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Mathura News: ब्रज साहित्य परिषद न्यास के तत्वावधान में गांव बाद में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन
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टाउनशिप। ब्रज साहित्य परिषद न्यास के तत्वावधान में ब्रजभाषा के कवियों ने गांव बाद स्थिति राधावल्लभ संप्रदाय के संस्थापक एवं ब्रजभाषा के विख्यात कवि हित हरिवंश को प्राकटॺ स्थली पर पुष्पांजलि अर्पित कीं। कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मंदिर के मुखिया खेलन बिहारी ने हित हरिवंश महाप्रभु के जीवन पर प्रकाश डाला।
कवि सम्मेलन की शुरुआत राधागोविंद पाठक की सरस्वती वंदना से हुई। कवि हरिबाबू ओम ने कहा, राधावल्लभ लाल हैं जिनके प्राणाधार, तेजवीर सिंह तेज ने कहा, नवल भोर छवि नित नवल, देखूं चारों ओर। मोहन मोही ने हित हरिवंश प्रभु पर बारहमासी पढ़ कर सब का मन मोह लिया। डॉ. रमाशंकर पांडेय ने बोयें जो बबूल उन्हें आम नहीं मिलते सुना कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान कीं। युवा कवि विनीत गौतम ने ओज की कविता पढ़ कर तालियां बटोरीं। भरतपुर से आए हरिओम हरि ने धन्य भाग्य दरशन किए, संत, सुकवि हरिवंश सुनाया। गोपाल प्रसाद गोप ने प्रेम नगर के रहैवैया हौ गीत सुना कर कवि सम्मेलन को गति प्रदान की।
भरतपुर से पधारे सुरेश ने आधि-व्याधि संताप कौ रहै न नेंक हूं अंश, रेनु उपाध्याय ने कहा, हाथ में घड़ी लेकिन हाथ में घड़ी नहीं। सम्मेलन का संचालन कर रहे देवी प्रसाद गौड़ ने कहा जि हरिवंश लला की माटी है, संत करें जा कौ वंदन, मंगल करै अमंगल नासै, देवन के माथे कौ चंदन। अलीगढ़ से आए भुवनेश चौहान चिंतन ने कहा, आन-बान और शान तिरंगा है भारत की, अनुपम गौतम ने ब्रज की संस्कृति पर कविता पढ़ी। प्रतीक्षा चौहान, चंद प्रकाश मैथिल, नेत्रपाल राघव, नारायण सिंह, हृदयेश उपाध्याय एवं रामकुमार ने काव्यपाठ किया। आयोजन के व्यवस्थापक शंकर लाल ने हरीवंश प्रभु की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि ब्रज चोरासी कोस में हरिवंश पड़ाव है। अध्यक्षता राधागोविंद पाठक ने और धन्यवाद ज्ञापन मिश्री लाल ने व्यक्त किया।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत राधागोविंद पाठक की सरस्वती वंदना से हुई। कवि हरिबाबू ओम ने कहा, राधावल्लभ लाल हैं जिनके प्राणाधार, तेजवीर सिंह तेज ने कहा, नवल भोर छवि नित नवल, देखूं चारों ओर। मोहन मोही ने हित हरिवंश प्रभु पर बारहमासी पढ़ कर सब का मन मोह लिया। डॉ. रमाशंकर पांडेय ने बोयें जो बबूल उन्हें आम नहीं मिलते सुना कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान कीं। युवा कवि विनीत गौतम ने ओज की कविता पढ़ कर तालियां बटोरीं। भरतपुर से आए हरिओम हरि ने धन्य भाग्य दरशन किए, संत, सुकवि हरिवंश सुनाया। गोपाल प्रसाद गोप ने प्रेम नगर के रहैवैया हौ गीत सुना कर कवि सम्मेलन को गति प्रदान की।
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भरतपुर से पधारे सुरेश ने आधि-व्याधि संताप कौ रहै न नेंक हूं अंश, रेनु उपाध्याय ने कहा, हाथ में घड़ी लेकिन हाथ में घड़ी नहीं। सम्मेलन का संचालन कर रहे देवी प्रसाद गौड़ ने कहा जि हरिवंश लला की माटी है, संत करें जा कौ वंदन, मंगल करै अमंगल नासै, देवन के माथे कौ चंदन। अलीगढ़ से आए भुवनेश चौहान चिंतन ने कहा, आन-बान और शान तिरंगा है भारत की, अनुपम गौतम ने ब्रज की संस्कृति पर कविता पढ़ी। प्रतीक्षा चौहान, चंद प्रकाश मैथिल, नेत्रपाल राघव, नारायण सिंह, हृदयेश उपाध्याय एवं रामकुमार ने काव्यपाठ किया। आयोजन के व्यवस्थापक शंकर लाल ने हरीवंश प्रभु की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि ब्रज चोरासी कोस में हरिवंश पड़ाव है। अध्यक्षता राधागोविंद पाठक ने और धन्यवाद ज्ञापन मिश्री लाल ने व्यक्त किया।
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