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पुराने आवास को ही बना दिया प्रधानमंत्री आवास
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प्रधान मंत्री आवास योजना यूं तो उन गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए है जिनके पास पहले से पक्के मकान नहीं हैं। जिला स्तरीय जिम्मेदार अफसरों की तरफ से भी पारदर्शिता पूर्वक चयन करके पात्रों को आवास आवंटित करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि बिना कमीशन दिए गरीबों को आवास नहीं मिल पा रहे हैं। गड़बड़ी का यह आलम है कि एक ही परिवार के कई लोगों को योजना का लाभ मिला है।
बेस लाइन सर्वे सूची में बहुत से ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं जिन्हें योजना की गाइड लाइन के अनुरूप आवास नहीं दिए जा सकते हैं। इस योजना के तहत जुगाड़बाजों ने अपने पुराने आवासों को ही नया दिखाकर योजना की रकम हासिल कर ली है। नगर क्षेत्र के ताजोपुर मुहल्ला में तीन परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने पुराने कमरों को ही प्रधान मंत्री आवास का रूप दे दिया है और योजना की रकम हथिया ली है। इसके अलावा इसी वार्ड में एक परिवार ऐसा भी जिससके तीन सदस्यों के अलग अलग नामों से आवास आवंटित करा दिए गए हैं। इसी प्रकार रतनपुरा ब्लाक के नगवा गांव में कई परिवारों के अलग अलग सदस्यों के नामों से आवास आवंटित कराकर धन ले लिया गया। ऐसा ही लाभ फतेहपुर मंडाव , बड़राव और रानीपुर ब्लाकों के कई परिवारों को दिया गया है।
ग्रामीणों की शिकायत है कि पात्रता के बावजूद बिना सुविधा शुल्क गरीबों को भी आवास नहीं मिलता। इसमें गांवों में बिचौलिये हैं जो बड़ी ही गोपनीयता से रकम वसूल रहे। आवास न मिलने अथवा सूची से नाम कट जाने के डर से लोग शिकायत नहीं कर रहे। हालांकि डीएम से लेकर सीडीओ तक ने पत्र जारी करके सुविधा शुल्क न देने ओर मांगने वालों के नाम बताने के सख्त निर्देश देते हुए सभी ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा है। ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव कहते हैं कि प्रधानमंत्री आवास के लिए किसी तरह का सुविधा शुल्क नहीं लिया जा रहा।
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कोट
आवास के लिए सुविधा शुल्क लेने की शिकायत अभी तक नहीं मिली है। हालांकिे लाभार्थियों से कहा गया है कि सुविधा शुल्क की मांग करने वाले का नाम बताएं। शिकायतों के लिए पटल बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई और न ही बिना मानक के आवास बनाने की ही कोई शिकायत मिली है।
आशुतोष कुमार द्विवेदी, मुख्य विकास अधिकारी
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बेस लाइन सर्वे सूची में बहुत से ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं जिन्हें योजना की गाइड लाइन के अनुरूप आवास नहीं दिए जा सकते हैं। इस योजना के तहत जुगाड़बाजों ने अपने पुराने आवासों को ही नया दिखाकर योजना की रकम हासिल कर ली है। नगर क्षेत्र के ताजोपुर मुहल्ला में तीन परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने पुराने कमरों को ही प्रधान मंत्री आवास का रूप दे दिया है और योजना की रकम हथिया ली है। इसके अलावा इसी वार्ड में एक परिवार ऐसा भी जिससके तीन सदस्यों के अलग अलग नामों से आवास आवंटित करा दिए गए हैं। इसी प्रकार रतनपुरा ब्लाक के नगवा गांव में कई परिवारों के अलग अलग सदस्यों के नामों से आवास आवंटित कराकर धन ले लिया गया। ऐसा ही लाभ फतेहपुर मंडाव , बड़राव और रानीपुर ब्लाकों के कई परिवारों को दिया गया है।
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ग्रामीणों की शिकायत है कि पात्रता के बावजूद बिना सुविधा शुल्क गरीबों को भी आवास नहीं मिलता। इसमें गांवों में बिचौलिये हैं जो बड़ी ही गोपनीयता से रकम वसूल रहे। आवास न मिलने अथवा सूची से नाम कट जाने के डर से लोग शिकायत नहीं कर रहे। हालांकि डीएम से लेकर सीडीओ तक ने पत्र जारी करके सुविधा शुल्क न देने ओर मांगने वालों के नाम बताने के सख्त निर्देश देते हुए सभी ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा है। ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव कहते हैं कि प्रधानमंत्री आवास के लिए किसी तरह का सुविधा शुल्क नहीं लिया जा रहा।
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आवास के लिए सुविधा शुल्क लेने की शिकायत अभी तक नहीं मिली है। हालांकिे लाभार्थियों से कहा गया है कि सुविधा शुल्क की मांग करने वाले का नाम बताएं। शिकायतों के लिए पटल बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई और न ही बिना मानक के आवास बनाने की ही कोई शिकायत मिली है।
आशुतोष कुमार द्विवेदी, मुख्य विकास अधिकारी