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Mathura News: वृंदावन में फिर पुनर्जीवित होंगे दो वन क्षेत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Jun 2025 01:13 AM IST
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Two forest areas will be revived in Vrindavan
मथुरा। वृंदावन में कभी तुलसी (वृंदा) का वन हुआ करता था। लता पताओं से अच्छादित हर तरफ हरियाली थी। मंदिरों के साथ कुंज और सरोवर इस पवित्र भूमि की खूबसूरती को और निखरते थे, लेकिन वर्तमान में सब विलुप्त हो गया है। प्राचीन स्वरूप को पुनर्जीवित करने के लिए प्रदेश सरकार लगातार कार्य कर रही है। वन विभाग, विकास प्राधिकरण और तीर्थ विकास परिषद तीनों मिलकर इस योजना पर कार्य करेंगे। कॉरिडोर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं को इसका सुखद अहसास होगा।
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उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि वन विभाग के साथ ब्रज तीर्थ विकास परिषद अब श्रीबांकेबिहारी की नगरी वृंदावन में दो नए वन क्षेत्र विकसित कर रहा है। इसमें एक क्षेत्र प्रेम मंदिर के निकट वृंदावन छटीकरा मार्ग स्थित सुनरख है, जहां वर्तमान में बबूल के पेड़ हैं। 125 एकड़ क्षेत्रफल में से करीब 80 एकड़ में इस वन को तैयार किया जा रहा है। योजना के तहत वन विभाग यहां पीपल, बरगद, पाखड़, नीम, कदंब के पौधे लगाए जाएंगे।
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उन्होंने बताया कि इसी तरह वृंदावन स्थित कुंभ क्षेत्र में प्राचीन मूल स्वरूप देखने को मिलेगा। यमुना किनारे 56 हेक्टेयर कुंभ क्षेत्र को रमणीक वन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां यमुना तट और परिक्रमा मार्ग के बीच कदंब, बरगद आदि वृक्षावली तैयार हो रही है। उसके नीचे भक्तजन भागवत अराधना, भागवत कथा का श्रवण भी कर सकेंगे। इसके लिए मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा अस्थायी विशाल पंडाल बनाया जा रहा है। यमुना किनारे स्थित यह कुंभ क्षेत्र श्रीबांकेबिहारी के भक्तों को प्राचीन वृंदावन का अहसास कराएगा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद यहां एक निजी संस्था के साथ काम कर रहा है।
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उन्होंने बताया कि यह दोनों ही वन क्षेत्र श्रीबांकेबिहारी कॉरिडोर बनने के बाद बढ़ने वाली भीड़ के लिए उपयुक्त स्थल होंगे। यहां लोग दर्शन से पहले या पट बंद होने के बाद दोपहर के वक्त वृंदावन की प्राकृतिक छटा का आनंद उठा सकेंगे। इन दोनों वन क्षेत्र के मध्य बिहारीजी कॉरिडोर निर्माणाधीन है।
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