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Mathura News: वृंदावन का अक्रूर मंदिर संरक्षित स्मारक घोषित
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मथुरा। पुरातत्व विभाग ने वृंदावन के अक्रूर मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए जिलाधिकारी को लिखित रूप से एक माह के आपत्तियां भेजने को कहा है।
वृंदावन के गांव अक्रूर स्थित इस मंदिर का नाम भगवान श्रीकृष्ण के पारिवारिक रिश्ते में चाचा अक्रूर के नाम पर है। मंदिर यमुना के अक्रूर घाट के निकट स्थित है। हालांकि मंदिर से यमुना नदी की वर्तमान दूरी करीब एक किलोमीटर है। इस मंदिर में अक्रूर जी को कृष्ण और बलराम के साथ देख सकते हैं। यह ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का पड़ाव स्थल भी है। मंदिर परिसर में पंचमुखी और दक्षिण मुखी हनुमान की प्रतिमा भी है।
वाष्णेर्य समाज के लोग इस स्थल को अपने उद्गम स्थल के रूप में मानते हैं। भले ही यह प्राचीन मंदिरों में शामिल है, लेकिन वर्तमान स्वरूप 2002 में अमल में आया था। मान्यता है कि भजन कीर्तन करते हुए ब्रज भूमि आए चैतन्य महाप्रभु भी यहां पहुंचे थे। उनकी चरण पादुकाएं यहां मौजूद हैं। उन्होंने यहां विश्राम किया था। राज्य संरक्षित स्थलों की सूची में अक्रूर मंदिर को शामिल करने के बाद यहां विकास की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। यह स्थल पुरातत्व विभाग की विभिन्न विकास योजनाओं का हिस्सा बन सकेगा।
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वृंदावन के गांव अक्रूर स्थित इस मंदिर का नाम भगवान श्रीकृष्ण के पारिवारिक रिश्ते में चाचा अक्रूर के नाम पर है। मंदिर यमुना के अक्रूर घाट के निकट स्थित है। हालांकि मंदिर से यमुना नदी की वर्तमान दूरी करीब एक किलोमीटर है। इस मंदिर में अक्रूर जी को कृष्ण और बलराम के साथ देख सकते हैं। यह ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का पड़ाव स्थल भी है। मंदिर परिसर में पंचमुखी और दक्षिण मुखी हनुमान की प्रतिमा भी है।
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वाष्णेर्य समाज के लोग इस स्थल को अपने उद्गम स्थल के रूप में मानते हैं। भले ही यह प्राचीन मंदिरों में शामिल है, लेकिन वर्तमान स्वरूप 2002 में अमल में आया था। मान्यता है कि भजन कीर्तन करते हुए ब्रज भूमि आए चैतन्य महाप्रभु भी यहां पहुंचे थे। उनकी चरण पादुकाएं यहां मौजूद हैं। उन्होंने यहां विश्राम किया था। राज्य संरक्षित स्थलों की सूची में अक्रूर मंदिर को शामिल करने के बाद यहां विकास की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। यह स्थल पुरातत्व विभाग की विभिन्न विकास योजनाओं का हिस्सा बन सकेगा।
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