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...ब्याह विनोद रचे सुखदाई
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Sun, 29 Nov 2015 11:47 PM IST
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ठाकुर राधावल्लभलाल जू के ब्याहुले के साथ सप्त दिवसीय श्रीहित वृंदावन महोत्सव का समापन हो गया। रविवार को मंदिर प्रांगण में धूमधाम ब्याहुला मनाया गया। शाम को दर्शन खुलते ही भक्त राधावल्लभ लाल के दर्शन को आतुर दिखाई दिए।
ब्याहुले में राकेश मुखिया के सानिध्य में समाज गायन प्रारंभ हुआ। उन्होंने ‘सखियन के उर ऐसी आई ब्याह विनोद रचे सुखदाई...’ जैसे अनेक पद गाए। वृंदावन महोत्सव के बारे में टिकैत अधिकारी राधेशलाल गोस्वामी ने कहा की हित हरिवंश महाप्रभु ने वृंदावन का प्राकट्य किया।
आज से करीब 500 वर्ष पहले वृंदावन सघन वन के रूप में विद्यमान था। यमुना की निर्मल धारा बहा करती थी। श्रीहित हरिवंश महाप्रभु वृंदावन में सबसे पहले जिस जगह आए उसी का नाम मदन टेर है।
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श्रीहित वृंदावन महोत्सव में चरकुला नृत्य, दीपक नृत्य, रासलीला, ब्याहुला उत्सव का आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्रीहित आनंदलाल गोस्वामी, अक्षयलाल गोस्वामी, कन्हैयालाल गोस्वामी, बिहारीलाल वशिष्ठ, विष्णुमोहन नागार्च आदि उपस्थित थे।
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ब्याहुले में राकेश मुखिया के सानिध्य में समाज गायन प्रारंभ हुआ। उन्होंने ‘सखियन के उर ऐसी आई ब्याह विनोद रचे सुखदाई...’ जैसे अनेक पद गाए। वृंदावन महोत्सव के बारे में टिकैत अधिकारी राधेशलाल गोस्वामी ने कहा की हित हरिवंश महाप्रभु ने वृंदावन का प्राकट्य किया।
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आज से करीब 500 वर्ष पहले वृंदावन सघन वन के रूप में विद्यमान था। यमुना की निर्मल धारा बहा करती थी। श्रीहित हरिवंश महाप्रभु वृंदावन में सबसे पहले जिस जगह आए उसी का नाम मदन टेर है।
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श्रीहित वृंदावन महोत्सव में चरकुला नृत्य, दीपक नृत्य, रासलीला, ब्याहुला उत्सव का आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्रीहित आनंदलाल गोस्वामी, अक्षयलाल गोस्वामी, कन्हैयालाल गोस्वामी, बिहारीलाल वशिष्ठ, विष्णुमोहन नागार्च आदि उपस्थित थे।