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सखियन के उर ऐसी आयी, ब्याहु विनोद रच्यौ सुखदाई...
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 05 Jul 2015 12:13 AM IST
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प्रेम और अनुराग के प्रतीक अधिक मास में ठाकुरजी के नित नवीन दर्शनों से श्रद्धालु निहाल हैं। ठाकुर राधा वल्लभ मंदिर में ठाकुरजी कभी दीवाली, कभी होली और कभी चौसर खेलते हुए भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। धार्मिक कार्यक्रमों की शृंखला में राधावल्लभ मंदिर में शनिवार की शाम व्याहुला (विवाह) महोत्सव मनाया गया। ब्रज के अलबेले ठाकुर राधावल्लभ लाल ने सेहरा बांधा। मंदिर परिसर शहनाई से गुंजायमान हो उठा।
ठाकुरजी की बारात में शामिल होने के लिए संत, महिला श्रद्धालु और सेवायत आकर्षक परिधान पहनकर पहुंचे। मंगल गीतों पर नृत्य किया गया, एक के बाद एक। अपने ठाकुरजी के व्याहुला का उत्साह ऐसा था कि थकान पास नहीं फटक रही थी।
ठाकुर राधावल्लभ लाल के समक्ष व्याहुला महोत्सव के पद गाए जा रहे थे। राकेश मुखिया ने इन पदों से ठाकुरजी के सेहरा से लेकर मंडप तक का दृश्य जीवंत कर दिया।
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‘सखियन के उर ऐसी आयी, ब्याहु विनोद रच्यौ सुखदाई...Ó, ‘यह नव दुलहिनि अति सुकुमारी, ये नव दूलहू लाल बिहारी...Ó, ‘शोभा मंडप कुंजन द्वारैं, हित की बांधीं बंदनवारे...Ó। राधावल्लभ लाल के अनुरागात्मक प्रेम से बंधे श्रद्धालु एकटक उन्हें निहारते रहे। दर्शनों का यह क्रम देर रात तक जारी रहा। सेवायत मनोज गोस्वामी, चंदन गोस्वामी, प्रेम कुमार गोस्वामी, हितेंद्र कुमार गोस्वामी, संजीव गोस्वामी और मनमोहन गोस्वामी उपस्थित थे।
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ठाकुरजी की बारात में शामिल होने के लिए संत, महिला श्रद्धालु और सेवायत आकर्षक परिधान पहनकर पहुंचे। मंगल गीतों पर नृत्य किया गया, एक के बाद एक। अपने ठाकुरजी के व्याहुला का उत्साह ऐसा था कि थकान पास नहीं फटक रही थी।
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ठाकुर राधावल्लभ लाल के समक्ष व्याहुला महोत्सव के पद गाए जा रहे थे। राकेश मुखिया ने इन पदों से ठाकुरजी के सेहरा से लेकर मंडप तक का दृश्य जीवंत कर दिया।
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‘सखियन के उर ऐसी आयी, ब्याहु विनोद रच्यौ सुखदाई...Ó, ‘यह नव दुलहिनि अति सुकुमारी, ये नव दूलहू लाल बिहारी...Ó, ‘शोभा मंडप कुंजन द्वारैं, हित की बांधीं बंदनवारे...Ó। राधावल्लभ लाल के अनुरागात्मक प्रेम से बंधे श्रद्धालु एकटक उन्हें निहारते रहे। दर्शनों का यह क्रम देर रात तक जारी रहा। सेवायत मनोज गोस्वामी, चंदन गोस्वामी, प्रेम कुमार गोस्वामी, हितेंद्र कुमार गोस्वामी, संजीव गोस्वामी और मनमोहन गोस्वामी उपस्थित थे।