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छह सालों में अपने घरों से लापता हुईं 130 महिलाएं
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मऊ। पिछले छह सालों में 130 महिलाएं अपने घरों से लापता हो गईं। इनमें से 17 नाबालिग रहीं। सभी अवस्यक किशोरियों को पुलिस ने तलाश कर उनके घरों को पहुंचा दिया लेकिन चार युवतियां अभी भी लापता हैं। पुलिस उनका सुराग लगा रही है।
2015 में तीन किशोरियों और 22 युवतियों के अपने घरों से लापता होने की तहरीर उनके घर वालों ने पुलिस को दीं। पुलिस ने उनकी गुमशुदगी दर्ज कर उनकी तलाश करती रही। इनमें सभी को पुलिस ने बरामद कर उनके परिवार वालों को सौंप दिया। इसके अलावा वर्ष 2016 में तीन किशोरियां और 15 युवतियां लापता हो गईं। 2017 में तीन किशोरियां और 18 युवतियां लापता हो गईं। 2018 में दो किशोरियां और 18 युवतियां लापता हुईं। ये सभी बरामद हो गईं।
2019 में दो किशोरियां और 23 युवतियां अपने घरों से लापता हो गईं। जबकि 2020 में पांच किशोरियां और 13 महिलाएं लापता हो गईं। इन दो सालों में लापता चारों किशोरियों का पता चल गया लेकिन चार युवतियां अभी लापता हैं। इनके घर वाले अभी भी इनके वापस लौटने की राह देख रहे हैं। इनके अलावा और भी कई परिवारों की युवतियां अपने घरों से लापता हो गईं। लेकिन लोक लाज को लेकर परिवार वालों ने पुलिस को सूचना नहीं दी। इसके चलते भी इन आंकड़ों में कमी आई।
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इस बाबत पुलिस अधीक्षक सुशील घुले का कहना है कि अंतिम दो सालों में सिर्फ चार महिलाओं को छोड़ दिया जाए तो लापता शतप्रतिशत किशोरियों और महिलाओं क बरामदगी की जा चुकी है। शेष बची चार महिलाओं की तलाश की जा रही है।
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2015 में तीन किशोरियों और 22 युवतियों के अपने घरों से लापता होने की तहरीर उनके घर वालों ने पुलिस को दीं। पुलिस ने उनकी गुमशुदगी दर्ज कर उनकी तलाश करती रही। इनमें सभी को पुलिस ने बरामद कर उनके परिवार वालों को सौंप दिया। इसके अलावा वर्ष 2016 में तीन किशोरियां और 15 युवतियां लापता हो गईं। 2017 में तीन किशोरियां और 18 युवतियां लापता हो गईं। 2018 में दो किशोरियां और 18 युवतियां लापता हुईं। ये सभी बरामद हो गईं।
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2019 में दो किशोरियां और 23 युवतियां अपने घरों से लापता हो गईं। जबकि 2020 में पांच किशोरियां और 13 महिलाएं लापता हो गईं। इन दो सालों में लापता चारों किशोरियों का पता चल गया लेकिन चार युवतियां अभी लापता हैं। इनके घर वाले अभी भी इनके वापस लौटने की राह देख रहे हैं। इनके अलावा और भी कई परिवारों की युवतियां अपने घरों से लापता हो गईं। लेकिन लोक लाज को लेकर परिवार वालों ने पुलिस को सूचना नहीं दी। इसके चलते भी इन आंकड़ों में कमी आई।
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इस बाबत पुलिस अधीक्षक सुशील घुले का कहना है कि अंतिम दो सालों में सिर्फ चार महिलाओं को छोड़ दिया जाए तो लापता शतप्रतिशत किशोरियों और महिलाओं क बरामदगी की जा चुकी है। शेष बची चार महिलाओं की तलाश की जा रही है।