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Mathura News: कैंसर से जूझते पिता के बुढ़ापे की लाठी नहीं बन सके दो बेटे
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मथुरा। शहर के प्रमुख सराफा कारोबारी बेटों ने बुजुर्ग मां-बाप को डेढ़ साल पहले घर से निकाल दिया। दंपती ने एक ट्रस्ट की बगीची में शरण ली। जीवन संगिनी भी चल बसी। अब बुजुर्ग कैंसर से जंग लड़ रहे हैं, लेकिन पिता का इलाज कराना तो दूर बेटों ने मां का मुंह भी आखिरी बार नहीं देखा। बेटी ने भी असााध्य रोग की बात सुनकर पीछा छुड़ा लिया और ट्रस्ट के आश्रम में छोड़ आई। अब ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने समाज कल्याण अधिकारी से उन्हें वृद्धाश्रम में भेजने की गुहार लगाई है।
यह हकीकत शहर के एक सराफा कारोबारी परिवार की है। जिन माता-पिता ने दोनों बेटों की बेहतर परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। बेटी का भी अच्छे घर में ब्याह किया, लेकिन बुढ़ापे की दहलीज पर आते ही जन्म देने वाले माता पिता ही दो बेटों की आंंख की किरकिरी बन गए। जिन बच्चों को करोड़ों का कारोबार सौंपा और जिंदगी भर की पूंजी सौंप दी। उन्होंने मां-बाप से पीछा छुड़ाने में एक पल नहीं लगाया। बुजुर्ग दंपती को करीब डेढ़ साल पहले घर से निकाल दिया। दोनों ने समाज की बदनामी से छुपने के लिए अपने परिचित ट्रस्ट वालों के यहां शरण ली। कुछ माह पहले जीवन संगिनी भी दुनिया छोड़कर चली गई। पिता को लकवे की शिकायत हुई तो बेटी का दिल पसीज गया, वह पिता को अपने घर ले आई। यहां कुछ समय रखने के बाद पिता को चिकित्सक को दिखाया तो उन्हें कैंसर बता दिया। इस पर बेटी भी दोबारा से पिता को ट्रस्ट की बगीची में छोड़ आई। बृहस्पतिवार को ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जिला समाज कल्याण अधिकारी नागेंद्र पाल सिंह से मुलाकात कर वृद्ध को सरकारी वृद्धाश्रम में भेजने की गुहार लगाई। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने वृद्ध को सरकारी वृद्धाश्रम में भेजने के निर्देश दिए। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मुताबिक, वृद्ध के दोनों बेटे शहर के नामी सराफा कारोबारी हैं। वे हाईवे स्थित एक शानदार कॉलोनी में रहते हैं।
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यह हकीकत शहर के एक सराफा कारोबारी परिवार की है। जिन माता-पिता ने दोनों बेटों की बेहतर परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। बेटी का भी अच्छे घर में ब्याह किया, लेकिन बुढ़ापे की दहलीज पर आते ही जन्म देने वाले माता पिता ही दो बेटों की आंंख की किरकिरी बन गए। जिन बच्चों को करोड़ों का कारोबार सौंपा और जिंदगी भर की पूंजी सौंप दी। उन्होंने मां-बाप से पीछा छुड़ाने में एक पल नहीं लगाया। बुजुर्ग दंपती को करीब डेढ़ साल पहले घर से निकाल दिया। दोनों ने समाज की बदनामी से छुपने के लिए अपने परिचित ट्रस्ट वालों के यहां शरण ली। कुछ माह पहले जीवन संगिनी भी दुनिया छोड़कर चली गई। पिता को लकवे की शिकायत हुई तो बेटी का दिल पसीज गया, वह पिता को अपने घर ले आई। यहां कुछ समय रखने के बाद पिता को चिकित्सक को दिखाया तो उन्हें कैंसर बता दिया। इस पर बेटी भी दोबारा से पिता को ट्रस्ट की बगीची में छोड़ आई। बृहस्पतिवार को ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जिला समाज कल्याण अधिकारी नागेंद्र पाल सिंह से मुलाकात कर वृद्ध को सरकारी वृद्धाश्रम में भेजने की गुहार लगाई। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने वृद्ध को सरकारी वृद्धाश्रम में भेजने के निर्देश दिए। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मुताबिक, वृद्ध के दोनों बेटे शहर के नामी सराफा कारोबारी हैं। वे हाईवे स्थित एक शानदार कॉलोनी में रहते हैं।
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