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ृत ठेकेदार के नाम पर गायब किए गए चेक के मामले में जांच को पहुंचे एसई
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:08 PM IST
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मऊ। लोक निर्माण विभाग की ओर से बिना काम किए ही दो ठेकेदारों को हुए 15 करोड़ रुपये के भुगतान की अमर उजाला में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेकर मंगलवार को अधीक्षण अभियंता बलिया आशुतोष कुमार मणि लोनिवि कार्यालय मऊ पहुंचे। उन्होंने दोनों ठेकेदारों और विभाग के उन सभी ठेकेदारों के सूची तैयार करने का आदेश कैशियर को दिया। जिन्होंने अग्रिम धनराशि लेेने के बाद कार्य को पूरा नहीं किया। अधीक्षण अभियंता ने बताया कि सूची तैयार होने पर उसे शासन को भेजा जाएगा।
अधीक्षण अभियंता आशुतोष कुमार मणि ने बताया कि सोमवार के अंक में प्रकाशित हुए खबर को संज्ञान में लेकर वह मंगलवार को लोनिवि कार्यालय जांच करने के लिए आए हैं। बताया कि कैशियर केंद्र सरकार से संबंधित होता है। ऐसे में इस कार्य की जिम्मेदारी उसे सौंपी है। दिए गए आदेश में मेसर्स राजनाथ सिंह और शक्ति कांस्ट्रक्शन के अन्य उन सभी फर्मों की जांच की जाएगी। जिन्होंने अग्रिम धनराशि प्राप्त की है और तयशुदा समय के अंदर काम पूरा न होने की कार्यवृत्ति विभाग को नहीं सौंपी है। बताया कि मृत ठेकेदार राणा प्रताप सिंह के नाम पर जारी हुए चेक के मामले में कार्यालय के सभी कर्मचारियों का लिखित बयान दर्ज किया। कहा कि नियम तो यह है कि बिना वारिस प्रमाण पत्र के किसी को चेक नहीं जारी किया जाना था। यह लापरवाही किसके स्तर से हुई, इसकी जांच विभाग के साथ-साथ पुलिस विभाग भी कर रहा है। बता दें कि अमर उजाला ने सोमवार के अंक में बिना काम के ही कर दिया 15 करोड़ का भुगतान शीर्षक से खबर प्रकाशित किया गया था।
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अधीक्षण अभियंता आशुतोष कुमार मणि ने बताया कि सोमवार के अंक में प्रकाशित हुए खबर को संज्ञान में लेकर वह मंगलवार को लोनिवि कार्यालय जांच करने के लिए आए हैं। बताया कि कैशियर केंद्र सरकार से संबंधित होता है। ऐसे में इस कार्य की जिम्मेदारी उसे सौंपी है। दिए गए आदेश में मेसर्स राजनाथ सिंह और शक्ति कांस्ट्रक्शन के अन्य उन सभी फर्मों की जांच की जाएगी। जिन्होंने अग्रिम धनराशि प्राप्त की है और तयशुदा समय के अंदर काम पूरा न होने की कार्यवृत्ति विभाग को नहीं सौंपी है। बताया कि मृत ठेकेदार राणा प्रताप सिंह के नाम पर जारी हुए चेक के मामले में कार्यालय के सभी कर्मचारियों का लिखित बयान दर्ज किया। कहा कि नियम तो यह है कि बिना वारिस प्रमाण पत्र के किसी को चेक नहीं जारी किया जाना था। यह लापरवाही किसके स्तर से हुई, इसकी जांच विभाग के साथ-साथ पुलिस विभाग भी कर रहा है। बता दें कि अमर उजाला ने सोमवार के अंक में बिना काम के ही कर दिया 15 करोड़ का भुगतान शीर्षक से खबर प्रकाशित किया गया था।
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