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Mathura News: रक्तदान पर चल रही 53 बच्चों की जीवन की डोर
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वृंदावन। थैलेसीमिया बेहद गंभीर और आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें हीमोग्लोबिन बहुत कम बनता है, ये बीमारी माता-पिता से बच्चों में आती है। मथुरा में इस बीमारी से ग्रसित 53 बच्चे हैं, जिन्हें हर माह में दो बार 2 से 4 यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ता है। जिले में इसका उपचार तो दूर जांच की व्यवस्था तक नहीं है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की सबसे बड़ी परेशानी है कि अगर समय पर रक्त न चढ़ाया जाए तो जान बचाने की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं।
डॉक्टर भूदेव ने बताया कि थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों में रक्त बहुत कम बनता है। रक्त की कमी से बच्चा जान गंवा सकता है। वहीं यदि रक्त चढ़ाएं तो आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो लीवर और तिल्ली पर गंभीर असर डालता है। इस आयरन को दवाओं से नियंत्रित किया जाता है जो कि मथुरा के जिला अस्पताल सहित किसी भी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।
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निजी अस्पताल जाते हैं पीड़ित मथुरा के होलीगेट निवासी संजय सैनी ने बताया कि उनका दस वर्ष का बेटा वृंदावन के रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में 20 दिन में रक्त चढ़वाने जाता है। थैलेसीमिया ग्रसित बच्चों के लिए मथुरा के जिला अस्पताल में नि:शुल्क रक्त तो मिल जाता है लेकिन अन्य कोई सुविधा नहीं है। यही वजह है कि अधिकांश वे रक्त चढ़वाने के लिए निजी या चैरिटेबल हाॅस्पिटल जाते हैं। रक्त चढ़ने में लगभग 5 से 6 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
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14 बच्चों को उपलब्ध करा रहे रक्त
रक्तवीर संस्था के मुकेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले कुछ समय में कई बच्चे बीमारी से जीवन की जंग हार गए हैं। इस बीमारी का एकमात्र इलाज बोनमेरो ऑपरेशन है, जिसमें 30 से 40 लाख रुपये खर्च होते हैं। अधिकांश परिजन के लिए महंगा इलाज कराना चुनौती पूर्ण होता है। उनके द्वारा 14 बच्चों को समय-समय पर रक्त के साथ दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
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इन सुविधाओं की आवश्यकता
1- सरकारी अस्पताल में थैलेसिमिया कार्ड बनाए जाए।
2- आयरन मात्रा को नियंत्रित करने की दवा उपलब्ध हों।
3 - रक्त चढ़ने के दौरान नियमित रूप से जरूरी जांचें हों
4 -निजी हाॅस्पिटल में इलाज की नि:शुल्क व्यवस्था हो।
6- विकलांग प्रमाणपत्र, आयुष्मान कार्ड जारी किए जाएं
7- बच्चों को फिल्टर कार्ड वाला ही रक्त जारी किया जाए
8- अस्पताल में बोन मैरो के विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएं दिलाई जाएं
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थैलेसीमिया के प्रति माह उनके यहां 14 बच्चे रक्त के लिए आ रहे हैं, जिन्हें रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि इस बीमारी से ग्रसित अन्य बच्चे भी आएंगे उन्हें भी रक्त की कमी नहीं होने दी जाएगी।
डॉक्टर रितु रंजन, ब्लड बैंक प्रभारी, जिला अस्पताल
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मथुरा के सरकारी अस्पतालों में थैलेसीमिया की जांच और उपचार की व्यवस्था नहीं है। यहां इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की जांच हो सके इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉक्टर राधावल्लभ गुप्ता, सीएमओ
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डॉक्टर भूदेव ने बताया कि थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों में रक्त बहुत कम बनता है। रक्त की कमी से बच्चा जान गंवा सकता है। वहीं यदि रक्त चढ़ाएं तो आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो लीवर और तिल्ली पर गंभीर असर डालता है। इस आयरन को दवाओं से नियंत्रित किया जाता है जो कि मथुरा के जिला अस्पताल सहित किसी भी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।
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निजी अस्पताल जाते हैं पीड़ित मथुरा के होलीगेट निवासी संजय सैनी ने बताया कि उनका दस वर्ष का बेटा वृंदावन के रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में 20 दिन में रक्त चढ़वाने जाता है। थैलेसीमिया ग्रसित बच्चों के लिए मथुरा के जिला अस्पताल में नि:शुल्क रक्त तो मिल जाता है लेकिन अन्य कोई सुविधा नहीं है। यही वजह है कि अधिकांश वे रक्त चढ़वाने के लिए निजी या चैरिटेबल हाॅस्पिटल जाते हैं। रक्त चढ़ने में लगभग 5 से 6 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
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14 बच्चों को उपलब्ध करा रहे रक्त
रक्तवीर संस्था के मुकेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले कुछ समय में कई बच्चे बीमारी से जीवन की जंग हार गए हैं। इस बीमारी का एकमात्र इलाज बोनमेरो ऑपरेशन है, जिसमें 30 से 40 लाख रुपये खर्च होते हैं। अधिकांश परिजन के लिए महंगा इलाज कराना चुनौती पूर्ण होता है। उनके द्वारा 14 बच्चों को समय-समय पर रक्त के साथ दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
इन सुविधाओं की आवश्यकता
1- सरकारी अस्पताल में थैलेसिमिया कार्ड बनाए जाए।
2- आयरन मात्रा को नियंत्रित करने की दवा उपलब्ध हों।
3 - रक्त चढ़ने के दौरान नियमित रूप से जरूरी जांचें हों
4 -निजी हाॅस्पिटल में इलाज की नि:शुल्क व्यवस्था हो।
6- विकलांग प्रमाणपत्र, आयुष्मान कार्ड जारी किए जाएं
7- बच्चों को फिल्टर कार्ड वाला ही रक्त जारी किया जाए
8- अस्पताल में बोन मैरो के विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएं दिलाई जाएं
थैलेसीमिया के प्रति माह उनके यहां 14 बच्चे रक्त के लिए आ रहे हैं, जिन्हें रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि इस बीमारी से ग्रसित अन्य बच्चे भी आएंगे उन्हें भी रक्त की कमी नहीं होने दी जाएगी।
डॉक्टर रितु रंजन, ब्लड बैंक प्रभारी, जिला अस्पताल
मथुरा के सरकारी अस्पतालों में थैलेसीमिया की जांच और उपचार की व्यवस्था नहीं है। यहां इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की जांच हो सके इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉक्टर राधावल्लभ गुप्ता, सीएमओ