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निजी स्कूलों में उंची कीमतों पर बेंची जा रहीं किताबें
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इंदारा। क्षेत्र के निजी स्कूलों में इन दिनों कॉपी-किताबों की दुकानें खुल गई हैं। कई स्कूलों की किताबें महंगे दामों में किताबें और यूनिफार्म खरीदने को मजबूर अभिभावकों में नाराजगी है। नाराज अभिभावकों ने बीएसए से इसकी शिकायत किया है।
क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक निजी स्कूल हैं। क्षेत्र के कई निजी स्कूलों के संचालकों की ओर से शासन की गाइड लाइन की अनदेखी जा रही है। शासन की गाइड लाइन की उपेक्षा करते हुए महंगी कापियां और किताबें स्कूल परिसर में ही ऊंची कीमतों पर बेंची जा रही हैं। क्षेत्र के अशोक यादव, इंद्रमोहन सिंह, हरिनरायन सिंह, अनिल वर्मा आदि का कहना है कि मनमाने दाम पर किताबों और अन्य शैक्षिक सामग्रियों का वितरण हो रहा है। एक तो इन किताबों और कापियों पर मूल्य अधिक अंकित हैं, उसके बावजूद स्कूल की ओर से अंकित मूल्य से 10-20 प्रतिशत अधिक दर पर किताबें बेंची जा रही हैं। इसके अतिरिक्त स्कूलों द्वारा सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम में दो-तीन सहायक किताबें शामिल कर दी गई हैं जो अन्य बाजारों में नहीं मिलतीं। स्कूलों की मिली भगत से सेटिंग करने वाले विक्रेता दिल्ली व अन्य स्थानों से यह किताबें मंगवाकर हर कक्षा के हिसाब से कॉपी, किताब, कवर, नेम स्लिप का पैक बनाकर महंगे दाम पर बेच रहे हैं। कुछ इसी तरह का खेल यूनिफार्म में भी है। स्कूल की ओर से रेडीमेड कपड़ों की चिह्नित दुकान को स्कूल का मोनोग्राम उपलब्ध कराया जा ता है। अगर कोई यूनिफार्म सिलवाना या दूसरी दुकान से खरीदना चाहे तो मोनोग्राम न होने से उसे स्वीकार नहीं किया जाता है। सूत्रों की मानों तो किताबें और यूनिफार्म पर विघालयों को 50 प्रतिशत कमीशन होता है।इस संदर्भ में जिला विद्यालय निरीक्षक केसी भारती का कहना है कि स्कूल परिसर में किताब कापियों की बिक्री अवैध है। ऐसा करना मान्यता की शर्तों का उल्लंघन भी है। इसकी जांच करा कार्रवाई की जाएगी।
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क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक निजी स्कूल हैं। क्षेत्र के कई निजी स्कूलों के संचालकों की ओर से शासन की गाइड लाइन की अनदेखी जा रही है। शासन की गाइड लाइन की उपेक्षा करते हुए महंगी कापियां और किताबें स्कूल परिसर में ही ऊंची कीमतों पर बेंची जा रही हैं। क्षेत्र के अशोक यादव, इंद्रमोहन सिंह, हरिनरायन सिंह, अनिल वर्मा आदि का कहना है कि मनमाने दाम पर किताबों और अन्य शैक्षिक सामग्रियों का वितरण हो रहा है। एक तो इन किताबों और कापियों पर मूल्य अधिक अंकित हैं, उसके बावजूद स्कूल की ओर से अंकित मूल्य से 10-20 प्रतिशत अधिक दर पर किताबें बेंची जा रही हैं। इसके अतिरिक्त स्कूलों द्वारा सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम में दो-तीन सहायक किताबें शामिल कर दी गई हैं जो अन्य बाजारों में नहीं मिलतीं। स्कूलों की मिली भगत से सेटिंग करने वाले विक्रेता दिल्ली व अन्य स्थानों से यह किताबें मंगवाकर हर कक्षा के हिसाब से कॉपी, किताब, कवर, नेम स्लिप का पैक बनाकर महंगे दाम पर बेच रहे हैं। कुछ इसी तरह का खेल यूनिफार्म में भी है। स्कूल की ओर से रेडीमेड कपड़ों की चिह्नित दुकान को स्कूल का मोनोग्राम उपलब्ध कराया जा ता है। अगर कोई यूनिफार्म सिलवाना या दूसरी दुकान से खरीदना चाहे तो मोनोग्राम न होने से उसे स्वीकार नहीं किया जाता है। सूत्रों की मानों तो किताबें और यूनिफार्म पर विघालयों को 50 प्रतिशत कमीशन होता है।इस संदर्भ में जिला विद्यालय निरीक्षक केसी भारती का कहना है कि स्कूल परिसर में किताब कापियों की बिक्री अवैध है। ऐसा करना मान्यता की शर्तों का उल्लंघन भी है। इसकी जांच करा कार्रवाई की जाएगी।
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