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जमुनावता में कभी बहती थी यमुना की अविरल धारा
मथुरा
Updated Sat, 13 May 2017 11:53 PM IST
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कुंभनदास की जन्मस्थली का फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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कहते हैं कि कभी यहां से यमुना की अविरल धारा बहा करती थी, इसीलिए इस गांव का नाम जमुनावता पड़ गया। अब यह गांव ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग का पड़ाव स्थल होने के साथ पुष्टि मार्ग के अनुयायी अष्टछाप के प्रमुख कवि कुंभनदास की जन्म स्थली के रूप मे जाना
जाता है। यह वही कुंभनदास हैं जिन्हें सम्राट अकबर द्वारा जबरन दरबार में बुलाने पर उन्होंने कविताओं के माध्यम से अकबर को खरी-खरी सुना डाली थीं। भगवान में प्रगाढ़ आस्था व भजन के प्रेमी कवि कुंभनदास ने सम्राट अकबर को जो खरी खरी सुनाई वह लाइनें भी कवित्व की अनुपम लाइनों मे शुमार हो गईं।
संतन कहां सीकरी सौ काम
आवत जात पन्हैया टूटी
विसर गयो हरिनाम।।
जिनको मुख देखें दुख उपजत
ताको करनो पडौ प्रनाम।
कुंभनदास लाल गिरधर प्रभु
यह सब झूठो धाम।।
मिश्रित जातिगत आबादी वाला यह गांव मथुरा रोड पर गोवर्धन से मात्र दो किमी की दूरी पर स्थित है। चौपाल पर बैठे गांव के बुजुर्ग प्यारे लाल सैनी, भगवान सिंह सहित युवा दिनेश चंद सैनी, केशवदेश, करतार सिंह, छैल बिहारी, देव ठाकुर और राकेश आदि बताते हैं कि यहां चहल-पहल तभी होती है जब गुजराती व महाराष्ट्र के पुष्टिमार्गीय भक्त यहां कुंभनदास की समाधि के दर्शन के लिए आतेे हैं।
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पहचान
-ब्रज चौरासी कोस यात्रा का पड़ाव स्थल है गांव।
-अष्टछाप के प्रमुख कवि कुंभनदास की जन्म स्थली।
-कुंभन तलाई जहां कुंभन दास करते थे शृंगार व भजन।
परेशानियां...
-खारे पानी की समस्या से जूझते ग्रामीण डेढ़ किलोमीटर दूर से भरकर लाते हैं पीने का पानी, शोपीस बनी टंकी।
-गोचारण भूमि, कुंभन तलाई सहित सरकारी जमीनों पर दबंगों ने कर लिए हैं कब्जे, रास्ताें पर है अतिक्रमण
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जाता है। यह वही कुंभनदास हैं जिन्हें सम्राट अकबर द्वारा जबरन दरबार में बुलाने पर उन्होंने कविताओं के माध्यम से अकबर को खरी-खरी सुना डाली थीं। भगवान में प्रगाढ़ आस्था व भजन के प्रेमी कवि कुंभनदास ने सम्राट अकबर को जो खरी खरी सुनाई वह लाइनें भी कवित्व की अनुपम लाइनों मे शुमार हो गईं।
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संतन कहां सीकरी सौ काम
आवत जात पन्हैया टूटी
विसर गयो हरिनाम।।
जिनको मुख देखें दुख उपजत
ताको करनो पडौ प्रनाम।
कुंभनदास लाल गिरधर प्रभु
यह सब झूठो धाम।।
मिश्रित जातिगत आबादी वाला यह गांव मथुरा रोड पर गोवर्धन से मात्र दो किमी की दूरी पर स्थित है। चौपाल पर बैठे गांव के बुजुर्ग प्यारे लाल सैनी, भगवान सिंह सहित युवा दिनेश चंद सैनी, केशवदेश, करतार सिंह, छैल बिहारी, देव ठाकुर और राकेश आदि बताते हैं कि यहां चहल-पहल तभी होती है जब गुजराती व महाराष्ट्र के पुष्टिमार्गीय भक्त यहां कुंभनदास की समाधि के दर्शन के लिए आतेे हैं।
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पहचान
-ब्रज चौरासी कोस यात्रा का पड़ाव स्थल है गांव।
-अष्टछाप के प्रमुख कवि कुंभनदास की जन्म स्थली।
-कुंभन तलाई जहां कुंभन दास करते थे शृंगार व भजन।
परेशानियां...
-खारे पानी की समस्या से जूझते ग्रामीण डेढ़ किलोमीटर दूर से भरकर लाते हैं पीने का पानी, शोपीस बनी टंकी।
-गोचारण भूमि, कुंभन तलाई सहित सरकारी जमीनों पर दबंगों ने कर लिए हैं कब्जे, रास्ताें पर है अतिक्रमण