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द्वारिकाधीश का ब्यावला, ब्रजवासी बने बाराती
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 02 Jul 2015 12:20 AM IST
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शहर का प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर बुधवार को विवाह के उल्लास में सराबोर था। मंगल गीतों के साथ ब्रजवासियों को द्वारिकाधीश के बाराती बनने का सौभाग्य हासिल हुआ। ब्रजवासियों ने भी इस अवसर को आत्मसात कर अद्भुत आनंद की अनुभूति की।
अधिक माह के मनोरथों के क्रम में बुधवार को श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में सुबह नंदोत्सव का आयोजन हुआ। सुबह ग्वाल के दर्शनों में नंद के आनंद भयौ, जै कन्हैया लाल की... उद्घोष ने श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। नंद के घर में उत्सव का माहौल था। ब्रजवासी बधाई देने आ रहे थे, माता यशोदा पुत्र प्राप्ति से फूले नहीं समा रहीं थीं। शाम को शयन में विवाह उत्सव (ब्यावला) मनाया गया।
इस मनोरथ के साक्षी बनकर हजारों श्रद्धालु निहाल हो गए। राजाधिराज का हीरे-मोतियों से शृंगार किया गया। शहनाई और नौवत बजने लगी तो श्रद्धालु भी थिरक उठे। महिलाएं नाचने लगी, आनंद अपने शिखर को छू रहा था। इस दौरान द्वारिकानाथ दूल्हा बन रथ पर सवार होकर रुक्मिणी को ब्याहने के लिए चले तो ब्रजवासी भी बाराती बनकर उनके पीछे-पीछे चल दिए। इस अद्भुत छटा को निहारने के लिए भक्तों में होड़ मच गई। हर कोई इस पल को आंखों में समेटने के लिए आतुर हो उठा। इस अवसर पर मंदिर अधिकारी श्रीधरचतुर्वेदी, राकेश तिवारी, मुरलीधर, भोले, ब्रजेश, सुधीर आदि थे।
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फूलों की सजावट बनी आकर्षण
मथुरा। श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में ठाकुरजी के विवाह उत्सव के लिए मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों की महक से मंदिर जगमोहन महक उठा। आकर्षक बिजली की सजावट हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।
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अधिक माह के मनोरथों के क्रम में बुधवार को श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में सुबह नंदोत्सव का आयोजन हुआ। सुबह ग्वाल के दर्शनों में नंद के आनंद भयौ, जै कन्हैया लाल की... उद्घोष ने श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। नंद के घर में उत्सव का माहौल था। ब्रजवासी बधाई देने आ रहे थे, माता यशोदा पुत्र प्राप्ति से फूले नहीं समा रहीं थीं। शाम को शयन में विवाह उत्सव (ब्यावला) मनाया गया।
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इस मनोरथ के साक्षी बनकर हजारों श्रद्धालु निहाल हो गए। राजाधिराज का हीरे-मोतियों से शृंगार किया गया। शहनाई और नौवत बजने लगी तो श्रद्धालु भी थिरक उठे। महिलाएं नाचने लगी, आनंद अपने शिखर को छू रहा था। इस दौरान द्वारिकानाथ दूल्हा बन रथ पर सवार होकर रुक्मिणी को ब्याहने के लिए चले तो ब्रजवासी भी बाराती बनकर उनके पीछे-पीछे चल दिए। इस अद्भुत छटा को निहारने के लिए भक्तों में होड़ मच गई। हर कोई इस पल को आंखों में समेटने के लिए आतुर हो उठा। इस अवसर पर मंदिर अधिकारी श्रीधरचतुर्वेदी, राकेश तिवारी, मुरलीधर, भोले, ब्रजेश, सुधीर आदि थे।
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फूलों की सजावट बनी आकर्षण
मथुरा। श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में ठाकुरजी के विवाह उत्सव के लिए मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों की महक से मंदिर जगमोहन महक उठा। आकर्षक बिजली की सजावट हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।