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Mathura News: रोजगार की तलाश में थे...घायल होकर अस्पताल में पहुंचे
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मथुरा। मंगलवार सुबह सड़क हादसे में शामिल घायलों में अधिकांशत: बुंदेलखंड क्षेत्र के लोग थे। ये सभी रोजगार की तलाश में दिल्ली, गुड़गांव और नोयडा जा रहे थे। इन्हीं घायलों में एक ही परिवार के तीन लोग शामिल हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बलदेव में हुए भीषण सड़क हादसे में घायलों की संख्या सैकड़ा तक पहुंच गई। इस हादसे में शामिल एक स्लीपर कोच में सवार हमीरपुर के बिलगांव निवासी भारत अपने साथ मनीष, मोहित और आशिष आदि भतीजों को लेकर हमीरपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। मंगलवार सुबह सबेरे हुए सड़क हादसे में भारत, मनीष और मोहित घायल हो गए। तीनों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। जिन्हें गंभीर चोटें होने के कारण दूसरे दिन बुधवार को भी अस्पताल में भर्ती रखा गया। इनके साथ आशीष किसी प्रकार सकुशल बच गया।
हादसे में घायल मनीष परिवार में सबसे छोटा है। घर में सात सदस्य हैं, जो भी कमाते हैं वह कम पड़ जाता है। पूरे परिवार का जीवन खेती पर निर्भर है। अब मनीष के बड़े होते ही उसे काम पर भेजा था। अब उसके इलाज के लिए इंतजाम करना पड़ेगा।
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बलराम, घायल मनीष के पिता
बुंदेलखंड क्षेत्र में रोजगार की बेहद कमी है। अधिकांशत: लोगों का जीवन मजदूरी से चलता है। सर्दियों के समय में ईंट भट्टों पर नहीं जाते हैं तो दिल्ली काम के लिए निकल जाते हैं। कुछ दिनों पूर्व ही तीनों बच्चों ने अपने लिए काम तलाशा था।
विक्रम घायल मोहित के चाचा
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बलदेव में हुए भीषण सड़क हादसे में घायलों की संख्या सैकड़ा तक पहुंच गई। इस हादसे में शामिल एक स्लीपर कोच में सवार हमीरपुर के बिलगांव निवासी भारत अपने साथ मनीष, मोहित और आशिष आदि भतीजों को लेकर हमीरपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। मंगलवार सुबह सबेरे हुए सड़क हादसे में भारत, मनीष और मोहित घायल हो गए। तीनों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। जिन्हें गंभीर चोटें होने के कारण दूसरे दिन बुधवार को भी अस्पताल में भर्ती रखा गया। इनके साथ आशीष किसी प्रकार सकुशल बच गया।
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हादसे में घायल मनीष परिवार में सबसे छोटा है। घर में सात सदस्य हैं, जो भी कमाते हैं वह कम पड़ जाता है। पूरे परिवार का जीवन खेती पर निर्भर है। अब मनीष के बड़े होते ही उसे काम पर भेजा था। अब उसके इलाज के लिए इंतजाम करना पड़ेगा।
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बलराम, घायल मनीष के पिता
बुंदेलखंड क्षेत्र में रोजगार की बेहद कमी है। अधिकांशत: लोगों का जीवन मजदूरी से चलता है। सर्दियों के समय में ईंट भट्टों पर नहीं जाते हैं तो दिल्ली काम के लिए निकल जाते हैं। कुछ दिनों पूर्व ही तीनों बच्चों ने अपने लिए काम तलाशा था।
विक्रम घायल मोहित के चाचा