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पेयजल के लिए जंगल में भटकती हैं कमई की महिलाएं

Fri, 07 Feb 2020 08:00 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2020 08:00 PM IST
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water problem
गांव कमई में पीने के पानी का संकट। लोग बुग्गियों में ड्रम रख कर बाहर से लाते हैं पीने का पानी। - फोटो : MATHURA
नंदगांव (मथुरा)। राधारानी की प्रिय अष्टसखियों के गांव कमई के हालात बदतर हैं। गांव की महिलाएं मीठे पानी के लिए सुबह से लेकर सायं तक जंगल में लगे ट्यूबवेल के चक्कर लगाती रहती हैं। एक करोड़ रुपया से अधिक खर्च होने के बाद भी गांव के हालात नहीं सुधरे हैं। गांव में जगह-जगह गंदगी, कीचड़ का साम्राज्य है। अफसर गांव का निरीक्षण करने नहीं आते।
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नंदगांव ब्लॉक के गांव कमई की आबादी नौ हजार है। गांव के विकास कार्यों के लिए यहां प्रतिवर्ष लगभग 25 लाख रुपया से अधिक राशि खर्च की जाती है। चार साल में एक करोड़ से अधिक रुपया खर्च हो चुका है। बावजूद इसके गांव में कोई विकास की किरण नजर नहीं आती। गांव का भूगर्भ जल खारा है। खारा पानी की समस्या के समाधान के लिए ग्रामीणों के हो हल्ला मचाने पर जल निगम ने टंकी बनाई लेकिन उससे मीठा पानी नहीं मिल सका। इंजीनियरों की अदूरदर्शिता के चलते उन्होंने जिस जगह पर पंप हाउस बनाया, वहां भी पानी खारा है, जबकि थोड़ी दूरी पर मीठे पानी के ट्यूबवेल लगे हैं।
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इससे गांव में जल निगम खारा पानी की आपूर्ति कर रहा है। पीने को मीठे पानी के लिए घरों की महिलाएं डेढ़ से दो किलोमीटर दूर जंगल से सिर पर पानी ढोकर लाती है। वहीं बुग्गी व अन्य वाहनों का पानी ढोने के लिए सहारा लेना पड़ता है। गांव में नालियां जगह जगह टूटी पड़ी हैं। घरों से निकलने वाला गंदा पानी रास्तों में भरा रहता है। सफाई कर्मचारी सफाई करने नहीं आता। इससे जगह जगह कीचड़ बनी रहती है और मच्छर पनप रहे हैं। गांव के हर तिराहे, चौराहे, नुक्कड़ पर गंदगी के ढेर लगे हैं।
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गांव पहुंचने का मुख्य मार्ग बरसाना रोड से कमई तक टूटा पड़ा है। इसे लेकर लोनिवि अफसर, विधायक मंत्रियों से कई बार शिकायत की, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। शिक्षा के लिए एक ही परिसर में तीन विद्यालय बने हैं, लेकिन पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। स्कूल में गंदगी बनी रहती है। एक उपस्वास्थ्य केंद्र भी है लेकिन वहां चिकित्सक नहीं आता। बीमार होने पर इलाज के लिए बरसाना, कोसी, गोवर्धन और मथुरा तक दौड़ना पड़ता है।

-गांव के विकास के लिए जो विकार निधि मिली थी उससे गांव में विकास कार्य कराए गए हैं। कुछ काम शेष रह गए हैं उनको आगामी कार्य योजना में शामिल कराया जाएगा। गांव में एक सफाई कर्मचारी होने के कारण पूरे गांव की सफाई नहीं हो पाती है। एक और सफाई कर्मचारी की मांग लिखित रूप से दे दी गई है।
नेत्रपाल सिंह, ग्राम पंचायत सचिव
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