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गालीगलौज के पीछे ढाई करोड़ का खेल
अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 07 Jan 2017 10:39 PM IST
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मथुरा नगर पालिका के एई और जेई के विवाद में ढाई करोड़ के एसटीपी संचालन का खेल सामने आ रहा है। इसमें 37 लाख रुपये का सिल्ट सफाई का टेंडर भी है, जिसके लिए एई से अनुमोदन भी नहीं लिया गया है। अब इसकी शिकायत शासन तक पहुंच रही है।
यमुना प्रदूषण नियंत्रण के लिए मथुरा नगर पालिका प्रति वर्ष करीब ढाई करोड़ से ज्यादा खर्च करती है। इसके बावजूद एसटीपी और एसपीएस का संचालन ठप रहता है। यह खुद डीएम और यमुना कार्य योजना के नोडल अधिकारी सहित निकाय प्रभारी भी देख चुके हैं। स्थिति वर्षों से ज्यों की त्यों है।
ठेकेदार और पालिका अफसरों के बीच एसटीपी संचालन के नाम पर बजट का बंदरबांट हो रहा है। बीते सप्ताह एसटीपी संचालन को लेकर एई जलकल केआर सिंह और जेई मुंशीलाल के बीच गालीगलौज हुई है। इसके पीछे यमुनापार एसटीपी की 37 लाख रुपये से होने वाली सिल्ट सफाई का टेंडर है जिसके लिए ईओ ब्रजेश कुमार और जेई मुंशीलाल ने एई केआर सिंह की सहमति भी नहीं ली।
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दरअसल दिसंबर माह में अपर निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय ने प्रदूषण संबंधी दिल्ली की टीम के साथ यमुनापार एसटीपी का निरीक्षण किया था। यहां पालिका द्वारा संचालित एसटीपी सिल्ट से भरे मिले थे। ईओ ने कहा था कि इनकी सफाई कराई जाएगी। इस पर अपर निदेशक ने सफाई के बजाय इस एसटीपी को जल निगम के एसटीपी से जोड़ने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बावजूद पालिका ने 37 लाख रुपये को ठिकाने लगाने की तैयारी कर ली जो विवाद का कारण बन गई।
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यमुना प्रदूषण नियंत्रण के लिए मथुरा नगर पालिका प्रति वर्ष करीब ढाई करोड़ से ज्यादा खर्च करती है। इसके बावजूद एसटीपी और एसपीएस का संचालन ठप रहता है। यह खुद डीएम और यमुना कार्य योजना के नोडल अधिकारी सहित निकाय प्रभारी भी देख चुके हैं। स्थिति वर्षों से ज्यों की त्यों है।
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ठेकेदार और पालिका अफसरों के बीच एसटीपी संचालन के नाम पर बजट का बंदरबांट हो रहा है। बीते सप्ताह एसटीपी संचालन को लेकर एई जलकल केआर सिंह और जेई मुंशीलाल के बीच गालीगलौज हुई है। इसके पीछे यमुनापार एसटीपी की 37 लाख रुपये से होने वाली सिल्ट सफाई का टेंडर है जिसके लिए ईओ ब्रजेश कुमार और जेई मुंशीलाल ने एई केआर सिंह की सहमति भी नहीं ली।
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दरअसल दिसंबर माह में अपर निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय ने प्रदूषण संबंधी दिल्ली की टीम के साथ यमुनापार एसटीपी का निरीक्षण किया था। यहां पालिका द्वारा संचालित एसटीपी सिल्ट से भरे मिले थे। ईओ ने कहा था कि इनकी सफाई कराई जाएगी। इस पर अपर निदेशक ने सफाई के बजाय इस एसटीपी को जल निगम के एसटीपी से जोड़ने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बावजूद पालिका ने 37 लाख रुपये को ठिकाने लगाने की तैयारी कर ली जो विवाद का कारण बन गई।