{"_id":"5d014a68bdec22070f6812f0","slug":"15603656643-mau-news92","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिल्ट से पटी पकड़ी ताल पंप कैनाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिल्ट से पटी पकड़ी ताल पंप कैनाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। घोसी तहसील क्षेत्र के पकड़ी ताल पंप कैनाल बदहाल है। रख रखाव के अभाव में सिंचाई व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। हालत यह है कि ताल में सिल्ट जमा है। इससे बरसात का पानी जमा नहीं हो पाता है। किसानों ने आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा बावजूद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत लाखों की लागत से पकड़ी ताल में पंप कैनाल की स्थापना की गई। किसानों के अनुसार पंप कैनाल से दो हजार हेक्टेयर से अधिक उपजाऊ जमीन की सिंचाई की जाती थी। पंप कैनाल के मोटर की क्षमता बढ़ाकर 65 हार्स पावर का तो कर दिया गया, लेकिन नालियों की मरम्मत नहीं करायी जा सकी। विभिन्न गांवों से गुजरी माइनरें और उप शाखाएं जगह-जगह टूट गई हैं। इससे तमाम गांवों में पानी ही नहीं पहुंच पाता है। महकमे के आला अधिकारी बजट न आने का रो रोकर पल्ला झाड़ लेते हैं। पंप कैनाल पर एक आपरेटर, मिस्त्री, मेठ, पतरोल, चक्रवाहक सहित पांच कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। चार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हें। ऐसे में एक कर्मचारी के भरोसे पंप कैनाल संचालित हो रही।
पकड़ी गांव के सुभाष यादव, मारकंडेय सिंह, अनिल श्रीवास्तव, वंश बहादुर का कहना था कि महकमे के आला अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैए का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। माइनरों के पटने तथा नालियों के टूटने से पानी कुछ ही एरिया तक पहुंच पा रहा है। ताल की खुदाई तक नहीं की जा सकी है। इसके चलते किसानों को इस पंप कैनाल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंप कैनाल का संचालन भगवान भरोसे हो रहा है। उन्होंने सिंचाई व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त कराए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि पकड़ी पंप कैनाल के पुनरुद्धार के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने पर शुरू कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत लाखों की लागत से पकड़ी ताल में पंप कैनाल की स्थापना की गई। किसानों के अनुसार पंप कैनाल से दो हजार हेक्टेयर से अधिक उपजाऊ जमीन की सिंचाई की जाती थी। पंप कैनाल के मोटर की क्षमता बढ़ाकर 65 हार्स पावर का तो कर दिया गया, लेकिन नालियों की मरम्मत नहीं करायी जा सकी। विभिन्न गांवों से गुजरी माइनरें और उप शाखाएं जगह-जगह टूट गई हैं। इससे तमाम गांवों में पानी ही नहीं पहुंच पाता है। महकमे के आला अधिकारी बजट न आने का रो रोकर पल्ला झाड़ लेते हैं। पंप कैनाल पर एक आपरेटर, मिस्त्री, मेठ, पतरोल, चक्रवाहक सहित पांच कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। चार कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हें। ऐसे में एक कर्मचारी के भरोसे पंप कैनाल संचालित हो रही।
विज्ञापन
पकड़ी गांव के सुभाष यादव, मारकंडेय सिंह, अनिल श्रीवास्तव, वंश बहादुर का कहना था कि महकमे के आला अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैए का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। माइनरों के पटने तथा नालियों के टूटने से पानी कुछ ही एरिया तक पहुंच पा रहा है। ताल की खुदाई तक नहीं की जा सकी है। इसके चलते किसानों को इस पंप कैनाल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंप कैनाल का संचालन भगवान भरोसे हो रहा है। उन्होंने सिंचाई व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त कराए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि पकड़ी पंप कैनाल के पुनरुद्धार के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने पर शुरू कर दिया जाएगा।