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Mathura News: प्लेटफार्म की संख्या चार गुना बढ़ी, जवानों की संख्या वही

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jun 2024 01:15 AM IST
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The number of platforms increased four times, the number of soldiers remained the same
मथुरा। रिमॉडलिंग के बाद जंक्शन का कायाकल्प हो चुका है, लेकिन वर्ष 1967 में खुले आरपीएफ थाने के हालात नहीं बदले हैं। प्लेटफार्म की संख्या चार गुना बढ़ने पर भी आरपीएफ टीम की संख्या 57 साल बाद भी उतनी ही है।
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कान्हा की नगरी में हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इनमें करीब-करीब 65 हजार श्रद्धालु ऐसे हैं जो ट्रेन में सफर तय करके मथुरा जंक्शन तक पहुंचते हैं। आज जंक्शन पर करीब 12 प्लेटफार्म बन चुके हैं। सवारियों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। बस कुछ नहीं बढ़ पाया है तो वह है आरपीएफ टीम की संख्या। सन 1967 में जंक्शन पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ थाना स्थापित किया गया था। उस समय थाने पर एक निरीक्षक, पांच उपनिरीक्षक और 54 कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की तैनाती की गई थी।
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1967 से अब तक हालात बदल चुके हैं, लेकिन आरपीएफ थाने पर तैनात जवानों की संख्या नहीं बढ़ पाई है। वहीं की वहीं है। आज भी करीब 70 किलोमीटर लंबे क्षेत्र की निगरानी के लिए आरपीएफ पोस्ट पर केवल 60 जवान ही तैनात हैं। ऐसे में जंक्शन पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ के जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। स्टाफ कम होने की वजह से कई बार तो कर्मचारियों को इमरजेंसी में भी छुट्टी नहीं मिल पाती। संवाद
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1967 में जंक्शन पर थे केवल तीन प्लेटफार्म
जिस समय जंक्शन पर आरपीएफ थाना खोला गया था। उस समय जंक्शन पर केवल तीन प्लेटफार्म हुआ करते थे। यात्रियों की संख्या भी बहुत अधिक नहीं होती थी। तब 60 जवान यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त हुआ करते थे। अब जंक्शन का विस्तार हो चुका है। प्लेटफार्म की संख्या चार गुना बढ़कर 12 हो चुकी है। रोजाना जंक्शन पर आने वाले यात्रियों की संख्या भी 65 हजार के पार है। ऐसे में पोस्ट पर जवानों की कमी विभागीय अधिकारियों को काफी खलती है। आरपीएफ की इस टीम को करीब 70 किलोमीटर के क्षेत्रफल में ड्यूटी देनी पड़ती है। अझई, गोवर्धन से फरह तक का हिस्सा जंक्शन आरपीएफ के कार्यक्षेत्र में आता है।

जंक्शन पर है करीब 300 ट्रेनों का आवागमन
जंक्शन पर रोजाना 300 से ज्यादा ट्रेनों का आवागमन होता है। इनमें से करीब 100 ट्रेनों का जंक्शन पर ठहराव होता है। 95 ट्रेनें ऐसी हैं जो रोजाना जंक्शन पर ठहराव लेती हैं। इन ट्रेनों में सफर करके हजारों की संख्या में यात्री मथुरा जंक्शन पहुंचते हैं, लेकिन आरपीएफ के पास उनकी सुरक्षा के लिए केवल 60 आरपीएफ कर्मी मौजूद रहते हैं। जबकि जंक्शन पर जीआरपी के जवानों की संख्या इससे दोगुनी है।


वर्जन
जंक्शन के आरपीएफ थाने पर 1 निरीक्षक, 5 उपनिरीक्षक, 54 कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल तैनात हैं। जब से थाना खुला है तब से अब तक स्टाफ की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है।

-अवधेश गोस्वामी, प्रभारी निरीक्षक आरपीएफ पोस्ट जंक्शन
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