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Mathura News: जिंदगी के गम भूलकर विधवा माताओं ने जलाए खुशी के दीप
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कार्यक्रम में दीप जलातीं माताएं ।
वृंदावन। सदियों पुरानी परंपराओं को दरकिनार करते हुए विधवा आश्रमों में रह रहीं माताओं के लिए दिवाली महोत्सव का आयोजन किया गया। जिंदगी के गम भूलकर उन्हें खुशियों के दीप जलाए तो उनका मन खुशियों की झिलमिला उठा।
सुलभ इंटरनेशनल की ओर से ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर परिसर में महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विधवा माताओं को समाज की मुख्यधारा में लाना है। पीढ़ियों से अपने पति को खो चुकीं माताओं को अपने ही देश में अशुभ माना जाता है। उन्हें पारंपरिक रूप से और पारिवारिक खुशी के अवसरों में भाग लेने से वंचित रखा है। इस अवसर पर वृंदावन के विभिन्न आश्रय गृहों में रहने वाली लगभग 100 से अधिक माताओं को ऐतिहासिक 500 वर्ष पुराने गोपीनाथ मंदिर में आमंत्रित कर रंग-बिरंगे दीपक जलाकर दिवाली मनाई।
नित्या पाठक ने कहा कि यह पवित्र भूमि राधा-कृष्ण की है, जहां प्रेम, भक्ति और करुणा एक साथ बहती हैं। जब हम दीप जलाते हैं, तो यह केवल पूजा का नहीं बल्कि समानता, आत्मसम्मान और आशा का प्रतीक होता है।
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सुलभ इंटरनेशनल की ओर से ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर परिसर में महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विधवा माताओं को समाज की मुख्यधारा में लाना है। पीढ़ियों से अपने पति को खो चुकीं माताओं को अपने ही देश में अशुभ माना जाता है। उन्हें पारंपरिक रूप से और पारिवारिक खुशी के अवसरों में भाग लेने से वंचित रखा है। इस अवसर पर वृंदावन के विभिन्न आश्रय गृहों में रहने वाली लगभग 100 से अधिक माताओं को ऐतिहासिक 500 वर्ष पुराने गोपीनाथ मंदिर में आमंत्रित कर रंग-बिरंगे दीपक जलाकर दिवाली मनाई।
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नित्या पाठक ने कहा कि यह पवित्र भूमि राधा-कृष्ण की है, जहां प्रेम, भक्ति और करुणा एक साथ बहती हैं। जब हम दीप जलाते हैं, तो यह केवल पूजा का नहीं बल्कि समानता, आत्मसम्मान और आशा का प्रतीक होता है।
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