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Mathura News: राष्ट्रीय राजमार्ग पर 3 घंटे रहे जाम के हालात
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कोसीकलां (मथुरा)। राजमार्ग स्थित श्रीजी निकुंज कॉलोनी परिसर में चल रही पं. प्रदीप मिश्रा सीहोर वालों की शिव महापुराण कथा सुनने इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। इसके कारण सोमवार को कथा समापन के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर तीन घंटे जाम के हालात बने रहे।
कथा सुनने के लिए प्रतिदिन स्थानीय लोगों के अलावा अन्य प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सोमवार शाम जब कथा समाप्त हुई तो लोगों की भीड़ का रेला राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिखाई दिया। इसके कारण जाम के हालात बन गए। करीब 3 घंटे तक यह स्थिति रही। पुलिसकर्मी भी मूकदर्शक बने रहे।
इधर, कथा के चौथे दिन पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि यदि आपके आसपास कोई अच्छा कार्य चल रहा है तो उसमें बन पड़े तो सहयोग करो। उसका विरोध तो किसी कीमत पर नहीं करो। अपने जीवन को दान-पुण्य और संकीर्तन से जोड़ते हुए चलो।
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उन्होंने कहा कि जीवन में छल कपट से बचकर आत्मीयजन के बीच कटुता को छोड़कर प्रेम भाव से रहो। यदि सुखी संपन्नता बनना चाहते हो तो जागरूक बनो। अच्छे काम में बढ़ चढ़कर भाग लो। यदि अहंकार में क्रोध आ गया तो पूजा अधूरी रह जाएगी। सुभाष चंद बासईयां, सौरभ अग्रवाल, दिनेश बठैनियां, विनोद जैन, दिलीप बासईया महंत चैतन्यदास महाराज आदि थे।
पत्रों को पढ़कर किया निदान
कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने कुछ पत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ भक्तों ने उन्हें पत्र भेजा है। उनमें से कुछ पत्रों को मिश्रा ने भक्तों को पढ़कर सुनाकर निदान बताया। कथा के दौरान एक महिला ने पंडित प्रदीप मिश्रा को लिखकर भेजा कि आप मध्यप्रदेश के बाहर सात दिन की कथा करते हो लेकिन प्रदेश में पांच दिन की ही कथा क्यों करते हो। इसके अलावा श्रोताओं ने मंच से अपने अनुभव सुनाए।
भंडारे की व्यवस्था में जुटे सेवाभावी : शिवलिंग निर्माण और कथा सुनने के अलावा प्रतिदिन बड़ी संख्या में भंडारे में भी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। वेदप्रकाश अग्रवाल, उद्यमी तेजवंत जैन मुन्ना, कमल किशोर वार्ष्णेय आदि थे।
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कथा सुनने के लिए प्रतिदिन स्थानीय लोगों के अलावा अन्य प्रांतों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सोमवार शाम जब कथा समाप्त हुई तो लोगों की भीड़ का रेला राष्ट्रीय राजमार्ग पर दिखाई दिया। इसके कारण जाम के हालात बन गए। करीब 3 घंटे तक यह स्थिति रही। पुलिसकर्मी भी मूकदर्शक बने रहे।
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इधर, कथा के चौथे दिन पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि यदि आपके आसपास कोई अच्छा कार्य चल रहा है तो उसमें बन पड़े तो सहयोग करो। उसका विरोध तो किसी कीमत पर नहीं करो। अपने जीवन को दान-पुण्य और संकीर्तन से जोड़ते हुए चलो।
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उन्होंने कहा कि जीवन में छल कपट से बचकर आत्मीयजन के बीच कटुता को छोड़कर प्रेम भाव से रहो। यदि सुखी संपन्नता बनना चाहते हो तो जागरूक बनो। अच्छे काम में बढ़ चढ़कर भाग लो। यदि अहंकार में क्रोध आ गया तो पूजा अधूरी रह जाएगी। सुभाष चंद बासईयां, सौरभ अग्रवाल, दिनेश बठैनियां, विनोद जैन, दिलीप बासईया महंत चैतन्यदास महाराज आदि थे।
पत्रों को पढ़कर किया निदान
कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने कुछ पत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ भक्तों ने उन्हें पत्र भेजा है। उनमें से कुछ पत्रों को मिश्रा ने भक्तों को पढ़कर सुनाकर निदान बताया। कथा के दौरान एक महिला ने पंडित प्रदीप मिश्रा को लिखकर भेजा कि आप मध्यप्रदेश के बाहर सात दिन की कथा करते हो लेकिन प्रदेश में पांच दिन की ही कथा क्यों करते हो। इसके अलावा श्रोताओं ने मंच से अपने अनुभव सुनाए।
भंडारे की व्यवस्था में जुटे सेवाभावी : शिवलिंग निर्माण और कथा सुनने के अलावा प्रतिदिन बड़ी संख्या में भंडारे में भी श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। वेदप्रकाश अग्रवाल, उद्यमी तेजवंत जैन मुन्ना, कमल किशोर वार्ष्णेय आदि थे।