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बाल निकेतन पर ओवरब्रिज बनने की जगी आस
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:42 PM IST
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मऊ। योगी सरकार के गठन के बाद नगर के बाल निकेतन स्थित रेलवे क्रासिंग पर एक बार फिर ओवरब्रिज बनने की आस जग गई है। रेलवे ने वर्ष 2016-17 में ओवरब्रिज निर्माण कार्य के लिए बजट स्वीकृत किया था। लेकिन ओवरब्रिज निर्माण में तत्कालीन अखिलेश सरकार तथा जिला प्रशासन की तरफ से एनओसी न दिए जाने से आगे की कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकी थी। इस मामले में एबीजीपी के जिला संयोजक राघवेंद्र राय की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगा है।
बुनकर बाहुल्य नगर में बाहरी व्यापारियों का आना जाना लगा रहता है। यहां से साडिय़ां, लुंगी सहित अन्य सामान ट्रकों पर लादकर ले जाते हैं। व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें ट्रक को क्रासिंग को उस पार खड़ा करना पड़ता है। रिक्शे से ढुलाई करवाकर ट्रकों पर लोडिंग करवाना पड़ता है। दिन में लगभग 38 बार समपार बंद होता है। नगर का मुख्य संपर्क मार्ग होने के कारण सैकड़ों की संख्या में दुपहिया, चार पहिया वाहन, रिक्शा सहित अन्य वाहन आकर रुक जाते हैं। दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लगने से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बाल निकेतन स्थित रेलव क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाए जाने के मामले में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला संयोजक राघवेंद्र राय शर्मा ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजा था। विभाग की तरफ से जांच पड़ताल के बाद वर्ष 2016-17 में ओवरब्रिज निर्माण कार्य के लिए बजट स्वीकृत कर दिया गया था। लेकिन तत्कालीन सपा सरकार तथा जिला प्रशासन की ओर से एनओसी जारी न किए जाने से मामला अधर में लटक गया। प्रदेश में योगी सरकार के गठन के बाद ओवरब्रिज मामले में शिकायतकर्ता ने पीएमओ को पत्र भेजा। पीएमओ के पत्र पर सीएम कार्यालय ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद जिलाधिकारी ने क्षेत्रीय प्रबंधक रेलवे रिपोर्टसे आख्या मांगी है। वहीं अपर महाप्रबंधक पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर ने पीएमओ को भेजे रिपोर्ट में बताया है कि प्रदेश सरकार से सहमति मिलने पर ही आगे की कार्यवाही शुरू हो सकती है।इस बाबत जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र कुमार का कहना है कि तकनीकी पहलुओं के संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक रेलवे से रिपोर्ट मांगी गई है। (ब्यूरो)
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