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Mathura News: बदलते मौसम में वायरल बुखार के मरीज बढ़े
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मथुरा। बदलते मौसम में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मरीजों को आ रहे बुखार में चिकनगुनिया जैसे लक्षण मिल रहे हैं। जोड़ों में दर्द के साथ प्लेटलेट्स भी कम हो रही हैं। दवा लेने पर बुखार ठीक होने के बावजूद हाथ पैरों के जोड़ों में दर्द काफी समय तक बना रहता है।
जिला अस्पताल के डॉक्टर सिद्धार्थ धनगर ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों वायरल फीवर के मरीज बढ़ रहे हैं। ओपीडी में 180 से 200 मरीज वायरल बुखार की परेशानी लेकर प्रतिदिन आ रहे हैं। इसका कारण सुबह और शाम के समय ठिठुरन भरी ठंड और दोपहर में मौसम गर्म होने पर लोगोें का कपड़े कम पहनना है। इससे लोग सर्द गर्म मौसम की चपेट में आ जाते हैं।
इसके अलावा खांसने और छींकने के दौरान अन्य लोग संपर्क में आ जाने से भी वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया वायरल बुखार में भी चिकनगुनिया और डेंगू बुखार की तरह मरीजों की प्लेटलेट्स कम हो रही है और जोड़ों एवं शरीर में भी दर्द लेकर मरीज आ रहे हैं। दवा लेने पर बुखार न आने के बावजूद कई दिनों तक मरीज के शरीर एवं जोड़ों में दर्द की शिकायत मिल रही है।
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यह बुखार सात से दस दिन तक रहता है। उन्होंने बताया कि बुखार आने पर सिर्फ पैरासीटामॉल लेंं। वायरल बुखार में कोई भी एंटीबायोटिक दवा कारगर नहीं होती। जबकि लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक ले लेते हैं। इससे प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
ऐसे करें बचाव
रात को सोते समय नमक के गुनगुने पानी से गरारे करें, गर्म पानी में विक्स डालकर भाप लें, ऊनी कपड़े पहनकर रखें, घर से बाहर मास्क लगाकर ही निकलें, भीड़ में जाने से बचें तथा तरल पदार्थ एवं हल्का सुपाच्य भोजन लें।
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जिला अस्पताल के डॉक्टर सिद्धार्थ धनगर ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों वायरल फीवर के मरीज बढ़ रहे हैं। ओपीडी में 180 से 200 मरीज वायरल बुखार की परेशानी लेकर प्रतिदिन आ रहे हैं। इसका कारण सुबह और शाम के समय ठिठुरन भरी ठंड और दोपहर में मौसम गर्म होने पर लोगोें का कपड़े कम पहनना है। इससे लोग सर्द गर्म मौसम की चपेट में आ जाते हैं।
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इसके अलावा खांसने और छींकने के दौरान अन्य लोग संपर्क में आ जाने से भी वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया वायरल बुखार में भी चिकनगुनिया और डेंगू बुखार की तरह मरीजों की प्लेटलेट्स कम हो रही है और जोड़ों एवं शरीर में भी दर्द लेकर मरीज आ रहे हैं। दवा लेने पर बुखार न आने के बावजूद कई दिनों तक मरीज के शरीर एवं जोड़ों में दर्द की शिकायत मिल रही है।
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यह बुखार सात से दस दिन तक रहता है। उन्होंने बताया कि बुखार आने पर सिर्फ पैरासीटामॉल लेंं। वायरल बुखार में कोई भी एंटीबायोटिक दवा कारगर नहीं होती। जबकि लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक ले लेते हैं। इससे प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
ऐसे करें बचाव
रात को सोते समय नमक के गुनगुने पानी से गरारे करें, गर्म पानी में विक्स डालकर भाप लें, ऊनी कपड़े पहनकर रखें, घर से बाहर मास्क लगाकर ही निकलें, भीड़ में जाने से बचें तथा तरल पदार्थ एवं हल्का सुपाच्य भोजन लें।