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समय से परची न मिलने से गन्ना किसानों को परेशानी
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मऊ। जिले की एक मात्र चीनी मिल घोसी किसानों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है। किसान काफी परिश्रम से तैयार गन्ना समय पर मिल पर नहीं दे पा रहे हैं। इससे उनके पेड़ी गन्ना वाले खेत खाली नहीं हो पाए, जिसके चलते उनके खेतों में गेहूं की बुवाई नहीं हो सकी। इस समस्या की जड़ गन्ना पर्ची वितरण में मनमानी है। सर्वे के अनुसार गन्ना पर्ची जरूरतमंद संबंधित किसानों को नहीं दी जा रही है। धनउगाही के लालच में पर्चियां इधर उधर कर दी जा रही हैं, यही वजह है कि पर्चियों की निकासी के बावजूद 25 प्रतिशत किसान अपने गन्ना मिल पर नहीं भेज सके। अब मिल प्रशासन ने उन पर्चियों को निष्क्रिय घोषित कर दिया है।
किसानों को क्राफ्ट कैश का लाभ दिलाने के उद्देश्य से स्व. कल्पनाथ राय ने कांग्रेस शासन काल में घोसी चीनी मिल की स्थापना कराई थी। बाद में सपा शासन में इसकी क्षमता में विस्तार भी कराया गया। जिले में 26 हजार गन्ना किसानों में से 18 हजार 526 किसान गन्ना की आूपर्ति करते हैं। गन्ना सर्वे का जिम्मा 16 गन्ना समितियों पर है जबकि चीनी मिल के 12 सुपरवाइजर कार्यरत हैं। गन्ना वितरण पर्ची सिस्टम गन्ना विकास समिति संचालित करती है। जबकि पर्ची निकालने का जिम्मा जीआरएल इंफोटेक कंपनी गोरखपुर को दिया गया है। लेकिन अफसरों की धनउगाही प्रवृत्ति और लापरवाही के चलते यह मिल किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप खरी नहीं उतर रही है।
जरूरतमंद किसानों को समय से गन्ना की पर्ची नहीं मिल पा रही है। गन्ना पर्ची निकासी की व्यवस्था भले ही आनलाइन हो पर धनउगाही के चक्कर में पर्ची वितरण में मनमानी की जा रही है। किसानों का आरोप है कि जिस किसान का नंबर रहता है, उसे न देकर पर्ची दूसरे किसानों को थमा दी जा रही है। जिसका परिणाम है कि कुल जारी पर्चियों में से 25 प्रतिशत गन्ना नियत समय पर मिल पर पहुंच ही नहीं सका।
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देवारा क्षेत्र के कृष्णानंद यादव का कहना है कि गन्ना वितरण में मनमानी की वजह से वे अपना गन्ना समय से मिल को नहीं भेज सके। इसी प्रकार मधुबन क्षेत्र के राम कृपाल का कहना है कि उनके पास कई बीघे में पेड़ी गन्ना है। उन्होंने सोचा था कि समय से गन्ना मिल पर देकर खेत में गेहूं की बुवाई कर देंगे लेकिन पर्ची न मिल पाने के कारण गन्ना न दे सके। अब तो काफी देर हो गई है। अब गेहूं की बुवाई नहीं हो सकेगी।
जिले में इस वर्ष 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना की खेती हुई है। चीनी मिल की पेराई क्षमता 22 हजार कुंतल प्रतिदिन है और चीनी उत्पादन की क्षमता प्रतिदिन दो हजार कुंतल प्रतिदिन की है। लेकिन इस समय औसतन 18 हजार कुंतल गन्ना पेराई हो पा रही है। मिल प्रशासन का दावा है कि आठ दिसंबर 2018 तक के गन्ना आपूर्ति वाले 1840 किसानों को सात करोड़ 94 लाख 57 हजार रुपयों का भगुतान उनके खातों में भेज दिया गया है। अब तक 6 लाख 20 कुंतल गन्ना की पेराई की जा चुकी है।
गन्ना किसानों की पर्ची न मिलने की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। अवैध वसूली अथवा अनियमितता की शिकायत सही मिलने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
राम सेवक यादव , मुख्य गन्ना अधिकारी , चीनी मिल घोसी
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किसानों को क्राफ्ट कैश का लाभ दिलाने के उद्देश्य से स्व. कल्पनाथ राय ने कांग्रेस शासन काल में घोसी चीनी मिल की स्थापना कराई थी। बाद में सपा शासन में इसकी क्षमता में विस्तार भी कराया गया। जिले में 26 हजार गन्ना किसानों में से 18 हजार 526 किसान गन्ना की आूपर्ति करते हैं। गन्ना सर्वे का जिम्मा 16 गन्ना समितियों पर है जबकि चीनी मिल के 12 सुपरवाइजर कार्यरत हैं। गन्ना वितरण पर्ची सिस्टम गन्ना विकास समिति संचालित करती है। जबकि पर्ची निकालने का जिम्मा जीआरएल इंफोटेक कंपनी गोरखपुर को दिया गया है। लेकिन अफसरों की धनउगाही प्रवृत्ति और लापरवाही के चलते यह मिल किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप खरी नहीं उतर रही है।
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जरूरतमंद किसानों को समय से गन्ना की पर्ची नहीं मिल पा रही है। गन्ना पर्ची निकासी की व्यवस्था भले ही आनलाइन हो पर धनउगाही के चक्कर में पर्ची वितरण में मनमानी की जा रही है। किसानों का आरोप है कि जिस किसान का नंबर रहता है, उसे न देकर पर्ची दूसरे किसानों को थमा दी जा रही है। जिसका परिणाम है कि कुल जारी पर्चियों में से 25 प्रतिशत गन्ना नियत समय पर मिल पर पहुंच ही नहीं सका।
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देवारा क्षेत्र के कृष्णानंद यादव का कहना है कि गन्ना वितरण में मनमानी की वजह से वे अपना गन्ना समय से मिल को नहीं भेज सके। इसी प्रकार मधुबन क्षेत्र के राम कृपाल का कहना है कि उनके पास कई बीघे में पेड़ी गन्ना है। उन्होंने सोचा था कि समय से गन्ना मिल पर देकर खेत में गेहूं की बुवाई कर देंगे लेकिन पर्ची न मिल पाने के कारण गन्ना न दे सके। अब तो काफी देर हो गई है। अब गेहूं की बुवाई नहीं हो सकेगी।
जिले में इस वर्ष 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना की खेती हुई है। चीनी मिल की पेराई क्षमता 22 हजार कुंतल प्रतिदिन है और चीनी उत्पादन की क्षमता प्रतिदिन दो हजार कुंतल प्रतिदिन की है। लेकिन इस समय औसतन 18 हजार कुंतल गन्ना पेराई हो पा रही है। मिल प्रशासन का दावा है कि आठ दिसंबर 2018 तक के गन्ना आपूर्ति वाले 1840 किसानों को सात करोड़ 94 लाख 57 हजार रुपयों का भगुतान उनके खातों में भेज दिया गया है। अब तक 6 लाख 20 कुंतल गन्ना की पेराई की जा चुकी है।
गन्ना किसानों की पर्ची न मिलने की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। अवैध वसूली अथवा अनियमितता की शिकायत सही मिलने पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
राम सेवक यादव , मुख्य गन्ना अधिकारी , चीनी मिल घोसी