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ढैंचा बुआई कराने में जी जान से जुटे किसान
Updated Sat, 02 Jun 2018 12:19 AM IST
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पिपरीडीह। क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में हरी खाद के प्रयोग करने के प्रति किसानों की ललक बढ़ी है। खेत उपजाऊं होने के साथ ही धान की पैदावार भी बढ़ जा रही है। रोपाई किए जाने वाले धान के खेत में ढैंचा बुआई कराने में किसान जी जान से जुट गए हैं।
परदहा ब्लाक क्षेत्र के पिपरीडीह, भार,ओन्हाईच, बगली पिजडा, कुशमौर, उस्मानपुर, हासपुर, पतिला, फुलवरिया, रैकवारेडीह, खरगजेपुर, मजखनी सहित विभिन्न इलाकों में धान की खेती करने वाले किसान हरी खाद के लिए ढैंचा लगा रहे हैं। कृषि विभाग की तरफ से भी ढ़ैचे की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो खेत में ढैंचा लगाने से खेत की मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन सहित विभिन्न तत्वों की कमी तो दूर होगी ही धान की पैदावार भी बढ़ेगी। कृषि विभाग की तरफ से अनुदान पर राजकीय बीज भंडारों पर ढैंचा बीज उपलब्ध कराया गया है। इस संबंध मेें परदहां ब्लाक क्षेत्र के मजखनी गांव निवासी तथा कृषि बिशेषज्ञ ओपी सिंह ने बताया कि हरी खादों की तुलना में ढैंचा अधिक कार्बनिक अम्ल पैदा करता है। इसके कारण ऊसर, लवणीय और क्षारीय भूमि को सुधार कर ढैंचा उपजाऊ भूमि बनाता है।
धान की फसल में ढैंचा के इस्तेमाल से विटामिन और प्रोटीन की मात्रा चावल में बढ़ जाती है। धान की खेती से पहले ढैंचा को हरी खाद के रूप में प्रयोग करने का नतीजा काफी अच्छा पाया गया है। ढैंचा की बुआई के 45से 55 दिन बाद अच्छी बढ़वार होने पर लगभग 20-25 टन हरी खाद प्रति हेक्टेयर पैदा होती है।जो अन्य हरी खादों से बहुत अधिक है। बताया कि गेहूं फसल की कटाई के बाद खाली खेत की जुताई कर ढैंचा की बुआई करनी चाहिए। बोआई के 55 दिन बाद ढैंचा को मिट्टी पलट हल से जुताई करा देनी चाहिए।
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परदहा ब्लाक क्षेत्र के पिपरीडीह, भार,ओन्हाईच, बगली पिजडा, कुशमौर, उस्मानपुर, हासपुर, पतिला, फुलवरिया, रैकवारेडीह, खरगजेपुर, मजखनी सहित विभिन्न इलाकों में धान की खेती करने वाले किसान हरी खाद के लिए ढैंचा लगा रहे हैं। कृषि विभाग की तरफ से भी ढ़ैचे की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो खेत में ढैंचा लगाने से खेत की मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन सहित विभिन्न तत्वों की कमी तो दूर होगी ही धान की पैदावार भी बढ़ेगी। कृषि विभाग की तरफ से अनुदान पर राजकीय बीज भंडारों पर ढैंचा बीज उपलब्ध कराया गया है। इस संबंध मेें परदहां ब्लाक क्षेत्र के मजखनी गांव निवासी तथा कृषि बिशेषज्ञ ओपी सिंह ने बताया कि हरी खादों की तुलना में ढैंचा अधिक कार्बनिक अम्ल पैदा करता है। इसके कारण ऊसर, लवणीय और क्षारीय भूमि को सुधार कर ढैंचा उपजाऊ भूमि बनाता है।
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धान की फसल में ढैंचा के इस्तेमाल से विटामिन और प्रोटीन की मात्रा चावल में बढ़ जाती है। धान की खेती से पहले ढैंचा को हरी खाद के रूप में प्रयोग करने का नतीजा काफी अच्छा पाया गया है। ढैंचा की बुआई के 45से 55 दिन बाद अच्छी बढ़वार होने पर लगभग 20-25 टन हरी खाद प्रति हेक्टेयर पैदा होती है।जो अन्य हरी खादों से बहुत अधिक है। बताया कि गेहूं फसल की कटाई के बाद खाली खेत की जुताई कर ढैंचा की बुआई करनी चाहिए। बोआई के 55 दिन बाद ढैंचा को मिट्टी पलट हल से जुताई करा देनी चाहिए।
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