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रिवर फ्रंट की पैमाइश करने पहुंचे अफसर
अमर उजाला वृंदावन
Updated Mon, 17 Oct 2016 11:32 PM IST
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रिवर फ्रंट की पैमाइश करने पहुंचे अफसर
- फोटो : अमर उजाला वृंदावन
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यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना में इलाहाबाद हाईकोर्ट और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नोटिस के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप है। हाईकोर्ट में 20 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई से पहले अधिकारी होमवर्क करने में लगे हैं। सोमवार को कमिश्नर की ओर से गठित टीम के तीन सदस्यों ने यमुना रिवर फ्रंट योजना और प्राचीन जुगलकिशोर मंदिर के बीच की दूरी की पैमाइश की।
यमुना रिवर फ्रंट योजना का कार्य केशी घाट से जुगल घाट तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में कराया जाना प्रस्तावित है। इस दूरी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मदनमोहन मंदिर और जुगल किशोर मंदिर आते हैं। यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना का कार्य सिंचाई विभाग और यूपीपीसीएल द्वारा किया जा रहा है। बीते दिनों एएसआई द्वारा नोटिस जारी करने के बाद विभागों में हड़कंप मचा हुआ है।
नोटिस का जवाब देने के लिए मंडलायुक्त की ओर से गठित टीम की अध्यक्ष एसडीएम सदर चांदनी सिंह, विकास प्राधिकरण के एई कौशलेंद्र सिंह और एएसआई के इंजीनियर ओपी माहौर ने सोमवार को जुगल किशोर मंदिर से लेकर केशीघाट पर यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना का निरीक्षण किया। इसके बाद जुगल किशोर मंदिर से कार्यस्थल की दूरी की पैमाइश कराई। पैमाईश में कुल दूरी 22 मीटर ही निकली। इस पर एक बार तो एएसआई के इंजीनियर ओपी महौर ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कहा कि काम शुरू करने से पहले एनओसी ले लेनी चाहिए थी।
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एसडीएम सदर चांदनी सिंह ने बताया कि वह निरीक्षण की रिपोर्ट मंडलायुक्त को देंगी। इस अवसर पर यमुना रक्षक के अध्यक्ष संत जयकृष्णदास ने कहा कि वे हाईकोर्ट और एनजीटी में अपना पक्ष भी रखेंगे। महंत फूलडोल बिहारीदास, महामंडलेश्वर नवल गिरि, यदुराज सिंह, नूतन बिहारी पारीक, अभय वशिष्ठ, दीपक गोयल, सुनील चतुर्वेदी, श्रीदास प्रजापति, विवेक महाजन ने भी अधिकारियों से वार्ता की।
आरटीआई के बाद जागा एएसआई
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल की आरटीआई के तहत मांगे गए जवाब में छह अक्तूबर को स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने यमुना नदी पर निर्माण कार्य से पहले कोई अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र एएसआई से नहीं लिया है। नवीन घाटों का निर्माण पुरातात्विक महत्व के जुगल किशोर मंदिर के 300 मीटर की संरक्षित परिधि में आता है। यह जानकारी देने के बाद एएसआई ने कार्यदायी संस्था के ठेकेदार को नोटिस जारी किया।
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यमुना रिवर फ्रंट योजना का कार्य केशी घाट से जुगल घाट तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में कराया जाना प्रस्तावित है। इस दूरी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मदनमोहन मंदिर और जुगल किशोर मंदिर आते हैं। यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना का कार्य सिंचाई विभाग और यूपीपीसीएल द्वारा किया जा रहा है। बीते दिनों एएसआई द्वारा नोटिस जारी करने के बाद विभागों में हड़कंप मचा हुआ है।
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नोटिस का जवाब देने के लिए मंडलायुक्त की ओर से गठित टीम की अध्यक्ष एसडीएम सदर चांदनी सिंह, विकास प्राधिकरण के एई कौशलेंद्र सिंह और एएसआई के इंजीनियर ओपी माहौर ने सोमवार को जुगल किशोर मंदिर से लेकर केशीघाट पर यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना का निरीक्षण किया। इसके बाद जुगल किशोर मंदिर से कार्यस्थल की दूरी की पैमाइश कराई। पैमाईश में कुल दूरी 22 मीटर ही निकली। इस पर एक बार तो एएसआई के इंजीनियर ओपी महौर ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कहा कि काम शुरू करने से पहले एनओसी ले लेनी चाहिए थी।
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एसडीएम सदर चांदनी सिंह ने बताया कि वह निरीक्षण की रिपोर्ट मंडलायुक्त को देंगी। इस अवसर पर यमुना रक्षक के अध्यक्ष संत जयकृष्णदास ने कहा कि वे हाईकोर्ट और एनजीटी में अपना पक्ष भी रखेंगे। महंत फूलडोल बिहारीदास, महामंडलेश्वर नवल गिरि, यदुराज सिंह, नूतन बिहारी पारीक, अभय वशिष्ठ, दीपक गोयल, सुनील चतुर्वेदी, श्रीदास प्रजापति, विवेक महाजन ने भी अधिकारियों से वार्ता की।
आरटीआई के बाद जागा एएसआई
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल की आरटीआई के तहत मांगे गए जवाब में छह अक्तूबर को स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने यमुना नदी पर निर्माण कार्य से पहले कोई अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र एएसआई से नहीं लिया है। नवीन घाटों का निर्माण पुरातात्विक महत्व के जुगल किशोर मंदिर के 300 मीटर की संरक्षित परिधि में आता है। यह जानकारी देने के बाद एएसआई ने कार्यदायी संस्था के ठेकेदार को नोटिस जारी किया।