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Mathura News: मौसम बदलते ही बढ़ी अति कुपोषित बच्चों की संख्या

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Apr 2025 12:40 AM IST
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The number of severely malnourished children increased as the weather changed
मथुरा। जिले में हर महीने कुपोषण का प्रकोप बढ़ रहा है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़े इसे प्रमाणित कर रहे हैं। जनवरी से मार्च तक की बात करें तो पांच साल तक के 3,995 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए। मौसम में बदलाव आने के कारण यह आंकड़ा और बढ़ा है। अप्रैल का महीना खत्म नहीं हुआ लेकिन अब तक करीब 1550 नए और अतिकुपोषित बच्चे विभाग ने खोज लिए।
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जिले में 23630 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह अभियान चलाया जा रहा है। इसमें बच्चों का वजन, लंबाई की जांच की जाती है। जनवरी में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 1243 और कुपोषित बच्चों की संख्या 8984 थी। फरवरी में दोबारा निगरानी की गई तो अतिकुपोषित बच्चे 1255 और 7986 कुपोषित बच्चे मिले। मार्च में संख्या में वृद्धि हो गई। 1497 अतिकुपोषित और 8532 कुपोषित बच्चे मिले हैं।
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सुपोषित बनाने के लिए सात माह से तीन वर्ष तक के कुपोषित प्रत्येक बच्चों को 1.00 किलो गेहूं, दलिया, 1.00 किलो चावल, 1.00 चना दाल और 0.455 किलो रिफाइंड दिया जाता है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को 500 ग्राम गेंहू, दलिया, 500 ग्राम चावल, 500 ग्राम चना दाल दिया जा रहा है। वहीं, अतिकुपोषित बच्चों को 1.5 किलो गेहूं, दलिया, 1.5 किलो चावल, दो किलो चना दाल और 0.455 किलो रिफाइंड दिया जाता है। गर्भवतियों को भी 1.5 किलो गेहूं, दलिया, एक किलो चावल, एक किलो चना दाल और 0.455 किलो रिफाइंड दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों से हर माह करीब 35 हजार गर्भवतियों के साथ ही 2.96 लाख पांच वर्ष तक बच्चों को पुष्टाहार दिया जाता है।
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आवश्कतानुसार भेजा जाता है एनआरसी

जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्धि मिश्रा ने बताया कि गर्मी में डायरिया, बुखार के चलते अति कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ जाती है। अगर बच्चे की स्थिति ज्यादा खराब होती है तो वृंदावन के संयुक्त जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। यहां बच्चे के पोषाहार के साथ ही तीमारदार के भोजन की भी व्यवस्था होती है, साथ ही 50 रुपये प्रतिदिन का भत्ता भी दिया जाता है। बच्चे को चिकित्सक एवं डायटीशियन की देखरेख में रखा जाता है।
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