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Mathura News: जेन-जी पर दारोमदार... मशाल उठाकर दी आंदोलन को धार
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जेन जी काे मशाल सौंपते हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह।
वृंदावन। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को सफल बनाने के लिए हिंदू पक्षकारों ने जेन-जी को आधार बनाया है। इसके लिए बुधवार को परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीराधाकृष्ण कृपा धाम में सभा का आयोजन कर संतों की माैजूदगी में युवाओं के हाथों में मशाल थमाकर आंदोलन की बागडोर साैंपी गई। युवाओं ने मशाल लेकर मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए चल रहे आंदोलन को नई दिशा देने का संकल्प लिया।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हिंदू पक्षकार का दावा है कि जेन-जी इसमें निर्णायक साबित होंगे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है वर्तमान समय में जेन-जी की बढ़ती क्षमताओं को नजर अंजाद नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में युवाओं को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को मशाल सौंपना महज प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि नई पीढ़ी को इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने की शुरुआत है। अब युवाओं के माध्यम से गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण की मांग को व्यापक जनसहभागिता से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के युवाओं के साथ सेवानिवृत्त अधिकारियों, शिक्षकों, पुरातत्वविदों, इतिहासकारों, डॉक्टरों, सैनिकों, किसानों और महिला संगठनों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
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उन्होंने युवाओं को इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा दी और बताया कि न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं। कानूनी प्रक्रिया के साथ सामाजिक स्तर पर भी जन जागरण जारी रहेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संत गोविंदानंद तीर्थ ने मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर के पुनर्निर्माण की बात दोहराई।
महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, संत बलराम बाबा, महामंडलेश्वर आदित्यानंद महाराज और वृंदावन इस्कॉन के अध्यक्ष पंचगौड़ा दास ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन किया। सभा में संत कृष्णमुरारी, संत श्यामानंद, कुंवर दामोदर सिंह, आरबी चौधरी, अशोक प्रताप सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, जितेंद्र सिंह, चंदन सिंह, डीडी चौहान, रत्नेश मिश्रा आदि मौजूद रहे। संचालन आचार्य रामविलास चतुर्वेदी एवं मांडवी राठौर ने किया।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हिंदू पक्षकार का दावा है कि जेन-जी इसमें निर्णायक साबित होंगे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और पक्षकार अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है वर्तमान समय में जेन-जी की बढ़ती क्षमताओं को नजर अंजाद नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में युवाओं को शामिल किया गया है।
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उन्होंने कहा कि युवाओं को मशाल सौंपना महज प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि नई पीढ़ी को इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने की शुरुआत है। अब युवाओं के माध्यम से गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण की मांग को व्यापक जनसहभागिता से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के युवाओं के साथ सेवानिवृत्त अधिकारियों, शिक्षकों, पुरातत्वविदों, इतिहासकारों, डॉक्टरों, सैनिकों, किसानों और महिला संगठनों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
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उन्होंने युवाओं को इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा दी और बताया कि न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए जा चुके हैं। कानूनी प्रक्रिया के साथ सामाजिक स्तर पर भी जन जागरण जारी रहेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संत गोविंदानंद तीर्थ ने मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर के पुनर्निर्माण की बात दोहराई।
महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, संत बलराम बाबा, महामंडलेश्वर आदित्यानंद महाराज और वृंदावन इस्कॉन के अध्यक्ष पंचगौड़ा दास ने भी युवाओं का उत्साहवर्धन किया। सभा में संत कृष्णमुरारी, संत श्यामानंद, कुंवर दामोदर सिंह, आरबी चौधरी, अशोक प्रताप सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, जितेंद्र सिंह, चंदन सिंह, डीडी चौहान, रत्नेश मिश्रा आदि मौजूद रहे। संचालन आचार्य रामविलास चतुर्वेदी एवं मांडवी राठौर ने किया।