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Mathura News: संत प्रेमानंद आश्रम से घर जाते समय आधी राह चले पैदल
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पैदल जाते प्रेमानंद महाराज
वृंदावन(मथुरा)। साल के अंतिम दिन मंगलवार को संत प्रेमानंद महाराज रमणरेती क्षेत्र स्थित श्रीराधा केलि कुंज आश्रम से निवास के लिए जाते समय आधी राह पैदल चले। इस दौरान भक्तों पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
सुबह करीब साढे 9 बजे प्रतिदिन की तरह संत प्रेमानंद महाराज आश्रम श्रीराधा केलि कुंज से दर्जनों सेवकों के साथ निकले। वह हर दिन कार में बैठकर आश्रम से निवास स्थान के लिए जाते हैं, लेकिन मंगलवार सुबह वह कार में बैठने की बजाय आश्रम से परिक्रमा मार्ग तक पैदल चले। इस दौरान सुदूर क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए भक्तों ने उनका पुष्प वर्षा कर स्वागत किया तो उन्होंने भी दोनोें हाथ उठाकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। आधे रास्ते तक पैदल चलने के बाद वह कार में बैठकर छटीकरा स्थित निवास स्थान पर चले गए।
आगरा के भक्तों ने संत प्रेमानंद महाराज के लिए नव वर्ष पर उनके पैदल चलने वाले रमणरेती क्षेत्र में परिक्रमा को रंगबिरंगी आकर्षक लाइटों से सजाया गया। वहीं उनके लिए सुनरख मोड़ से लेकर आश्रम तक द्वार बनाए। यह लाइट की सजावट उनके निवास स्थान से निकलने पहले लगभग एक डेढ़ बजे से उनके आश्रम पहुंचने तक तीन बजे तक जलती हैं।
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आगरा के भक्त कुलदीप राजपूत ने बताया कि संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचन आज के समय में प्रासंगिक है। वह सद्मार्ग पर चलने की सीख देते है। वह पिछले साढे तीन साल से उनसे जुड़े हैं। नव वर्ष पर उनके स्वागत में जहां होकर वह रात में निकलते हैं उसे लाइटों से सजाया गया है। इसे सजावट करने में दो रातें और एक दिन लगा।
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सुबह करीब साढे 9 बजे प्रतिदिन की तरह संत प्रेमानंद महाराज आश्रम श्रीराधा केलि कुंज से दर्जनों सेवकों के साथ निकले। वह हर दिन कार में बैठकर आश्रम से निवास स्थान के लिए जाते हैं, लेकिन मंगलवार सुबह वह कार में बैठने की बजाय आश्रम से परिक्रमा मार्ग तक पैदल चले। इस दौरान सुदूर क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए भक्तों ने उनका पुष्प वर्षा कर स्वागत किया तो उन्होंने भी दोनोें हाथ उठाकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। आधे रास्ते तक पैदल चलने के बाद वह कार में बैठकर छटीकरा स्थित निवास स्थान पर चले गए।
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आगरा के भक्तों ने संत प्रेमानंद महाराज के लिए नव वर्ष पर उनके पैदल चलने वाले रमणरेती क्षेत्र में परिक्रमा को रंगबिरंगी आकर्षक लाइटों से सजाया गया। वहीं उनके लिए सुनरख मोड़ से लेकर आश्रम तक द्वार बनाए। यह लाइट की सजावट उनके निवास स्थान से निकलने पहले लगभग एक डेढ़ बजे से उनके आश्रम पहुंचने तक तीन बजे तक जलती हैं।
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आगरा के भक्त कुलदीप राजपूत ने बताया कि संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचन आज के समय में प्रासंगिक है। वह सद्मार्ग पर चलने की सीख देते है। वह पिछले साढे तीन साल से उनसे जुड़े हैं। नव वर्ष पर उनके स्वागत में जहां होकर वह रात में निकलते हैं उसे लाइटों से सजाया गया है। इसे सजावट करने में दो रातें और एक दिन लगा।