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Mathura News: कछुओं की तीन दुर्लभ प्रजातियां मिलीं
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स्पाॅटेड पॉन्ड टर्टल।
फरह। जोधपुर झाल से उत्साह जनक खबर सामने आई है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस वेटलैंड में कछुओं की तीन प्रमुख प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की है। इनमें इंडियन फ्लैपशेल टर्टल, स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल और इंडियन रूफ्ड टर्टल शामिल हैं। संकटग्रस्त प्रजाति के इन कछुओं की उपस्थिति जोधपुर झाल के पारिस्थितिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
इंडियन फ्लैपशेल टर्टल को हिंदी में सुंदरी कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम लिसेमिस पंक्टाटा है। यह आईयूसीएन की रेड डाटा बुक में वल्नरेविल प्रजाति के रूप में दर्ज है। वहीं स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल का हिंदी नाम चित्तीदार कछुआ एवं कूर्म है। वैज्ञानिक नाम जियोक्लेमिस हैमिल्टोनी है और यह एनडेन्जर्ड प्रजाति के रूप में दर्ज है। तीसरी प्रजाति इंडियन रूफ्ड टर्टल को हिंदी में तिलहारा अथवा चंदन कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम पंगशुरा टेक्टा है। यह भी वल्नरेविल प्रजाति के रूप में दर्ज है।
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह ने बताया कि ये कछुए जल में मौजूद मृत जीवों, सड़े-गले पौधों को खाकर पानी को साफ रखते हैं। इससे पानी में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते। शैवाल और जलीय खरपतवार को नियंत्रित कर ये पानी में ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखते हैं। जिससे अन्य मछलियों और जलीय जीवों का जीवन सुरक्षित रहता है। डीएफओ वेंकटा श्रीकर पटेल ने बताया कि वन विभाग जोधपुर झाल वेटलैंड में जल प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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इंडियन फ्लैपशेल टर्टल को हिंदी में सुंदरी कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम लिसेमिस पंक्टाटा है। यह आईयूसीएन की रेड डाटा बुक में वल्नरेविल प्रजाति के रूप में दर्ज है। वहीं स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल का हिंदी नाम चित्तीदार कछुआ एवं कूर्म है। वैज्ञानिक नाम जियोक्लेमिस हैमिल्टोनी है और यह एनडेन्जर्ड प्रजाति के रूप में दर्ज है। तीसरी प्रजाति इंडियन रूफ्ड टर्टल को हिंदी में तिलहारा अथवा चंदन कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम पंगशुरा टेक्टा है। यह भी वल्नरेविल प्रजाति के रूप में दर्ज है।
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बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह ने बताया कि ये कछुए जल में मौजूद मृत जीवों, सड़े-गले पौधों को खाकर पानी को साफ रखते हैं। इससे पानी में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते। शैवाल और जलीय खरपतवार को नियंत्रित कर ये पानी में ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखते हैं। जिससे अन्य मछलियों और जलीय जीवों का जीवन सुरक्षित रहता है। डीएफओ वेंकटा श्रीकर पटेल ने बताया कि वन विभाग जोधपुर झाल वेटलैंड में जल प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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