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पूरे देश में होने चाहिए वात्सल्य ग्राम: हेमामालिनी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 22 Feb 2016 11:04 PM IST
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वात्सल्य ग्राम में बच्चे जो संस्कृति की शिक्षा पाते हैं वह बाहर शायद ही उन्हें सीखने को मिले। ऐसे वात्सल्य ग्राम पूरे देश में होने चाहिए। यह कहना है सांसद हेमामालिनी का। वह वात्सल्य महोत्सव में सोमवार को बतौर अतिथि जनसमूह को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि यहां जो आए उसे प्यार मिलता है। उम्मीद जताई कि यहां से सीखने-पढ़ने वाले बच्चे देश को दुनिया में आगे ले जाएंगे। सांसद का कहना है कि जब भी दीदी से मिलती हूं सुखद अनुभूति होती है और आज दीदी को प्रणाम करती हूं। सांसद ने बताया कि महोत्सव करना आसान कार्य नहीं है, मैंने भी मथुरा महोत्सव किया था। इस मौके पर हेमामालिनी ने स्वामी परमानंद और साध्वी ऋतंभरा के चरण छूकर आशीर्वाद लिया।
मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद ने कहा कि वृंदावन धाम अद्भुत, अलौकिक प्रेम की नगरी है। यह धरा प्रभु चरणों का स्पर्श कर उपकृत है, इसलिए यहां की धरती से ऐसा राष्ट्र निर्माण हो कि मातृशक्ति का सर्वत्र सम्मान होता रहे। स्वामी परमानंद ने कहा है कि राष्ट्र की दुहाई देते हैं और राष्ट्र को खाए जा रहे हैं, यह बहुत गलत है।
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महाराजश्री ने कहा कि आरक्षण गजब की बात है, सवाल उठाया कि बाकी दुनिया कहां जाए। उन्होंने नारा दिया जीओ और जीने दो। इस अवसर पर सुभाष जग्गा, संतोष बुधिया, साध्वी चेतन्य सिंधु, शिरोमणि, साध्वी सत्यप्रिया, आचार्य बद्रीश, विष्णुकांत शास्त्री, मृदुलकांत शास्त्री, साध्वी स्वरूप, ललित मोहन, विपिन मुकुट वाला, नरेंद्र शर्मा, माधव लोखण्डे, विभोर प्रकाशम, महेश खंडेलवाल आदि उपस्थित थेे।
बेटियों के विवाह को दिए 200 करोड़
वृंदावन। गुजरात प्रांत के सूरत के रहने वाले प्रभु भक्त लालजी भाई बादशाह ने वात्सल्य महोत्सव में बिना माता-पिता की 10,000 कन्याओं के विवाह के लिए 200 करोड़ रुपये खर्च करने का एलान किया।
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उन्होंने कहा कि यहां जो आए उसे प्यार मिलता है। उम्मीद जताई कि यहां से सीखने-पढ़ने वाले बच्चे देश को दुनिया में आगे ले जाएंगे। सांसद का कहना है कि जब भी दीदी से मिलती हूं सुखद अनुभूति होती है और आज दीदी को प्रणाम करती हूं। सांसद ने बताया कि महोत्सव करना आसान कार्य नहीं है, मैंने भी मथुरा महोत्सव किया था। इस मौके पर हेमामालिनी ने स्वामी परमानंद और साध्वी ऋतंभरा के चरण छूकर आशीर्वाद लिया।
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मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद ने कहा कि वृंदावन धाम अद्भुत, अलौकिक प्रेम की नगरी है। यह धरा प्रभु चरणों का स्पर्श कर उपकृत है, इसलिए यहां की धरती से ऐसा राष्ट्र निर्माण हो कि मातृशक्ति का सर्वत्र सम्मान होता रहे। स्वामी परमानंद ने कहा है कि राष्ट्र की दुहाई देते हैं और राष्ट्र को खाए जा रहे हैं, यह बहुत गलत है।
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महाराजश्री ने कहा कि आरक्षण गजब की बात है, सवाल उठाया कि बाकी दुनिया कहां जाए। उन्होंने नारा दिया जीओ और जीने दो। इस अवसर पर सुभाष जग्गा, संतोष बुधिया, साध्वी चेतन्य सिंधु, शिरोमणि, साध्वी सत्यप्रिया, आचार्य बद्रीश, विष्णुकांत शास्त्री, मृदुलकांत शास्त्री, साध्वी स्वरूप, ललित मोहन, विपिन मुकुट वाला, नरेंद्र शर्मा, माधव लोखण्डे, विभोर प्रकाशम, महेश खंडेलवाल आदि उपस्थित थेे।
बेटियों के विवाह को दिए 200 करोड़
वृंदावन। गुजरात प्रांत के सूरत के रहने वाले प्रभु भक्त लालजी भाई बादशाह ने वात्सल्य महोत्सव में बिना माता-पिता की 10,000 कन्याओं के विवाह के लिए 200 करोड़ रुपये खर्च करने का एलान किया।