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Mathura News: ये परिचालक हैं खास, कोई बीटीसी तो कोई बीएड पास

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jun 2025 12:58 AM IST
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These conductors are special, some have BTC and some have B.Ed
मथुरा। मथुरा डिपो की बस में शनिवार को यात्री की टिकट बनाती महिला परिचालक लवी।  - फोटो : mathura
अम्बर अग्निहोत्री
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मथुरा। स्नातक, परास्नातक, बीएड, बीटीसी और कई प्रोफेशनल डिग्री रखने वालीं महिलाएं रोडवेज बसों में यात्रियों के टिकट बना रहीं हैं। इन महिलाओं का लक्ष्य दूसरा था, लेकिन लंबे समय से भर्ती नहीं आने से इन्होंने फिर संविदा परिचालक बनने का रास्ता चुना है। अब मथुरा डिपो में 24 महिलाएं अलग-अलग रूटों पर बसों में टिकट बना रहीं हैं।
आगरा मंडल में संविदा महिला परिचालकों की भर्ती के लिए मई में साक्षात्कार हुए थे। इसमें 24 महिलाओं ने साक्षात्कार पास किया था। इन महिलाओं को प्रशिक्षण के बाद अलग-अलग रूटों पर जिम्मेदारी दे दी गई है। परिवहन निगम के अधिकारियों ने बताया कि बसों में महिलाएं टिकट बना रहीं हैं। इससे महिला यात्रियों को भी बस में सफर के दौरान सुरक्षा का अहसास होता है।
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उधर, परिचालक बनीं महिलाओं में से अधिकांश उच्च शिक्षित हैं। इसके बाद भी नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने परिचालक बनने का रास्ता चुना। इसमें सबसे अधिक संख्या में बीएड और बीटीसी पास कर शिक्षक बनने का सपना संजोने वालीं महिलाएं शामिल हैं। शिक्षक भर्ती न होने और कई भर्तियों के मामलों में न्यायालयों में सुनवाई के चलते उन्होंने परिचालक बनना ही बेहतर समझा। हालांकि अभी भी उन्होंने हार नहीं मानी हैं।
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उनका कहना है कि अगर भर्ती आएगी तो वे फिर से प्रयास करेंगी और अपना सपना पूरा करेंगीं। तब तक वे रोडवेज में अपनी सेवाएं देतीं रहेंगीं। संवाद
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केस एक
-मथुरा डिपो में संविदा परिचालक प्रियंका आनंद ने 2015 में बीएड की डिग्री हासिल की थी। वह शिक्षा के क्षेत्र में अपना कॅरिअर बनाना चाहतीं थीं लेकिन सरकार द्वारा शिक्षकों के खाली पद भरने के लिए भर्ती निकालने में देरी की जाती रही। अंत में प्रियंका ने रोजगार के लिए विकल्प के तौर पर रोडवेज में संविदा परिचालक बनने का रास्ता चुन लिया।
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केस दो
-प्रियंका यादव ने 2022 में बीएड करने के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा भी पास कर ली। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वह शिक्षक बन जाएंगी लेकिन 2022 के बाद से अब तक कोई भी शिक्षक भर्ती की अधिसूचना सरकार ने जारी नहीं की। ऐसे में प्रियंका ने भी आत्मनिर्भर बनने के लिए रोडवेज में संविदा परिचालक बनना ही बेहतर समझा।

संविदा परिचालक बनने के लिए इंटरमीडिएट थी योग्यता
परिवहन निगम ने जब संविदा महिला परिचालक की भर्ती निकाली तो यह साफ कर दिया था कि इसके लिए योग्यता इंटरमीडिएट के साथ ही कंप्यूटर का बेसिक डिप्लोमा होगा लेकिन रोजगार पाने के लिए स्नातक और परास्नातक डिग्रीधारक महिलाओं ने भी इसके लिए आवेदन किया।

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वर्जन

डिपो को 24 संविदा महिला परिचालक मिली हैं। इन सभी का प्रशिक्षण भी हो चुका है। अधिकांश उच्च शिक्षा या किसी विशेष कोर्स का डिप्लोमा कर चुकी हैं। सभी को अलग-अलग रूटों की बसों में जिम्मेदारी दी गई है।
-मदन मोहन शर्मा, एआरएम
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