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राजकीय बीज भंडारों पर नहीं मिल पा रहा मनमाफिक बीज
Updated Sun, 18 Jun 2017 10:51 PM IST
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मऊ । खरीफ फसल के सीजन में राजकीय बीज भंडारों पर किसानों की मांग के अनुरूप बीजों का अभाव है। मनमाफिक बीज न मिलने से किसानों को अधिक दाम पर निजी दूकानों से बीज खरीदना पड़ रहा है। सरकारी गोदामों पर आए बीजों का व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार न होने से किसान सरकारी बीजों के बजाय निजी कंपनियों के बीजों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
जिले के प्रत्येक ब्लाक मुख्यालय पर राजकीय बीज गोदाम खोला गया है। यहां से किसानों को गुणवत्तापरक बीज दिया जाता है। कृषि विभाग ने धान की विभिन्न प्रजातियों जैसे डीआर 44, मालवीय 105, स्वर्णा सब वन, एनडीआर 2064 नामक प्रजातियों के 604 कुंतज धान के बीज अनुदान पर उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों की मानें तो राजकीय बीज भंडारों में चुनिंदा प्रजाति के बीज हैं। जबकि बाजार में मोती, कोमल, संपूर्णा, सोनम, दामिनी, 501, सिंटू, माधुरी काफी प्रजातियों के बीज उपलब्ध हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो प्रमाणित बीजों को ही गोदामों में बिक्री के लिए रखा जाता है। किसानों को बीज की गारंटी भी दी जाती है। जबकि निजी कंपनियों के बीज पर यह सुविधा नहीं मिलती है।
किसान नेता देवप्रकाश राय, देवेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी बीजों में शिकायत मिलने पर किसानों की समस्या का निस्तारण नहीं किया जाता है। किसानों का अधिकांश समय दौड़ भाग में ही चला जाता है। स्वयंसेवी संस्था नेफोर्ड के जिला प्रभारी संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि सरकारी बीज गुणवत्तापरक होते हैं, लेकिन व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार नहीं होने से किसान खरीदने में हिचकते हैं। डीआर 44, डीडीआर 42 मोटे वाला धान में पैदावार कम होती है। मार्केट में कम रेट मिलता है। मालवीय 1050 मालवीय 109 सुगंधित धान और अच्छी वेराइटी है। स्वर्णा सब वन बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के लिए उपयोगी है।
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इस बाबत जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार पटेल का कहना है कि इस बार नए प्रजाति के बीज की पैदावार 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। चावल में टूटन भी नहीं होता है। राजकीय बीज भंडारों से खरीदे गए प्रमाणित बीज का टैग तथा बैग को किसान सुरक्षित रखें। जमाव में शिकायत मिलने पर कृषि विभाग में शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत सही पाए जाने पर किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
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जिले के प्रत्येक ब्लाक मुख्यालय पर राजकीय बीज गोदाम खोला गया है। यहां से किसानों को गुणवत्तापरक बीज दिया जाता है। कृषि विभाग ने धान की विभिन्न प्रजातियों जैसे डीआर 44, मालवीय 105, स्वर्णा सब वन, एनडीआर 2064 नामक प्रजातियों के 604 कुंतज धान के बीज अनुदान पर उपलब्ध कराए गए हैं। किसानों की मानें तो राजकीय बीज भंडारों में चुनिंदा प्रजाति के बीज हैं। जबकि बाजार में मोती, कोमल, संपूर्णा, सोनम, दामिनी, 501, सिंटू, माधुरी काफी प्रजातियों के बीज उपलब्ध हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो प्रमाणित बीजों को ही गोदामों में बिक्री के लिए रखा जाता है। किसानों को बीज की गारंटी भी दी जाती है। जबकि निजी कंपनियों के बीज पर यह सुविधा नहीं मिलती है।
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किसान नेता देवप्रकाश राय, देवेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी बीजों में शिकायत मिलने पर किसानों की समस्या का निस्तारण नहीं किया जाता है। किसानों का अधिकांश समय दौड़ भाग में ही चला जाता है। स्वयंसेवी संस्था नेफोर्ड के जिला प्रभारी संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि सरकारी बीज गुणवत्तापरक होते हैं, लेकिन व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार नहीं होने से किसान खरीदने में हिचकते हैं। डीआर 44, डीडीआर 42 मोटे वाला धान में पैदावार कम होती है। मार्केट में कम रेट मिलता है। मालवीय 1050 मालवीय 109 सुगंधित धान और अच्छी वेराइटी है। स्वर्णा सब वन बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के लिए उपयोगी है।
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इस बाबत जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार पटेल का कहना है कि इस बार नए प्रजाति के बीज की पैदावार 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। चावल में टूटन भी नहीं होता है। राजकीय बीज भंडारों से खरीदे गए प्रमाणित बीज का टैग तथा बैग को किसान सुरक्षित रखें। जमाव में शिकायत मिलने पर कृषि विभाग में शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत सही पाए जाने पर किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाएगी।