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पंचायत की पिच पर शुरू भाजपा की पारी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 07 Jan 2016 10:48 PM IST
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पहली बार मथुरा जिला पंचायत में भाजपा का परचम लहराया है। जिला पंचायत की पिच पर यह पहला मौका है जब भाजपा ने बतौर अध्यक्ष अपनी पारी शुरू की है। अब तक कांग्रेस ने सबसे ज्यादा बार अध्यक्ष पद हासिल किया है।
मथुरा जिला पंचायत के 38वें बोर्ड का गठन इस बार होने जा रहा है। इसकी चेयरमैन के रूप में भाजपा की ममता चौधरी निर्वाचित हुई हैं। मथुरा के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार हुआ कि मथुरा जिला पंचायत पर भाजपा काबिज हो गई है।
इससे 20 साल पहले भी भाजपा ने जिला पंचायत के लिए भाग्य आजमाया था। 1995 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सादाबाद के विधायक रहे प्रताप चौधरी की पत्नी आर्मी सिंह थीं लेकिन कामयाबी सपा उम्मीदवार पूर्व मंत्री तेजपाल सिंह की पत्नी सुधा सिंह को मिली थी। 24 सदस्यों के इस बोर्ड में भाजपा के 12 सदस्य जीत कर आए थे लेकिन भाजपा का जीत का सपना पूरा नहीं हो सका था।
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1995 के चुनाव में सपा को भी पहली बार मथुरा में जिला पंचायत पर फतह मिली थी। इससे पहले जिला पंचायत पर कांग्रेस का ही एकछत्र राज हुआ करता था। 1995 में जिला पंचायत के निर्वाचन की प्रक्रिया बदलते ही कांग्रेस का राज खत्म हो गया।
1995 में सपा फिर वर्ष 2000 में पूर्व मंत्री श्याम सुंदर शर्मा की पत्नी सुधा शर्मा ने जिला पंचायत पर कब्जा किया। 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी आरक्षित वर्ग में आने पर बसपा के खाते में चली गई। 2010 में पहली बार रालोद ने इसे कब्जा लिया। पहले चेतन मलिक अध्यक्ष बने फिर अनूप चौधरी ने यह कुर्सी संभाली। अब मथुरा जिला पंचायत पर भाजपा काबिज हो गई है।
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मथुरा जिला पंचायत के 38वें बोर्ड का गठन इस बार होने जा रहा है। इसकी चेयरमैन के रूप में भाजपा की ममता चौधरी निर्वाचित हुई हैं। मथुरा के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार हुआ कि मथुरा जिला पंचायत पर भाजपा काबिज हो गई है।
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इससे 20 साल पहले भी भाजपा ने जिला पंचायत के लिए भाग्य आजमाया था। 1995 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सादाबाद के विधायक रहे प्रताप चौधरी की पत्नी आर्मी सिंह थीं लेकिन कामयाबी सपा उम्मीदवार पूर्व मंत्री तेजपाल सिंह की पत्नी सुधा सिंह को मिली थी। 24 सदस्यों के इस बोर्ड में भाजपा के 12 सदस्य जीत कर आए थे लेकिन भाजपा का जीत का सपना पूरा नहीं हो सका था।
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1995 के चुनाव में सपा को भी पहली बार मथुरा में जिला पंचायत पर फतह मिली थी। इससे पहले जिला पंचायत पर कांग्रेस का ही एकछत्र राज हुआ करता था। 1995 में जिला पंचायत के निर्वाचन की प्रक्रिया बदलते ही कांग्रेस का राज खत्म हो गया।
1995 में सपा फिर वर्ष 2000 में पूर्व मंत्री श्याम सुंदर शर्मा की पत्नी सुधा शर्मा ने जिला पंचायत पर कब्जा किया। 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी आरक्षित वर्ग में आने पर बसपा के खाते में चली गई। 2010 में पहली बार रालोद ने इसे कब्जा लिया। पहले चेतन मलिक अध्यक्ष बने फिर अनूप चौधरी ने यह कुर्सी संभाली। अब मथुरा जिला पंचायत पर भाजपा काबिज हो गई है।