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ट्यूबवेल पर टैक्स देने के लिए 23 व्यवसायियों ने किया आवेदन
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मथुरा। कॉमर्शियल ट्यूबवेल पर लगने वाले वाटर मीटर और रजिस्ट्रेशन के लिए लघु सिंचाई विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अभी तक 23 व्यवसायियों ने आवेदन किया है। इनमें कुछ आवेदन ट्यूबवेल के पंजीकरण के लिए तो कुछ ट्यूबवेल पर वाटर टैक्स देने के संबंध में हैं। अगले सप्ताह सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई चार सदस्यीय समिति इन आवेदनों का परीक्षण कर मौके पर निरीक्षण करेगी और आवेदन को फाइनल करेगी। जानकारी रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पोर्टल का लोकार्पण करने के बाद से विभाग द्वारा जल्द ही वाटर मीटर लगाए जाएंगे।
मनमाने ढंग से जल दोहन करने वालों पर लगाम कसने के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी का मापन करने के लिए सरकार द्वारा वाटर मीटर लगाए जाएंगे। सरकार ने घरेलू और कृषि क्षेत्र के ट्यूबवेल को इससे मुक्त रखा है। पानी के लिए जो रेट लगाए गए हैं, वह 500 घन मीटर से प्रारंभ किए गए हैं। 500 घन मीटर से कम तक 90 पैसा, 1000 घन मीटर तक एक रुपया, 5000 घन मीटर तक 1.10 रुपये जबकि 5000 घनमीटर से अधिक पर 1.20 रुपये प्रतिघन मीटर का टैक्स देना होगा। पोर्टल लांच होने के बाद से विभाग पर अब तक 23 लोगों ने आवेदन किया है।
अब कॉमर्शियल ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी पर स्लैब के हिसाब से वाटर टैक्स देना होगा। इन पर वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इससे जल दोहन रुक सकेगा, साथ ही इससे मिलने वाले पैसे से वाटर फंड बन सकेगा। जिसका इस्तेमाल उन क्षेत्रों में हो सकेगा जहां पर जल संबंधी समस्याएं हैं। अभी तक कुल 23 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
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-हरिओम, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग
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मनमाने ढंग से जल दोहन करने वालों पर लगाम कसने के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी का मापन करने के लिए सरकार द्वारा वाटर मीटर लगाए जाएंगे। सरकार ने घरेलू और कृषि क्षेत्र के ट्यूबवेल को इससे मुक्त रखा है। पानी के लिए जो रेट लगाए गए हैं, वह 500 घन मीटर से प्रारंभ किए गए हैं। 500 घन मीटर से कम तक 90 पैसा, 1000 घन मीटर तक एक रुपया, 5000 घन मीटर तक 1.10 रुपये जबकि 5000 घनमीटर से अधिक पर 1.20 रुपये प्रतिघन मीटर का टैक्स देना होगा। पोर्टल लांच होने के बाद से विभाग पर अब तक 23 लोगों ने आवेदन किया है।
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अब कॉमर्शियल ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी पर स्लैब के हिसाब से वाटर टैक्स देना होगा। इन पर वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इससे जल दोहन रुक सकेगा, साथ ही इससे मिलने वाले पैसे से वाटर फंड बन सकेगा। जिसका इस्तेमाल उन क्षेत्रों में हो सकेगा जहां पर जल संबंधी समस्याएं हैं। अभी तक कुल 23 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
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-हरिओम, सहायक अभियंता लघु सिंचाई विभाग