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बदल गई यमुना की तस्वीर, जल हुआ स्वच्छ
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यमुना के जल में इन दिनों प्रदूषण की मात्रा पूर्व की अपेक्षा कम हुई है।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन को 25 दिन बीच चुके हैं। इस दौरान व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हैं। यह स्थिति यमुना नदी के लिए बहुत बेहतर साबित हो रही है। पिछले वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों पर गौर करें तो यमुना के जल में बड़ा परिवर्तन सामने आ रहा है। यमुना में घुलित आक्सीजन (डीओ) की मात्रा बढ़ गई है।
धर्म और आस्था की नगरी मथुरा-वृंदावन में यमुना के जल को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बेहद खतरनाक मान चुका है। दिल्ली, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और मथुरा की औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले कचरे की यमुना में मौजूदगी से इसके जल को आचमन योग्य भी नहीं माना। नियमित स्नान करने वालों की त्वचा के लिए इसे नुकसानदेह करार दिया था। इसके बावजूद धार्मिक आस्था के वशीभूत लाखों श्रद्धालु यमुना के इसी जल में आचमन और स्नान करते रहे हैं। लेकिन, अब कोरोना वायरस के चलते देशव्यापी लॉकडाउन में औद्योगिक गतिविधियां रुकने से यमुना जल को जीवनदान मिल गया है।
लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए यमुना जल के नमूनों की ताजा रिपोर्ट कुछ यही बता रही है। यमुना जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा (डीओ) 7-7.4 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो चार से अधिक होनी चाहिए। जबकि बीओडी की मात्रा घटकर 7-10 मिलीग्राम प्रति लीटर आ गई है, जो आठ से नीचे ही होना चाहिए।
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- लॉकडाउन के बाद लिए गए यमुना जल के नमूनों की रिपोर्ट के मुताबिक यमुना का जल स्वच्छ हुआ है। गंदगी के मानक बीओडी की मात्रा में कमी आई है, जबकि जलचरों के लिए घुलित आक्सीजन की मात्रा बढ़ गई है। चंद दिनों में ही यमुना का जल काफी स्वच्छ हो गया है। पिछले सालों के मुकाबले भी जल में सुधार हुआ है। - डॉ. अरविंद कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मथुरा।
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धर्म और आस्था की नगरी मथुरा-वृंदावन में यमुना के जल को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बेहद खतरनाक मान चुका है। दिल्ली, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और मथुरा की औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले कचरे की यमुना में मौजूदगी से इसके जल को आचमन योग्य भी नहीं माना। नियमित स्नान करने वालों की त्वचा के लिए इसे नुकसानदेह करार दिया था। इसके बावजूद धार्मिक आस्था के वशीभूत लाखों श्रद्धालु यमुना के इसी जल में आचमन और स्नान करते रहे हैं। लेकिन, अब कोरोना वायरस के चलते देशव्यापी लॉकडाउन में औद्योगिक गतिविधियां रुकने से यमुना जल को जीवनदान मिल गया है।
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लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए यमुना जल के नमूनों की ताजा रिपोर्ट कुछ यही बता रही है। यमुना जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा (डीओ) 7-7.4 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो चार से अधिक होनी चाहिए। जबकि बीओडी की मात्रा घटकर 7-10 मिलीग्राम प्रति लीटर आ गई है, जो आठ से नीचे ही होना चाहिए।
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- लॉकडाउन के बाद लिए गए यमुना जल के नमूनों की रिपोर्ट के मुताबिक यमुना का जल स्वच्छ हुआ है। गंदगी के मानक बीओडी की मात्रा में कमी आई है, जबकि जलचरों के लिए घुलित आक्सीजन की मात्रा बढ़ गई है। चंद दिनों में ही यमुना का जल काफी स्वच्छ हो गया है। पिछले सालों के मुकाबले भी जल में सुधार हुआ है। - डॉ. अरविंद कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मथुरा।