की दुर्दशा को लेकर किसान परेशान है। चाहे वह रबी की फसल हो या खरीफ और जायद की सबमें नहरों ने किसान को छला है। किसान किसी तरह पंपसेट आदि संसाधन से अपनी खेती करने को विवश हैं।
माना जाता है कि 15 जून से बरसात की शुरुआत हो जाती है। लेकिन 15 जून क्या पूरा जून माह बीत गया लेकिन बारिश ने अभी पूरी तरह दस्तक नही दिया है। बादल आते हैं और सावन की फुहार की तरह फुहारें मारकर चले जाते है लेकिन अभी ऐसी कोई बारिश नहीं हुई जो किसानों के लिए लाभकारी साबित हुई हो। ऐसे में किसान परेशान है कि धान की रोपाई अगर कर भी दे तो बारिश का क्या भरोसा है अगर नहीं बारिश हुई तो इस गर्मी में पानी चलाते चलाते किसान की गाढी कमाई तेल में चली जायेगी तो उसे लाभ क्या मिलेगा। इसी पशोपेश में किसान अपनी फसल की रोपाई नही कर पा रहा है। अग्रणी किसान विकास मल्ल, देवेंद्र मल्ल, बब्बू राय, प्रभुनाथ मल्ल, जयप्रकाश मल्ल, अशोक यादव समेत दर्जनों किसानों ने नहरों में भरपूर मात्रा में पानी छोड़ने की मांग की है जिससे टेल तक पानी पहुंचे और किसान समय से अपने धान की रोपाई कर सके। नहीं तो लेट होने पर धान की नर्सरी भी खराब होने का खतरा है।
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धान की फसल के लिये असली बारिश का आषाढ़ माह बीत चुका है। किसानों के धान रोपाई का वास्तविक समय निकलने को है, लेकिन बादल है कि बरसने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। बादल आकर किसानों को ललचा कर चले जा रहे हैं। उधर नहरों में पानी नहीं है। नहरों और बादल की आंख मिचौली में किसान परेशान हैं। प्रत्येक वर्ष नहरों की सफाई और खुदाई में करोड़ों रुपये कागज में खर्च किया जाते हैं लेकिन पिछले एक दशक से नहरों में पानी की दुर्दशा को लेकर किसान परेशान है। चाहे वह रबी की फसल हो या खरीफ और जायद की सबमें नहरों ने किसान को छला है। किसान किसी तरह पंपसेट आदि संसाधन से अपनी खेती करने को विवश हैं।
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माना जाता है कि 15 जून से बरसात की शुरुआत हो जाती है। लेकिन 15 जून क्या पूरा जून माह बीत गया लेकिन बारिश ने अभी पूरी तरह दस्तक नही दिया है। बादल आते हैं और सावन की फुहार की तरह फुहारें मारकर चले जाते है लेकिन अभी ऐसी कोई बारिश नहीं हुई जो किसानों के लिए लाभकारी साबित हुई हो। ऐसे में किसान परेशान है कि धान की रोपाई अगर कर भी दे तो बारिश का क्या भरोसा है अगर नहीं बारिश हुई तो इस गर्मी में पानी चलाते चलाते किसान की गाढी कमाई तेल में चली जायेगी तो उसे लाभ क्या मिलेगा। इसी पशोपेश में किसान अपनी फसल की रोपाई नही कर पा रहा है। अग्रणी किसान विकास मल्ल, देवेंद्र मल्ल, बब्बू राय, प्रभुनाथ मल्ल, जयप्रकाश मल्ल, अशोक यादव समेत दर्जनों किसानों ने नहरों में भरपूर मात्रा में पानी छोड़ने की मांग की है जिससे टेल तक पानी पहुंचे और किसान समय से अपने धान की रोपाई कर सके। नहीं तो लेट होने पर धान की नर्सरी भी खराब होने का खतरा है।
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