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किस्मत ने रामबदन को बनाया सांसद
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मऊ। आज के दौर में टिकट मांगने की होड़ है, वहीं एक जमाना ऐसा भी था, कि सांसद बने रामबदन को उनकी किस्मत ने संसद तक पहुंचा दिया। यह रामबदन की योग्यता और कर्मठता थी, कि उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता रामधन राम को हराया था।
वाक्या मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र के विधायक का है। 1989 के लोकसभा चुनाव में मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र लालगंज सुरक्षित लोकसभा का हिस्सा हुआ करता था। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानभूति में मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र से फरीदपुर गॉव निवासी और पेशे से अधिवक्ता रामबदन राम विधायक चुने गए थे। 1989 में विस और लोस का चुनाव एक साथ होना था। राम बदन एक बार फिर से कांग्रेस से विधायक के लिए टिकट की लाइन में लगे थे। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट ठीक न होने से पार्टी से टिकट कट गया। लखनऊ से दिल्ली की दौड़ लगाकर थक चुके रामबदन अब घर वापस की तैयारी में थे, कि इस बीच एक कॉल ने उनकी किस्मत बदल दी।
हुआ यूं कि राजीव गांधी से मतभेद के बाद वीपी सिंह ने जनता दल का गठन किया था। लोस चुनाव में लालगंज सुरक्षित लोस से वह एक ऐसे दलित नेता की तलाश कर रहे थे जो पार्टी का झंडा बहार कर सके। कोई प्रत्याशी नही मिला तो वीपी सिंह ने किसी करीबी को एक अदद प्रत्याशी तलाश करने को कहा। संयोग से उक्त मित्र की मुलाकात रेलवे स्टेशन पर राम बदन से हो गई। चर्चा के दौरान रामबदन भी बुझे मन से चुनाव लड़ने को तैयार हो गए। फिर क्या था दोनों लोग नई दिल्ली स्टेशन से वापस जनता दल कार्यालय पहुंचे और फिर वहां से सिम्बल लेकर मैदान में उतरे। किस्मत ऐसी की रामबदन ने रामधन राम जैसे कांग्रेसी दिग्गज को हराया और सांसद बन गए।
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वाक्या मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र के विधायक का है। 1989 के लोकसभा चुनाव में मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र लालगंज सुरक्षित लोकसभा का हिस्सा हुआ करता था। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानभूति में मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र से फरीदपुर गॉव निवासी और पेशे से अधिवक्ता रामबदन राम विधायक चुने गए थे। 1989 में विस और लोस का चुनाव एक साथ होना था। राम बदन एक बार फिर से कांग्रेस से विधायक के लिए टिकट की लाइन में लगे थे। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट ठीक न होने से पार्टी से टिकट कट गया। लखनऊ से दिल्ली की दौड़ लगाकर थक चुके रामबदन अब घर वापस की तैयारी में थे, कि इस बीच एक कॉल ने उनकी किस्मत बदल दी।
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हुआ यूं कि राजीव गांधी से मतभेद के बाद वीपी सिंह ने जनता दल का गठन किया था। लोस चुनाव में लालगंज सुरक्षित लोस से वह एक ऐसे दलित नेता की तलाश कर रहे थे जो पार्टी का झंडा बहार कर सके। कोई प्रत्याशी नही मिला तो वीपी सिंह ने किसी करीबी को एक अदद प्रत्याशी तलाश करने को कहा। संयोग से उक्त मित्र की मुलाकात रेलवे स्टेशन पर राम बदन से हो गई। चर्चा के दौरान रामबदन भी बुझे मन से चुनाव लड़ने को तैयार हो गए। फिर क्या था दोनों लोग नई दिल्ली स्टेशन से वापस जनता दल कार्यालय पहुंचे और फिर वहां से सिम्बल लेकर मैदान में उतरे। किस्मत ऐसी की रामबदन ने रामधन राम जैसे कांग्रेसी दिग्गज को हराया और सांसद बन गए।
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