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बूंदाबांदी से चिंता में घिरे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:51 PM IST
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मौसम बदला, किसान परेशान
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मौसम ने एक बार फिर बदलाव आने से किसान परेशान हैं। रविवार सुबह आसमान पर बादल छा गए और गरज के साथ बूंदाबांदी भी हुई। जानकारों के अनुसार पहले ही बिगड़े मौसम से फसलों में 20 फीसदी तक नुकसान हो चुका है।
खेतों में पकी खड़ी गेहूं और जौ की फसल पर मौसम के बदलाव का भारी असर पड़ेगा। रविवार को एक बार फिर बूंदाबांदी हुई तो किसानों के हलक सूख गए। अब तक हुए सरकारी आकलन के अनुसार जिले में गेहूं की फसल में औसतन पां से 10 प्रतिशत का नुकसान बताया गया है, जबकि किसानों की मानें तो ये नुकसान 20 से 25 फीसदी तक है।
इसी सीजन में फरह ब्लॉक में ओलावृष्टि के चलते नुकसान इससे भी कहीं अधिक है। राजस्व और कृषि विभाग की टीम संयुक्त रूप से इस क्षेत्र में आकलन करने में जुटी हुई है। गौरतलब है कि बीते वर्ष इसी समय ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात से किसानों की गेहूं और जौ की फसल नष्ट हो गई थी। मौसम के रुख को देखकर किसानों को बीते वर्ष जैसी तबाही की आशंका सता रही है।
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- बीते वर्ष 1.85 लाख हेक्टेयर में हुई थी गेहूं की बुवाई
- बीते वर्ष गेहूं का उत्पादन 6,47,500 मीट्रिक टन
- इस बार कुल 1.95 लाख हेक्टेयर में गेहूं, 45 हजार हेक्टेयर में है तिलहन
पहले तापमान में अचानक वृद्धि और अब बेमौसम बरसात और हवा के प्रभाव से फसल गिर गई है। इससे गेहूं के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ेगा।
- राकेश बाबू, कृषि निदेशक मथुरा
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खेतों में पकी खड़ी गेहूं और जौ की फसल पर मौसम के बदलाव का भारी असर पड़ेगा। रविवार को एक बार फिर बूंदाबांदी हुई तो किसानों के हलक सूख गए। अब तक हुए सरकारी आकलन के अनुसार जिले में गेहूं की फसल में औसतन पां से 10 प्रतिशत का नुकसान बताया गया है, जबकि किसानों की मानें तो ये नुकसान 20 से 25 फीसदी तक है।
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इसी सीजन में फरह ब्लॉक में ओलावृष्टि के चलते नुकसान इससे भी कहीं अधिक है। राजस्व और कृषि विभाग की टीम संयुक्त रूप से इस क्षेत्र में आकलन करने में जुटी हुई है। गौरतलब है कि बीते वर्ष इसी समय ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात से किसानों की गेहूं और जौ की फसल नष्ट हो गई थी। मौसम के रुख को देखकर किसानों को बीते वर्ष जैसी तबाही की आशंका सता रही है।
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- बीते वर्ष 1.85 लाख हेक्टेयर में हुई थी गेहूं की बुवाई
- बीते वर्ष गेहूं का उत्पादन 6,47,500 मीट्रिक टन
- इस बार कुल 1.95 लाख हेक्टेयर में गेहूं, 45 हजार हेक्टेयर में है तिलहन
पहले तापमान में अचानक वृद्धि और अब बेमौसम बरसात और हवा के प्रभाव से फसल गिर गई है। इससे गेहूं के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ेगा।
- राकेश बाबू, कृषि निदेशक मथुरा